Maharashtra News: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर तेज़ भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए जो 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी, वह अब एक बार फिर एक ऐसे संकट से जूझ रही है जिसने पार्टी के भीतरी ढांचे को हिला कर रख दिया है। पार्टी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का एक विवादित पोस्ट और 6 लोकसभा सांसदों के अचानक लापता होने की खबरें मिलकर एक ऐसा राजनीतिक घमासान खड़ा कर गई हैं, जिसे महाराष्ट्र में ‘महासंग्राम’ की संज्ञा दी जा रही है।
संजय राउत का तीखा हमला और विवादित पोस्ट
शिवसेना (यूबीटी) में बढ़ रही नाराजगी और बगावत को लेकर संजय राउत ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक ऐसा पोस्ट शेयर किया, जिसने पूरे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने एक इमेज शेयर करते हुए लिखा कि कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं, मगर वफादार नहीं होते। इसके साथ ही उन्होंने कैप्शन में सिर्फ “जय महाराष्ट्र!” लिखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट किसी आम व्यक्ति के लिए नहीं था, बल्कि यह सीधा उन बागी सांसदों पर निशाना साधने वाला एक मानसिक युद्ध का हथियार था। राउत, जो कि अपनी बेबाक और कड़वी भाषा के लिए जाने जाते हैं, ने इस पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी छोड़ने वाले लोगों की वफादारी भी एक जानवर से भी बदतर है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ और 6 गायब सांसद
दरअसल, राउत का यह गुस्सा किसी आधारहीन नहीं था। पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द काफी तेजी से चल रहा है। सूत्रों की मानें तो उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों को भाजपा की सहयोगी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के लिए तैयार किया जा रहा है।
गुरुवार को इस बगावत के संकेत साफ तौर पर सामने आ गए, जब पार्टी की एक अहम संसदीय दल की बैठक मुंबई में रखी गई थी। इस बैठक में 6 सांसदों ने नामतौर पर शिरकत नहीं की। जिन सांसदों ने बैठक का बहिष्कार किया, उनमें नागेश आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इनके इस कदम ने पार्टी हाईकमान में खलबली मचा दी।
इसी बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए एक बॉलीवुड स्टाइल वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। शिंदे के इस बयान ने यूबीटी गुट की चिंताओं को और गहरा कर दिया।
50 करोड़ का लालच और ‘ऑपरेशन तुड़वा’ की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण पर संजय राउत ने इस सप्ताह की शुरुआत में ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े खुलासे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बागी सांसदों को पाला बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये तक की रकम की पेशकश की गई है।
अपने चिर-परिचित अंदाज में राउत ने कहा कि इन लोगों ने गद्दारी की इमारत खड़ी कर दी है। उन्होंने गुस्से में अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया और साफ चेतावनी दी कि शिवसेना (यूबीटी) अब पाला बदलने वालों के खिलाफ ‘ऑपरेशन तुड़वा’ शुरू करेगी। राउत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिवसेना की राजनीति हमेशा से सड़क के स्तर पर अपना दबदबा बनाने के लिए जानी जाती रही है।

“बेशर्मी से खुद को बेच दिया”
इस सियासी संकट पर पार्टी के युवा नेता और उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने भी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर बागी गुट पर कड़ा प्रहार किया। आदित्य ने लिखा कि एक बार फिर हम गंदी राजनीति का चौंकाने वाला उदाहरण देख रहे हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि ये बेशर्म, एहसान फरामोश और भ्रष्ट लोग, जो कुछ लोगों की वजह से 2024 में जीते थे, अब उन्हीं लोगों के साथ धोखा कर रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि चाहे वे कितने भी बहाने बनाएं, सच तो यह है कि उन्होंने बेशर्मी से खुद को बेच दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की जनता से अपील करते हुए कहा कि महाराष्ट्र ऐसी राजनीति को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।






















