राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने आउटर नॉर्थ दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में एक 16 साल की किशोरी के साथ हुए कथित गैंगरेप और उसके बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मामले की निर्धारित समय-सीमा में जांच, दोषियों पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई और फोरेंसिक सबूतों की विशेष देखरेख के साथ सुरक्षा की मांग की है।
महिला आयोग ने एक हफ्ते के भीतर अपनाई गई कार्रवाई की डिटेल्ड रिपोर्ट भेजने को कहा है। पूरे मामले ने राजधानी को हिला दिया है और अब आयोग के दखल के बाद जांच की रफ्तार पर खास नजर रहेगी।
खेत से मिला था शव, हालत देखकर स्तब्ध रह गए जांचकर्ता
बताया जा रहा है कि यह वारदात 10 और 11 सितंबर की बीती रात की है। दो दिन बाद, यानी 13 सितंबर की सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि स्वरूप नगर के एक खेत में एक शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम के सामने जो मंजर था, उसे देखकर अनुभवी जांचकर्ता भी दंग रह गए।
कीचड़ में लथपथ शव पर नीले रंग की जींस थी, जिसके ऊपर बैंगनी रंग के कपड़े के टुकड़े लगे थे। शव काफी हद तक सड़ चुका था, चेहरा पहचानने लायक नहीं बचा था, शरीर की हड्डियां दिखाई दे रही थीं और एक हाथ मौके से गायब था। जांच अधिकारियों के मुताबिक शव को ऐसी जगह फेंका गया था, जहां जानवरों ने उसे नोच डाला था।
शरीर पर चाकू के छह घाव मिले, जिसके चलते शुरुआती जांच में शक जताया गया कि पीड़िता के साथ जानलेवा छेड़छाड़ भी हुई है। बाद में आई मेडिकल रिपोर्ट ने इस अपराध को दुष्कर्म साबित कर दिया।
मुर्दाघर में टैटू ने खोला राज, केस का पहला टर्निंग पॉइंट
जांच की शुरुआत में एक बड़ी उलझन यह थी कि हालत देखकर जांचकर्ताओं का मानना बन गया था कि शव किसी पुरुष का है। दरअसल, इस मामले में कहीं से भी लापता लड़की की शिकायत दर्ज नहीं थी, जिसकी वजह से यह पता लगाना बेहद मुश्किल था कि शव किसका है और वह कहां से आया। लेकिन जब एक अधिकारी ने मुर्दाघर में जाकर शव का करीब से मुआयना करने का फैसला किया, तो सच सामने आया।
एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर की नजर बाएं हाथ पर बने टैटू पर पड़ी, जिसमें एक ही लाइन में तीन स्टार बने थे। यही घटनाक्रम केस का पहला अहम मोड़ साबित हुआ, क्योंकि इससे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि शव किसी लड़की का भी हो सकता है।
इसके बाद पुलिस टीम त्रिनगर इलाके पहुंची, जहां लापता लड़की के परिजनों से बात हुई। उसके जीजा ने जांच टीम को लड़की की कुछ तस्वीरें दिखाईं और उन्हीं फोटोज में टैटू की भी पुष्टि हो गई। इस तरह शव की पहचान 16 साल की किशोरी के रूप में हुई।
CCTV फुटेज से खुली जांच की दिशा, टेम्पो ड्राइवर ने दिए अहम सुराग
पहचान के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी आरोपियों तक पहुंच बनाने की। कई दिनों की लंबी जांच-पड़ताल के बाद ही पुलिस परिजनों तक पहुंच पाई थी। इस बीच पुलिस ने वारदात स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को दो दिनों तक खंगाला और हर क्लिप का गहराई से विश्लेषण किया।
कड़ी मेहनत के बाद एक ऐसा फुटेज हाथ लगा, जिसमें एक वाहन को उस जगह पहुंचते हुए देखा गया, जहां से शव बरामद हुआ था। क्लिप में दिख रही चीजों और टेम्पो के बाईं ओर बने डिजाइन ने पुलिस को साफ संकेत दिए कि इस अपराध की साजिश में चार लोग शामिल हैं। इसके बाद पुलिस टेम्पो ड्राइवर तक पहुंची, जिसने बताया कि 10-11 सितंबर की रात चार लड़के उसका वाहन लेकर गए थे।
एक बालिग गिरफ्तार, तीन नाबालिग हिरासत में
पूछताछ में सामने आया कि चारों आरोपी नाबालिग लड़की को खेत में ले गए, नशे की हालत में उसके साथ गैंगरेप किया, फिर उसकी हत्या कर दी और शव को वहीं फेंक दिया। आरोपियों में तीन किशोर हैं, जबकि एक बालिग की पहचान स्वरूप नगर निवासी 21 साल के सुदामा के रूप में हुई है। पुलिस ने बालिग आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और तीनों नाबालिगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में ले लिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि आगे की कार्रवाई कानून के तहत की जा रही है।
फोरेंसिक सबूतों की सुरक्षा पर आयोग का जोर
इस तरह के संवेदनशील मामलों में अदालत में दोषियों को सबसे सख्त सजा दिलाने में फोरेंसिक सबूत ही सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। शायद इसीलिए NCW ने पुलिस से साफ कहा है कि मामले के सभी साक्ष्यों की लापरवाही रहित सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जांच की गुणवत्ता से किसी सूरत में समझौता न होने दिया जाए।
अब देखना यह होगा कि पुलिस सात दिनों के भीतर आयोग को क्या जवाब देती है और कितनी जल्दी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होती है। एक किशोरी की जिंदगी छीनने वाली इस वारदात ने राजधानी में महिला सुरक्षा के सवाल एक बार फिर तेज कर दिए हैं और तेज न्याय की मांग किसी भी समझौते से ऊपर है।


























