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E20 पेट्रोल विवाद: E20 विवाद में अरविंद केजरीवाल का बड़ा एक्शन

Delhi News: अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इन 29 कंपनियों में से तीन को एक अलग और विस्तृत पत्र लिखा गया है। ये तीन कंपनियां हैं- मारुती सुजुकी, टोयोटा और हीरो। इन्हें अलग इसलिए चुना गया है क्योंकि 4 जुलाई को इन तीनों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया।

मारुति-टोयोटा घिरीं? केजरीवाल ने E20 पर पूछे चौंकाने वाले सवाल

HIGHLIGHTS

  • 20 पेट्रोल से पुरानी कार खराब? केजरीवाल ने अब पूछा
  • केजरीवाल का सवाल- पुरानी गाड़ी में ई20 पेट्रोल सुरक्षित है?
  • ई20 से नुकसान हो तो क्या ऑटो कंपनियां देंगी मुआवजा?
  • केजरीवाल ने 29 कंपनियों को भेजा ई20 पेट्रोल पर अल्टीमेटम
  • मारुति का झूठ पकड़ा? ई20 पर मैनुअल और बयान अलग

Delhi News: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई20 (E20) इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खुला पत्र लिखने के बाद, केजरीवाल ने आज बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर एक बड़ा राजनीतिक और तकनीकी दांव चला है। उन्होंने भारत की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर ई20 ईंधन की सुरक्षा और वाहनों पर उसके प्रभाव को लेकर स्पष्टता मांगी है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

क्यों अलग है तीन कंपनियों के पत्र?

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इन 29 कंपनियों में से तीन को एक अलग और विस्तृत पत्र लिखा गया है। ये तीन कंपनियां हैं- मारुती सुजुकी, टोयोटा और हीरो। इन्हें अलग इसलिए चुना गया है क्योंकि 4 जुलाई को इन तीनों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि पुरानी गाड़ियों में ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है। उनके अनुसार, ई20 के इस्तेमाल से सिर्फ माइलेज में 4 से 5 प्रतिशत की गिरावट आती है, लेकिन इंजन या अन्य किसी भी पार्ट्स को कोई नुकसान नहीं होता।

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में इन तीनों कंपनियों की इस बात को घेरा है। उन्होंने कहा कि आपने 4 जुलाई को सार्वजनिक रूप से कहा कि ई20 सुरक्षित है, लेकिन जब हमने आपके वाहनों के मैनुअल (जो कंपनी और उपभोक्ता के बीच एक कानूनी रूप से बाध्यकारी एग्रीमेंट माना जाता है) को देखा, तो उसमें साफ लिखा था कि किसी भी पुरानी गाड़ी में 10 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।”

केजरीवाल ने इन कंपनियों से दो सीधे सवाल पूछे हैं:

  1. क्या पुरानी गाड़ियों में ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करना वास्तव में सुरक्षित है? अगर हां, तो आपका पब्लिक डोमेन में मौजूद मैनुअल इसके उलट क्यों कह रहा है?
  2. अगर ई20 इस्तेमाल करने से 5 से 10 प्रतिशत से ज्यादा किसी तरह का नुकसान होता है, तो क्या कंपनी उसकी भरपाई करेगी? क्या ग्राहकों को हर्जाना दिया जाएगा?

बाकी 26 ऑटोमेकर्स से क्या पूछा?

मारुती, टोयोटा और हीरो के अलावा बाकी 26 वाहन निर्माता कंपनियों को भी पत्र भेजे गए हैं। हालांकि, उनसे सवाल का दायरा सीमित रखा गया है। केजरीवाल ने उनसे पूछा है कि क्या उनकी कंपनियों द्वारा निर्मित वाहनों में ई20 ईंधन का उपयोग किया जा सकता है? कंपनियों से अपना स्टैंड साफ करने को कहा गया है। साथ ही, उनसे भी यह पूछा गया है कि अगर उनकी गाड़ियों में ई20 डालने से कोई तकनीकी खराबी आती है, तो क्या कंपनी उसकी जिम्मेदारी लेगी और मुआवजा देगी?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि यह मामला देश के करोड़ों वाहन चालकों से जुड़ा है और बेहद संवेदनशील है। इसलिए सभी 29 कंपनियों को एक सप्ताह (7 दिन) के अंदर इन सवालों का जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय ही ये पत्र सभी कंपनियों के आधिकारिक पतों पर भेज दिए गए हैं या भेजे जा रहे हैं।

केजरीवाल ने अपनी अगली रणनीति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अड़ी हुई है कि ई20 से किसी को नुकसान नहीं हो रहा, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इसलिए अब आ AAP सीधे जनता के बीच जाएगी और लोगों से उनका अनुभव जानेगी कि ई20 ईंधन डालने के बाद उन्हें किन-किन तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा पर जमकर निशाना

इस मुद्दे को उठाते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा और कहा कि जब जनता इस मुद्दे पर दुखी होकर कुछ कहती है, तो इन्हें (भाजपा को) उसे ‘एंटी-नेशनल’ करार देने का तरीका आ जाता है। आज इनके समर्थक बड़े-बड़े ब्लॉगर्स के जरिए लोगों को गालियां दे रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने सरकार के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ई20 को लेकर सरकार का लॉजिक न सिर्फ साइंस के आधारों से भिन्न है, बल्कि इंजीनियरिंग के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। उन्होंने सवालिया निशान उठाते हुए अंत में कहा, “ये फैसला निश्चित रूप से जनता के हित में नहीं है। अगर जनता के हित में नहीं है, तो फिर ये किसके हित में जा रहा है? ये बात समझना बेहद जरूरी है।”

Sandhya Samay News

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