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दिल तीन बार रुका, लेकिन हर बार वापस आई सांसें, चमत्कारिक मामला

डॉक्टरों के अनुसार, हर बार उनके शरीर में दिल की धड़कन रुक गई थी और उन्हें सीपीआर (CPR) तथा डिफिब्रिलेटर के जरिए बिजली के झटके देकर वापस जिंदा किया गया। यह एक बेहद दुर्लभ मामला माना जाता है, क्योंकि लगातार कई बार दिल बंद होने के बाद भी किसी व्यक्ति का सामान्य जीवन में लौट आना आसान नहीं होता।

तीन बार जिंदगी और मौत की जंग जीतकर लौटा ब्रिटेन का यह शख्स

HIGHLIGHTS

  • 3 बार मरकर जिंदा हुआ यह डाकिया
  • यमराज के दरवाजे से तीन बार लौटा कार्ल
  • तीन बार मृत घोषित होने के बाद हुआ जिंदा
  • डॉक्टरों ने हर बार लौटाई नई जिंदगी
  • दोस्त की सूझबूझ ने बचाई जान

The Story of Cheating Death Three Times: क्या कोई इंसान तीन बार मरकर फिर से जिंदा हो सकता है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी या चमत्कार जैसा लगता है, लेकिन ब्रिटेन के रहने वाले कार्ल लॉकवुड के साथ ऐसा सचमुच हुआ। कार्ल का दिल एक नहीं, बल्कि तीन बार पूरी तरह धड़कना बंद हो गया था। मेडिकल भाषा में कहें तो वे तीन बार मौत के बेहद करीब पहुंच चुके थे, लेकिन डॉक्टरों और समय पर मिली मदद की वजह से हर बार उनकी सांसें वापस लौट आईं।

आज कार्ल न केवल स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि दोबारा अपने काम पर भी लौट चुके हैं। उनकी कहानी अब दुनियाभर में लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है और दिल की बीमारियों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम भी कर रही है।

ड्यूटी के दौरान अचानक आया कार्डियक अरेस्ट

कार्ल लॉकवुड ब्रिटेन की रॉयल मेल कूरियर कंपनी में काम करते हैं। साल 2019 में एक दिन वे अपनी ड्यूटी पर थे, तभी उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आ गया। देखते ही देखते वे जमीन पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचने से पहले उनका दिल तीन बार पूरी तरह बंद हो चुका था।

डॉक्टरों के अनुसार, हर बार उनके शरीर में दिल की धड़कन रुक गई थी और उन्हें सीपीआर (CPR) तथा डिफिब्रिलेटर के जरिए बिजली के झटके देकर वापस जिंदा किया गया। यह एक बेहद दुर्लभ मामला माना जाता है, क्योंकि लगातार कई बार दिल बंद होने के बाद भी किसी व्यक्ति का सामान्य जीवन में लौट आना आसान नहीं होता।

बेहद फिट थे कार्ल, फिर भी पड़ा दिल का दौरा

सबसे हैरानी की बात यह है कि कार्ल कोई बीमार या कमजोर व्यक्ति नहीं थे। वे एक सक्रिय और फिट डाकिया थे, जिनकी नौकरी में रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना शामिल था। इसके अलावा वे नियमित रूप से व्यायाम करते थे और उन्हें पहाड़ों पर ट्रैकिंग तथा अल्ट्रा रनिंग का भी शौक था।

अल्ट्रा रनिंग ऐसी लंबी दूरी की दौड़ होती है जो सामान्य मैराथन से भी ज्यादा कठिन मानी जाती है। ऐसे में किसी फिट व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट आना उनके परिवार, दोस्तों और डॉक्टरों के लिए भी बड़ा झटका था।

हालांकि कार्ल को पहले से ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ नाम की हृदय संबंधी बीमारी थी। इस स्थिति में दिल की धड़कनें सामान्य ताल में नहीं चलतीं और कभी-कभी अनियमित हो जाती हैं। वे इसके लिए नियमित रूप से दवाइयां भी ले रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इतना गंभीर हार्ट अटैक आ गया।

कार्ल ने बाद में बताया कि वे हमेशा अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहे हैं, इसलिए इस घटना ने उन्हें और उनके करीबियों को पूरी तरह हैरान कर दिया।

दोस्त ने बचाई जान

कार्ल आज जिस तरह स्वस्थ होकर लोगों से बात कर पा रहे हैं, उसका सबसे बड़ा श्रेय उनके एक सहकर्मी को जाता है। जिस समय वे कार्यालय में गिरे, उस वक्त उनके साथी कर्मचारी ने तुरंत स्थिति को समझ लिया और बिना समय गंवाए उन्हें सीपीआर देना शुरू कर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत सीपीआर न दिया जाए तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे स्थायी नुकसान या मौत हो सकती है।

कार्ल का कहना है कि अगर उनके दोस्त ने समय रहते मदद नहीं की होती, तो शायद वे आज जीवित नहीं होते। एम्बुलेंस के पहुंचने तक लगातार सीपीआर दिए जाने से उनके शरीर में रक्त संचार बना रहा और उनके दिमाग को गंभीर क्षति होने से बचाया जा सका।

अब बदल गई है जिंदगी

इस भयावह अनुभव के बाद कार्ल की जिंदगी काफी बदल गई है। पहले वे पैदल चलकर चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाते थे, लेकिन अब वे रॉयल मेल की वैन चलाकर डिलीवरी का काम करते हैं। वे अपनी सेहत पर पहले से ज्यादा ध्यान देते हैं और नियमित जांच भी कराते हैं।

कार्ल का कहना है कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे उन्हें दूसरी जिंदगी मिली हो। वे अब हर दिन को खास मानते हैं और चाहते हैं कि लोग अपने दिल की सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें।

कर्मचारियों के लिए शुरू हुई नई हेल्थ पहल

कार्ल की कहानी सामने आने के बाद ब्रिटेन की प्रमुख ऑनलाइन फार्मेसी Pharmacy2U ने रॉयल मेल के साथ मिलकर कर्मचारियों के लिए एक खास स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है।

इस पहल के तहत कंपनी के एक लाख से अधिक कर्मचारियों को मुफ्त डिजिटल सेल्फ-टेस्ट किट उपलब्ध कराई जा रही है। इन किट्स की मदद से कर्मचारी घर बैठे या अपने कार्यस्थल पर ही लगभग 10 मिनट में कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य की जांच कर सकते हैं।

कंपनी का मानना है कि व्यस्त जीवनशैली के कारण कई लोग नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते, जिससे हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं का समय पर पता नहीं चल पाता। यह डिजिटल पहल लोगों को समय रहते अपनी स्वास्थ्य स्थिति जानने और जरूरी कदम उठाने में मदद करेगी।

दिल की बीमारियों को लेकर सतर्क रहना जरूरी

कार्ल लॉकवुड की कहानी यह साबित करती है कि दिल की बीमारी केवल बुजुर्गों या अस्वस्थ लोगों को ही नहीं होती। फिट और सक्रिय लोग भी इसके शिकार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है।

कार्ल आज जीवित हैं क्योंकि उन्हें सही समय पर मदद मिली। उनकी कहानी लोगों को यह संदेश देती है कि आपात स्थिति में सीपीआर जैसी प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी किसी की जान बचा सकती है और समय पर जांच कई गंभीर बीमारियों को रोक सकती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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