महाराष्ट्र:वर्धा में जलसंकट से निपटने के लिए नई योजना शुरू

जिला प्रशासन ने जलभंडारण की वर्तमान स्थिति का आकलन कर, जलसंकट से निपटने के लिए 179 गांवों में 251 प्रभावी उपाय प्रस्तावित किए हैं। इन उपायों का उद्देश्य जल संरक्षण, जल संचयन और जल उपयोग की योजना को मजबूत बनाना है ताकि सूखे जैसी स्थिति में भी जिले की जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

जलसंकट की आशंका से निपटने के लिए जिलाधिकारी का बड़ा कदम

HIGHLIGHTS

  • वर्धा में जलसंकट रोकने के लिए सरकारी योजना का विस्तार
  • जल संरक्षण अभियान से वर्धा के किसानों को राहत मिलेगी
  • जलसंकट से बचाव के लिए वर्धा में तुरंत कार्रवाई शुरू
  • जल परियोजनाओं का समीक्षा कर वर्धा में जलसंकट का सामना

वर्धा जिले में जलसंकट की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने अभी से गंभीर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस वर्ष औसत बारिश और जल परियोजनाओं में जल भंडारण की मात्रा कम रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए, जिले के जल संसाधन एवं जल संरक्षण प्रयासों को तेज कर दिया गया है।

जिला प्रशासन ने जलभंडारण की वर्तमान स्थिति का आकलन कर, जलसंकट से निपटने के लिए 179 गांवों में 251 प्रभावी उपाय प्रस्तावित किए हैं। इन उपायों का उद्देश्य जल संरक्षण, जल संचयन और जल उपयोग की योजना को मजबूत बनाना है ताकि सूखे जैसी स्थिति में भी जिले की जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

जलसंकट का पूर्वानुमान और तैयारी

एल नीनो की पृष्ठभूमि में जिले में संभावित जलसंकट की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने जिले के जल संसाधनों का जायजा लेने के लिए जिले के जिलाधिकारी कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की।

इस बैठक में विधायक सुमित वानखेडे, जिलाधिकारी वान्मथी सी, जिला परिषद सीईओ पराग सोमण, उपजिलाधिकारी प्रताप वाघमारे, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ज्ञानदा फणसे सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जल भंडारण की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना और जलसंकट से निपटने के लिए आवश्यक रणनीतियों का निर्धारण करना था।

बैठक में तय किया गया कि वर्तमान में जिले का जल भंडारण लगभग 62 प्रतिशत है, जो कि बड़े और मध्यम परियोजनाओं के लिए संतोषजनक है। हालांकि, लघु परियोजनाओं में जल भंडारण अपेक्षाकृत कम है, इसलिए इन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाने जरूरी हैं।

प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए कि जल भंडारण की निगरानी का सिस्टम सुदृढ़ किया जाए और जल उपयोग की योजना को पहले से बेहतर बनाया जाए। यदि मौजूदा वर्ष में बारिश कम हुई तो फसलों और पेयजल के लिए वैकल्पिक उपायों को तुरंत लागू किया जाए।

प्रस्तावित उपाय और वैकल्पिक व्यवस्था

जल संरक्षण और जल संचयन के लिए प्रस्तावित उपायों में सूखी तालाबों का पुनः उपयोग, जल संरक्षण के लिए नए तालाबों का निर्माण, वर्षा जल संचयन प्रणाली का विकास, और जल के उचित उपयोग हेतु जागरूकता अभियान शामिल हैं।

विधायक सुमित वानखेडे ने विशेष रूप से छोटे तालाबों से जलापूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया, जो जनवरी-फरवरी में सूखने की आशंका से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि तालाबों से पेयजल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वैकल्पिक जल स्रोतों का तुरंत उपयोग शुरू किया जाना चाहिए और आवश्यकतानुसार टैंकर व अन्य संसाधनों की व्यवस्था भी करनी चाहिए।

जल परियोजनाओं का वर्तमान अध्ययन और सुधार

जिले में विभिन्न जल परियोजनाओं का वर्तमान आंकलन करते हुए, जिलाधिकारी वान्मथी सी ने बताया कि जिले के जल भंडारण का 62 प्रतिशत हिस्सा अभी उपलब्ध है। इसमें बड़े और मध्यम परियोजनाएं अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, जबकि लघु परियोजनाएं जल उपलब्धता के मामले में पिछड़ रही हैं।

इसके मद्देनजर, जिले में जलसंकट से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो जल संरक्षण, जल प्रबंधन और जल उपयोग को प्रभावी बनाने के लिए काम करेगा। यदि बारिश की स्थिति ऐसी ही बनी रहती है, तो फसल उत्पादन में कमी आने की संभावना भी जताई गई है।

कृषि और जल संरक्षण के बीच तालमेल

जलसंकट की स्थिति में कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है, इसलिए प्रशासन ने जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि जलापूर्ति में भी सुधारों पर जोर दिया है। यदि आवश्यक हो, तो तालाबों से कृषि जलापूर्ति बंद करनी पड़े, तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पहले से ही तैयार रखनी चाहिए। इससे न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र पर भी दबाव कम होगा।

कर्जमाफी योजना की समीक्षा

जलसंकट के साथ-साथ, जिले में किसानों को राहत देने के लिए चल रही कर्जमाफी योजना की भी समीक्षा की गई। इस योजना के तहत, बैंक स्तर पर कुल 74,365 कर्ज खातों को अपलोड किया गया है, जिनमें से 48,165 किसान पात्र पाए गए हैं। ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर चुके किसानों की संख्या बढ़ रही है। अब तक, 23,330 किसानों का विवरण योजना की सूचियों में शामिल किया गया है और उनके खातों में 230 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। पालकमंत्री ने निर्देश दिए कि बाकी किसानों का ई-केवाईसी जल्द से जल्द पूरा कर योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए।

संक्षेप में, वर्धा जिले में जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने अभी से ही प्रभावी रणनीतियों का निर्धारण किया है। जल संरक्षण, जल संचयन, वैकल्पिक उपायों और किसानों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यदि मानसून सामान्य रहता है, तो इन उपायों से जलसंकट की स्थिति से निपटना संभव होगा। लेकिन यदि बारिश कम हुई, तो इन तैयारियों का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। जिले के जल संसाधनों का सतत प्रबंधन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से वर्धा को सूखे से सुरक्षित रखने का प्रयास जारी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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