Delhi News: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में वार्षिक उत्सव (फेस्ट) के दौरान हुई हिंसा और भगदड़ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कॉलेज प्रशासन की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 14 छात्रों और बाहरी लोगों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर FIR दर्ज कर ली है। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में कैंपस में तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप लगाया गया है।
यह पूरा मामला 8 और 9 अप्रैल को कॉलेज में आयोजित हुए वार्षिक उत्सव से जुड़ा है।
जाने कैसे बढ़ा विवाद?
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, 8 अप्रैल को फेस्ट के दौरान हंसराज कॉलेज और DU के अन्य कॉलेजों के छात्रों के बीच तकरार शुरू हो गई थी, जो अगले दिन यानी 9 अप्रैल को हिंसा में बदल गई। आरोप है कि 9 अप्रैल को लगभग 50 से 60 लोगों का एक बड़ा समूह, जिसमें कॉलेज के बाहरी लोग भी शामिल थे, बिना किसी अनुमति के कैंपस में घुस आया और उसने कार्यक्रम में जबरदस्त बाधा डाली। मॉरिस नगर पुलिस थाने में दर्ज की गई FIR में कुल 17 आरोपियों का जिक्र है, जिनमें चार छात्र संघ के पदाधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
कॉलेज प्रशासन की सख्त कार्रवाई
हिंसा के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत लगभग 30 छात्रों को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद गठित की गई अनुशासनात्मक समिति (Disciplinary Committee) ने 22 से अधिक छात्रों के खिलाफ विस्तृत कार्रवाई की सिफारिश की है।
इन सजाओं का आधार अलग-अलग है:
- 18 छात्रों पर सीधे तौर पर हिंसा और झड़प में शामिल होने का आरोप है।
- 4 छात्र संघ पदाधिकारियों पर अपनी जिम्मेदारी निभाने में कमी और स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगा है।
- इसके अलावा, करीब 7 अन्य छात्रों को कॉलेज प्रशासन के खिलाफ अनुशासनहीनता पूर्ण तरीके से विरोध करने पर सस्पेंड किया गया है।
विवाद की असली वजह क्या थी?
हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर रमा ने इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि फेस्ट से पहले ही प्रशासन को इनपुट मिले थे कि माहौल बिगड़ सकता है और बाहरी तत्व कैंपस में घुसने की कोशिश कर सकते हैं।
प्रिंसिपल ने बताया कि हमने छात्र संघ को सुझाव दिया था कि बाहरी कलाकारों को बुलाने के बजाय कॉलेज की अपनी 60 से अधिक सोसाइटीज के छात्रों को मंच पर प्रदर्शन का मौका दिया जाए। लेकिन छात्र संघ ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और बाहरी कलाकारों को बुलाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया पर फैलाई गई ‘झूठी जानकारी’
प्रोफेसर रमा ने छात्र संघ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों ने जानबूझकर सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई। छात्र संघ ने दावा किया था कि कॉलेज प्रशासन ने फेस्ट को रद्द कर दिया है, जबकि प्रशासन ने कभी भी ऐसा कोई फैसला नहीं लिया था। प्रिंसिपल ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि छात्र संघ द्वारा फेस्ट के लिए दिखाई गई स्पॉन्सरशिप राशि का पूरा पैसा अब तक कॉलेज खाते में नहीं आया है।
प्रशासन का संदेश
प्रिंसिपल रमा ने साफ किया कि कॉलेज में छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन कैंपस में अनुशासन बनाए रखना कॉलेज प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। किसी भी तरह की हिंसा और बाहरियों की घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, दिल्ली पुलिस अब FIR में नामजद आरोपियों की तलाश में जुट गई है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इस पूरे मामले से DU के अन्य कॉलेजों में भी सुरक्षा और फेस्ट गाइडलाइंस को लेकर चिंता बढ़ गई है।
























