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सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर साधा निशाना

Delhi News: धरने को संबोधित करते हुए सौरभ भारद्वाज ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) और दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष इस घोटाले की असलियत को जनता के सामने आने से बचाने में जुटा हुआ है।

650 करोड़ घोटाले में आरोपी फरार, आप पार्टी ने किया हंगामा

HIGHLIGHTS

  • रेखा गुप्ता से सवाल- 650 करोड़ घोटाले में किसने बचाया?
  • ACB की चुप्पी से भागा 650 करोड़ का मुख्य आरोपी
  • 650 करोड़ दवा घोटाले का गहरा कनेक्शन
  • LNJP पर आप पार्टी का धरना, घोटाले का सच
  • अब अस्पतालों में उतरेगी आप पार्टी, घोटाले का सच

Delhi News: दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कथित तौर पर सामने आए 650 करोड़ रुपये के जबरदस्त दवा खरीद घोटाले को लेकर आप पार्टी ने सोमवार को मोर्चा खोल दिया। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक बड़ा जत्था लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल के मुख्य द्वार पर उतरा और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। इस धरने का मुख्य उद्देश्य रेखा गुप्ता सरकार पर दबाव बनाकर इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग को लेकर था।

क्या आरोपी को बचाया जा रहा था?

धरने को संबोधित करते हुए सौरभ भारद्वाज ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) और दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष इस घोटाले की असलियत को जनता के सामने आने से बचाने में जुटा हुआ है। भारद्वाज ने बताया कि इस पूरे प्रकरण का मुख्य सूत्रधार और आरोपी राजीव रंगीला था, जिसे ACB को तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए था।

लेकिन, उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने जान-बूझकर लगभग एक महीने तक राजीव रंजीला की गिरफ्तारी को टाला। आप पार्टी नेता ने बताया कि उनकी पार्टी ने लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस गिरफ्तारी की मांग उठाई, लेकिन सरकार के इशारों पर ACB ने आंखें मूंद रखीं। इस देरी का नतीजा यह हुआ कि मुख्य आरोपी देश से फरार होकर जर्मनी चला गया। भारद्वाज ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर इस बड़ी लापरवाही के पीछे किसका हाथ था? क्या आरोपी को फरार कराने की साजिश सरकार के संरक्षण में हुई?

नियमों की अनदेखी और पक्षपात

सौरabh भारद्वाज ने अपने संबोधन में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल की नियुक्ति को लेकर भारी अनियमितताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्हें इस अत्यधिक संवेदनशील पद पर बैठाया गया, वह किसी भी लिहाज से पारदर्शी नहीं था। सरकार ने अपने मनमाने फैसलों से उन अधिकारियों को नजरअंदाज किया जिनका वरिष्ठता क्रम और अनुभव डॉ. अग्रवाल से कहीं ज्यादा था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि डॉ. अग्रवाल के खिलाफ विजिलेंस विभाग में एक गंभीर जांच लंबित चल रही थी। ऐसे में, किसी भी प्रशासनिक नियम के तहत उन्हें इस तरह की जिम्मेदारी सौंपना मानों भ्रष्टाचार को ही प्रोत्साहन देने जैसा था। भारद्वाज ने साफ कहा कि यह नियुक्ति किसी निचले स्तर की भूल नहीं थी, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकार के स्तर पर लिए गए रणनीतिक फैसले का नतीजा था।

खरीद प्रक्रिया में बदलाव, घोटाले की जड़ें

आप पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में किए गए उस बदलाव को घोटाले की असली जड़ बताया। उन्होंने समझाया कि पहले जब दिल्ली सरकार चलाते थे, तब हर सरकारी अस्पताल को अपनी मरीजों की जरूरतों के अनुसार स्वतंत्र रूप से बजट और खरीदारी करने का अधिकार होता था। यह व्यवस्था पारदर्शी और जरूरत-आधारित थी।

लेकिन, मौजूदा सरकार ने आने के बाद इस पूरे खेल को पलट दिया। सभी अस्पतालों की खरीदारी को रोककर उसे सेंट्रल प्रोक्यूरमेंट एजेंसी (CPA) के हवाले कर दिया गया। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इस केंद्रीकृत व्यवस्था की पूरी कमान डॉ. वत्सला अग्रवाल के हाथ में सौंप दी गई। उन्होंने तर्क दिया कि जब खरीद नीतियां खुद सरकार ने बदलीं और अपने पसंदीदा अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी, तो अब घोटाले का पूरा ठीकरा महज कुछ अधिकारियों के माथे क्यों मढ़ा जा रहा है? सरकार की भूमिका इसमें कैसे अछूती मानी जा सकती है?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सीधा सवाल

इस दौरान सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी सीधे आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि स्वास्थ्य विभाग में सैकड़ों करोड़ का घोटाला हुआ है, तो सीएम को यह बताना होगा कि डॉ. वत्सला अग्रवाल के प्रति इतनी ‘मेहरबानी’ क्यों बरती गई? उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को जनता के सामने आकर यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों और किसके दबाव में एक संदिग्ध छवि के अधिकारी को इतना अधिकार प्रदान किया गया।

अब अस्पतालों के बाहर दिखेगा आप पार्टी का जनांदोलन

धरना समाप्त करते हुए भारद्वाज ने आगामी रणनीति का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि आप पार्टी इस लड़ाई को सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस या एक धरने तक सीमित नहीं रखने वाली। पार्टी अब इसे एक बड़े जन आंदोलन का रूप देगी। आने वाले दिनों में दिल्ली भर के सरकारी अस्पतालों के बाहर ‘जनजागरण अभियान’ चलाया जाएगा।

इन शांतिपूर्ण और सांकेतिक प्रदर्शनों के माध्यम से आप पार्टी कार्यकर्ता आम मरीजों और उनके परिजनों को इस बात की जानकारी देंगे कि किस तरह से सरकार के गलत फैसलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को घोटालों का अड्डा बना दिया।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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