ऋषी तिवारी
बॉक्स ऑफिस पर ‘मर्दानी’ फ्रैंचाइज़ी की पिछली दोनों फिल्मों को मिली जबरदस्त सफलता और आलोचकों की सराहना के बाद अब ‘मर्दानी 3’ दर्शकों के सामने है। रानी मुखर्जी की इस नई पेशकश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मजबूत विषयवस्तु और सशक्त अभिनय के दम पर भी फिल्में दर्शकों को बांध सकती हैं।
रानी मुखर्जी एक बार फिर ‘मर्दानी’ सीरीज के साथ लौटी
हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान रानी मुखर्जी ने कहा था कि उन्हें इस तरह के गंभीर और सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना बेहद पसंद है। यही वजह है कि लंबे अंतराल के बाद वह एक बार फिर ‘मर्दानी’ सीरीज के साथ लौटी हैं। मौजूदा दौर में जहां तीन से साढ़े तीन घंटे की फिल्में रिकॉर्ड बिज़नेस कर रही हैं, वहीं लगभग दो घंटे की यह फिल्म अपनी कसी हुई स्क्रिप्ट और तेज़ रफ्तार कहानी के कारण दर्शकों की तारीफें बटोर रही है। रानी मुखर्जी ऐसे विषय को चुनने के लिए साधुवाद की पात्र हैं, जिसे अक्सर बॉक्स ऑफिस के लिहाज़ से जोखिम भरा माना जाता है। बावजूद इसके ‘मर्दानी 3’ एक ऐसी परफेक्ट फिल्म बनकर उभरी है, जो शुरुआत से अंत तक दर्शकों को कहानी और किरदारों से जोड़े रखती है।
अलग और प्रभावशाली कहानी
‘मर्दानी 3’ की कहानी इस फ्रैंचाइज़ी की पिछली दोनों फिल्मों से अलग और नया अनुभव देती है। यह फिल्म छोटी बच्चियों के खिलाफ हो रहे अपराध, उनकी सुरक्षा और पुलिस की एक साफ-सुथरी, बेदाग छवि को सामने रखती है। हिंदी फिल्मों में अक्सर पुलिस को नकारात्मक रूप में दिखाया जाता है, लेकिन यहां पुलिस व्यवस्था का मानवीय और जिम्मेदार पक्ष देखने को मिलता है। निर्देशक ने शुरुआत से ही फिल्म का माहौल गंभीर रखा है, जो इस विषय के लिहाज़ से बेहद जरूरी था।
कहानी (स्टोरी प्लॉट)
फिल्म में एनआईए की अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) को एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस सौंपा जाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी की बेटी और घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी अचानक गायब हो जाती हैं। इसी दौरान अलग-अलग इलाकों से 8 से 13 साल की उम्र की 90 से अधिक बच्चियों के लापता होने की जानकारी सामने आती है।
जांच आगे बढ़ने पर शिवानी को पता चलता है कि इसके पीछे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह सक्रिय है। जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, कहानी ऐसे मोड़ पर पहुंचती है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार इतनी तेज हो जाती है कि स्क्रीन से नजर हटाना दर्शकों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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अभिनय
यह फिल्म भी पूरी तरह रानी मुखर्जी के कंधों पर टिकी है, लेकिन इस बार उनका किरदार पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से रानी ने शूटिंग से पहले करीब 20 दिनों की वर्कशॉप भी की। उनके चेहरे के भाव, गुस्सा, तनाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव हर दृश्य में प्रभावशाली नजर आते हैं। एक पुलिस अधिकारी की थकान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को रानी ने बेहद सधे हुए अंदाज़ में पेश किया है।
विलेन ‘अम्मा’ के किरदार में मल्लिका प्रसाद ने जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी दमदार मौजूदगी और रानी के साथ उनके दृश्य फिल्म को और भी प्रभावी बनाते हैं। ‘शैतान’ और ‘वश’ जैसी फिल्मों के बाद जानकी बोड़ीवाला इस फिल्म में अहम भूमिका में नजर आती हैं और शिवानी की टीम का हिस्सा बनकर पूरी तरह फिट बैठती हैं। अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक अभिराज मीनावाला की कहानी पर मजबूत पकड़ साफ नजर आती है। उन्होंने फिल्म को भटकने नहीं दिया और इसकी रफ्तार संतुलित रखी है। इंटरवल से पहले फिल्म थोड़ी धीमी जरूर लगती है, लेकिन क्लाइमेक्स चौंकाने वाला और प्रभावशाली है।
क्यों देखें ‘मर्दानी 3’
अगर आप रानी मुखर्जी के प्रशंसक हैं और सच्चाई से रूबरू कराने वाली, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो ‘मर्दानी 3’ को मिस करना आपकी भूल होगी। कलाकार रानी मुखर्जी, जानकी बोड़ीवाला, मल्लिका प्रसाद, निर्माता आदित्य चोपड़ा, निर्देशक अभिराज मीनावाला,सेंसर यू/ए और अवधि 126 मिनट है।


























