Delhi News: दिल्ली में महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर सोशल मीडिया पर एक भ्रामक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इस अफवाह में दावा किया जा रहा है कि पिंक कार्ड से एक बार बस में सफर करने के बाद, दूसरी बस में सवार होने के लिए कम से कम एक घंटे का इंतजार अनिवार्य है। हालांकि, जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से झूठा और भ्रामक साबित हुआ है।
सोशल मीडिया पर फैले इस भ्रम की सच्चाई जानने के लिए दिल्ली के अलग-अलग बस स्टैंडों पर पहुंचकर महिला यात्रियों और डीटीसी (DTC) कंडक्टरों से विस्तार से बातचीत की गई। पड़ताल में साफ जाहिर हुआ कि एक घंटे की गैप जैसी कोई बाध्यता या नियम कहीं से भी लागू नहीं है।
यात्रियों ने साझा किया अनुभव
उत्तम नगर इलाके गीता ने बताया कि जिनका पिंक कार्ड करीब 15 दिन पहले बना है, ने बताया कि मैं रोज़ाना उत्तम नगर आफिस आती-जाती हूं। एक बस से उतरकर दूसरी बस पकड़ने में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। कार्ड हर बार काम करता है और टिकट आसानी से मिल जाता है। शायद कुछ लोगों को तकनीकी समस्या हो, लेकिन मुझे अब तक एक बार भी परेशानी नहीं हुई।”
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इसी तरह चांदनी चौक इलाके की शीला ने बताया कि उन्होंने हाल ही में आईटीओ तक पिंक कार्ड से सफर किया। उन्होंने बताया कि पिंक कार्ड में चिप लगी होती है और यह एक स्मार्ट कार्ड की तरह काम करता है, जिसमें नाम और वैधता जैसी सारी जानकारी होती है। बस में मशीन पर टैप करते ही टिकट निकल जाता है। एक घंटे के इंतजार जैसा कोई नियम मैंने कभी नहीं देखा। लगातार बस बदलकर सफर में कोई दिक्कत नहीं आती।”
कंडक्टरों ने किया साफ इंकार
महिला यात्रियों के अनुभवों से अलग, बसों में तैनात डीटीसी कंडक्टरों ने भी इस अफवाह को बेबुनियाद करार दिया। कंडक्टर ने साफ तौर पर कहा कि पिंक कार्ड से टिकट पूरी तरह से जनरेट होता है। एक घंटे के गैप जैसी कोई पाबंदी नहीं है। महिला यात्री जितनी बार चाहें, बस बदलकर सफर कर सकती हैं।”
एक अन्य डीटीसी कंडक्टर ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसा कोई नियम ही नहीं है कि एक बार सफर करने के बाद महिला को एक घंटे का इंतजार करना होगा। महिलाएं लगातार बस बदलकर यात्रा कर सकती हैं, इसमें कोई रोक नहीं है।”
दिल्ली सरकार और DTC का आधिकारिक स्टैंड
इस पूरे मामले पर दिल्ली सरकार और डीटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट स्टैंड है कि ‘1 घंटे गैप’ की बात पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी आधिकारिक नियमावली या दिशानिर्देश में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।



















