अजमेर नगर निगम के आगामी चुनाव में राजनीतिक मुकाबला तीखा हो चुका है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की तैयारी है। इस बार का चुनाव खास इसलिए भी है क्योंकि निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
नगर निगम के 80 वार्डों में से 37 पर कांग्रेस, 32 पर भाजपा और 11 पर निर्दलीय पार्षद विजयी हुए हैं। इन निर्दलीयों की सहमति से ही नया बोर्ड बन सकेगा, जो आगामी मेयर के चयन में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इस बार का चुनाव खासतौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेयर का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, और दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
चुनाव की तारीख और प्रक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग ने 21 सितंबर को मतदान का ऐलान किया है। रिटर्निंग अधिकारी अनिल पूनिया ने बताया कि मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी। इसके साथ ही 22 सितंबर को उप महापौर पद के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस दिन नामांकन भरने का अंतिम समय सुबह 11 बजे है, जबकि नामांकन की पुष्टि सुबह 11.30 से दोपहर 2 बजे तक होगी। यदि आवश्यकता पड़ी, तो दोपहर 2.30 से शाम 5 बजे तक फिर से मतदान और उसके बाद मतगणना की जाएगी। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित किया गया है।
कांग्रेस और भाजपा का मुकाबला
अजमेर नगर निगम में सबसे बड़ा दल कांग्रेस है, जिसने 36 वर्षों से सत्ता का दंश झेला है। हालांकि, इस बार कांग्रेस बहुमत से दूर है, लेकिन फिर भी यह सबसे बड़ा दल है। भाजपा ने भी अपना मजबूत दखल दिया है, और दोनों दलों के बीच सीधी टक्कर हो रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए 4 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए, जबकि भाजपा को 9 निर्दलीयों का समर्थन लेना होगा।
भाजपा ने अपने पार्षदों को जयपुर शिफ्ट कर दिया है और कर्नाटक की सुरक्षा में बेंगलुरु ले जाकर अपने समर्थकों को मजबूत किया है। वहीं, कांग्रेस ने अपने पार्षदों को सुरक्षा के मद्देनजर बेंगलुरु भेजा है और दावा किया है कि उसके साथ चार निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा ने भी अपने छह निर्दलीय पार्षदों को वापस अपने साथ मिला लिया है, लेकिन अभी भी उसे तीन और निर्दलीयों का समर्थन चाहिए। इन निर्दलीयों की भूमिका इस बार के चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।
महिला मेयर का चुनाव: ओबीसी वर्ग का दांव
मेयर का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, और इस बार दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवार उतार रहे हैं। कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग की महिला उम्मीदवार किरण गढ़वाल को मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा ने अनामिका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है।
अनामिका शर्मा विधानसभा अध्यक्ष और अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी की पड़ोसी हैं। उनका परिवार भाजपा से जुड़ा है और क्षेत्र में सक्रिय है। दूसरी ओर, किरण गढ़वाल गृहिणी हैं और उनका नाम समाज में धार्मिक और सामाजिक कार्यकलापों के साथ जुड़ा है। दोनों उम्मीदवार अपने-अपने दलों के मजबूत प्रत्याशी हैं, और उनका समर्थन जीत की दिशा में निर्णायक हो सकता है।
राजनीतिक रणनीति और सामाजिक पहल
इस चुनाव में दोनों दलों ने अपनी-अपनी रणनीति के तहत निर्दलीयों को साधने का प्रयास किया है। भाजपा ने अपने समर्थक निर्दलीयों को पार्टी में शामिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस ने अपने समर्थक निर्दलीयों के साथ सद्भुद्धि यज्ञ का आयोजन किया है।
कांग्रेस कार्यालय में आयोजित इस यज्ञ का उद्देश्य भाजपा नेताओं को सद्बुद्धि देना है। यह धार्मिक आयोजन चुनावी माहौल को और भी रोचक बना रहा है। पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र का हनन कर रही है, और ऐसे में कांग्रेस विधिक प्रयासों के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान से भी अपनी संघर्षशीलता दिखा रही है।

























