दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने एक बड़े इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का खुलासा किया है, जिसने नेपाल से दिल्ली-एनसीआर तक हाई क्वालिटी चरस की अवैध सप्लाई की जाल बिछाई थी। इस कार्रवाई में पुलिस ने चार नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया है और इनके कब्जे से 106 किलो 250 ग्राम चरस बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 109 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह नेटवर्क नेपाल के सोनौली बॉर्डर से चरस की खेप लाकर दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर स्टोर करता था और फिर उससे आगे की सप्लाई करता था। इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश पुलिस की सतर्कता, तकनीकी निगरानी और इनपुट के आधार पर किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई दक्षिण दिल्ली के कोटला मुबारकपुर इलाके में एक मकान पर छापा मारकर शुरू हुई। इस दौरान तीन नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से 8.598 किलो चरस बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भारत थापा, गोविंद बुधा और ज्योति पुन मगर के रूप में हुई है। इनके खिलाफ कोटला मुबारकपुर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इन आरोपियों का संबंध इस बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जो नेपाल से दिल्ली-एनसीआर में चरस की आपूर्ति करता था।
बाद में, पुलिस ने जांच के दौरान दिल्ली के वजीराबाद इलाके में एक और छापेमारी की। यहां से 97.652 किलो हाई क्वालिटी चरस बरामद की गई, जो 13 प्लास्टिक बैग में भरी हुई थी। इस स्थान पर मिक्सिंग मशीन और पैकिंग का सामान भी पाए गए। इन दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर, कुल 106 किलो 250 ग्राम चरस जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 109 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह चरस विभिन्न इलाकों में स्टोर कर आगे सप्लाई के लिए तैयार किया गया था।
ड्रग नेटवर्क का खुलासा और उसकी कार्यप्रणाली
डीसीपी साउथ अनंत मित्तल ने बताया कि इस कार्रवाई से पता चला है कि यह ड्रग नेटवर्क नेपाल के सोनौली बॉर्डर के आसपास से चरस की खेप दिल्ली लाता था। इसके बाद, दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में इसे स्टोर किया जाता था और फिर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। इस नेटवर्क के सदस्यों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया, जहां वे ड्रग्स का ऑनलाइन ऑर्डर लेते थे और डिजिटल बैंकिंग चैनल या कैश के जरिए भुगतान प्राप्त करते थे। डिलीवरी के लिए ऑटो रिक्शा और बाइक टैक्सी का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
पुलिस ने जांच में वजीराबाद और मजनू का टीला जैसे इलाकों का भी नाम लिया है। इन इलाकों में पब, बार और होटल के आसपास मौजूद ग्राहकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को ड्रग्स पहुंचाई जाती थी। इसके अलावा, बिनमाया और हरि नाम के दो नेपाली नागरिकों की भूमिका भी सामने आई है, जो इस नेटवर्क में शामिल थे। अब पुलिस इन दोनों के साथ-साथ नेपाल में मौजूद सप्लायर्स, दिल्ली-एनसीआर के लोकल डिस्ट्रीब्यूटर्स और पूरे फाइनेंशियल ट्रेल की भी जांच कर रही है।
जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस की टीम इस मामले में लगातार जांच जारी रखी है। इनपुट, तकनीकी निगरानी और ग्राउंड वेरिफिकेशन के आधार पर यह कार्रवाई संभव हो पाई है। पुलिस का उद्देश्य इस अवैध नेटवर्क का पूरी तरह से भंडाफोड़ करना है, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोका जा सके। साथ ही, पुलिस इन आरोपियों के साथ-साथ नेपाल में मौजूद सप्लायर्स और अन्य नेटवर्क सदस्यों का भी पता लगाने में लगी है, ताकि पूरी सप्लाई चेन का खात्मा किया जा सके।
यह मामला न केवल दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स का तस्करी नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ है। इस तरह की कार्रवाइयों से नशे के खतरे को कम करने और समाज को सुरक्षित बनाने में मदद मिलती है। पुलिस का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से नशे के कारोबार को खत्म करने में मदद मिलेगी और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
























