दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के हालिया चुनाव परिणामों ने छात्र राजनीति में नए इतिहास रच दिए हैं। इस बार के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अपनी प्रभावशाली जीत के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि छात्र संगठन अब भी दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र समुदाय में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर अपने उम्मीदवारों को विजेता बनाया है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने आश्चर्यजनक जीत हासिल की है। इस जीत का मतलब यह भी है कि कांग्रेस समर्थित नेशनलिस्ट यूथ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (NSUI) को इन चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है।
ABVP की प्रभावशाली जीत
डूसू चुनावों में ABVP का प्रदर्शन इस बार विशेष रहा। अध्यक्ष पद पर यश डबास ने शानदार जीत हासिल की है। यश डबास को कुल 24,576 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले।
यश डबास ने विजय शंकर मीणा को लगभग 2,053 वोटों के फासले से हराते हुए अपनी बढ़त कायम की। इसके अलावा, सचिव पद पर रिया छावड़ी ने अपनी जीत दर्ज की। रिया को 21,650 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी, NSUI उम्मीदवार को 14,869 वोट प्राप्त हुए। इसी तरह, संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की।
उन्हें 16,615 वोट मिले, जबकि समाजवादी छात्र सभा (SSS) के उम्मीदवार को 15,778 वोट मिले। इन परिणामों से पता चलता है कि ABVP ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र समुदाय में अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है।
उपाध्यक्ष पद पर आश्चर्यजनक जीत
डूसू चुनावों में सबसे चौंकाने वाली खबर रही उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत। दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट प्राप्त कर इस पद पर कब्जा किया। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दीपांशु ने NSUI का टिकट नहीं मिलने के बावजूद खुद को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था।
उनकी यह जीत छात्र राजनीति में एक बड़ा उलटफेर मानी जा रही है। पिछले साल, ABVP ने प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पदों पर जीत हासिल की थी, लेकिन उपाध्यक्ष का पद NSUI ने जीता था। इस बार का परिणाम दर्शाता है कि छात्र समुदाय में निर्दलीय उम्मीदवारों की भी मजबूत भागीदारी हो रही है।
NSUI को झटका
डूसू चुनावों के परिणामों ने NSUI के लिए निराशाजनक स्थिति पैदा कर दी है। कांग्रेस समर्थित इस छात्र संगठन को सेंट्रल पैनल के किसी भी पद पर जीत नहीं मिली है। सचिव पद पर ABVP उम्मीदवार रिया छावड़ी ने 21,650 वोट प्राप्त किए, जबकि NSUI के उम्मीदवार को सिर्फ 14,869 वोट मिले।
संयुक्त सचिव पद पर भी ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की, जबकि NSUI की उम्मीदवारी को सफलता नहीं मिली। इस तरह, NSUI के पूरे उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है, जो कि कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन के लिए एक बड़ा झटका है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि छात्र राजनीति में ABVP की पकड़ पहले से अधिक मजबूत हो रही है और NSUI को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
निर्दलीय दीपांशु शौकीन का बयान
जीत के बाद, उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले दीपांशु शौकीन ने कहा कि उनके साथियों ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह छात्रों की समस्याओं को उठाने का काम करेंगे। दीपांशु ने यह भी बताया कि उनका चुनाव अभियान छात्र बंधुओं ने खुद चलाया और उन्हें समर्थन दिया।
अपने नंगे पैर चलने के फैसले का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि इससे उन्हें छात्रों की चुनौतियों की याद आई और वे इनसे जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह जीत छात्र राजनीति में नई शुरुआत का संकेत भी है, क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ रही है।
वोटिंग प्रतिशत और चुनाव का महत्त्व
डूसू चुनावों में इस बार कुल 40.46 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो कि पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। पिछली बार वोटिंग प्रतिशत 39.5 था। चुनाव में कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से ABVP, NSUI, SFI और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे प्रमुख छात्र संगठनों का प्रतिनिधित्व था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस बार दो चरणों में मतदान किया, जिसमें 52 पोलिंग केंद्रों पर वोट डाले गए। इस बढ़ते मतदान प्रतिशत से यह जाहिर होता है कि छात्र समुदाय अब भी राजनीति में अपनी भागीदारी को लेकर जागरूक है और अपनी आवाज को मजबूत करने के लिए मतदान कर रहा है।
























