Bihar News: बिहार के मधुबनी जिले में इस बार मोहर्रम का पर्व अपने आम महत्व से कहीं अधिक विशेष रहा। धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे के इस पवित्र अवसर पर जहां एक ओर ताजिया जुलूस और पारंपरिक लाठी खेल ने लोगों का ध्यान खींचा, वहीं दूसरी ओर कोतवाली चौक पर प्रदर्शित एक अनोखी ‘सिफल’ ने पूरे शहर की चर्चा हटा ली। इस सिफल में शहीदे-आजम के साथ-साथ एक ऐसे युवक की तस्वीर लगाई गई थी, जिसकी मौत ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
कोतवाली चौक पर छाया ‘सिफल’ का जादू
मधुबनी शहर के राजनीतिक और सामाजिक केंद्र कोतवाली चौक पर इस बार जो सिफल प्रदर्शित किया गया, वह कला और संदेश का अद्भुत मिश्रण था। इसकी भव्य सजावट और अनूठी थीम ने लोगों को खींचने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सिफल की सबसे बड़ी विशेषता उस पर लगी दो तस्वीरें थीं—एक ओर देश के महान क्रांतिकारी भगत सिंह की तस्वीर थी, तो दूसरी ओर शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत कुमार तिवारी की तस्वीर।
मोहर्रम के इतिहास में ‘शहादत’ और ‘इंसाफ’ के अद्भुत संगम को दर्शाता यह सिफल लोगों के बीच काफी चर्चित रहा। भगत सिंह और भरत तिवारी की तस्वीरों को देखने के लिए कोतवाली चौक पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग इसे अपने मोबाइल में कैद कर रहे थे और सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे थे। स्थानीय लोगों का मानना था कि इस सिफल के माध्यम से एक गहरा संदेश दिया गया है कि अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना और इंसाफ की मांग करना हर युग और हर धर्म में समान रूप से महत्वपूर्ण है।
भरत तिवारी का पूरा मामला
भरत तिवारी वर्ष 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत तिवारी के बीच एक मुठभेड़ हुई थी, जिसमें भरत की मौत हो गई थी। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह मुठभेड़ आत्मरक्षा में हुई थी और भरत पर पुलिस पर हमला करने का आरोप था। लेकिन, भरत के परिवार और ग्रामीणों ने पुलिस के इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया। परिवार का आरोप है कि भरत ने पहले ही अपने हथियार जमीन पर फेंक दिए थे और उसके बाद भी पुलिस ने उसे निशाना बनाकर गोली मार दी। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें परिवार के आरोपों को कुछ हद तक सहारा मिलता दिख रहा था।
इस मामले में जनता के गुस्से को देखते हुए प्रशासन को कदम उठाने पड़े और मामले की जांच शुरू हुई। वर्तमान में इस एनकाउंटर मामले में एसडीपीओ, थानाध्यक्ष समेत कुल पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यही कारण रहा कि भरत तिवारी जिले के युवाओं के बीच एक प्रतीक बन गए और मोहर्रम के अवसर पर उन्हें शहीदों की श्रृंखला में जोड़कर देखा गया।

ड्रोन और सीसीटीवी से रखी गई नजर
मोहर्रम के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए मधुबनी प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर था। जिलाधिकारी (DM) आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक (SP) योगेंद्र कुमार के नेतृत्व में विभिन्न संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया गया।
सुरक्षा के लिहाज से इस बार तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया। पूरे शहर और प्रमुख जुलूस रास्तों पर सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन कैमरों से नजर रखी गई। ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि हो, उसे तुरंत पकड़ा जा सके। संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट) के साथ पर्याप्त पुलिस बल को तैनात किया गया था और वरिष्ठ अधिकारी लगातार क्षेत्रों का दौरा करते रहे।
“शांतिपूर्ण भाईचारे का पर्व है मोहर्रम”
पर्व के सफल और शांतिपूर्ण संपन्न होने के बाद जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोहर्रम शांतिपूर्ण भाईचारे का पर्व है। इसे शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया है। किसी भी तरह की शोर-शराबा या विवादित स्थिति न बने, इसके लिए डीजे (DJ) पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई थी। असामाजिक तत्वों पर प्रशासन की पहली नजर रही। ड्रोन कैमरे के जरिए मधुबनी शहर में हर गतिविधि पर नजर रखी गई और बिना किसी अप्रिय घटना के यह पर्व संपन्न हुआ।






















