कानपुर में महिला कांस्टेबल प्रतीक्षा सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने उनके पूर्व कोचिंग टीचर विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया है। प्रतीक्षा के परिवार ने आरोप लगाया था कि विक्रम उन्हें लगातार दबाव में रखता था और उनके दूसरे लोगों से बातचीत करने पर आपत्ति जताता था।
पुलिस के मुताबिक, शिकायत के बाद दर्ज मामले की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की गई। इसके बाद आरोपी को गोरा मोड़ के पास एक पुलिया से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने विक्रम सिंह के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर उसे जेल भेज दिया है। मामले में लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
फिजिकल अकादमी में हुई थी पहचान
पुलिस और परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, सचेंडी निवासी विक्रम सिंह गजनेर थाना क्षेत्र में फिजिकल अकादमी चलाता था। यहां वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को शारीरिक प्रशिक्षण देता था। रेऊना थाना क्षेत्र के गिरसी गांव की रहने वाली प्रतीक्षा सिंह और उनकी बहन दीपा सिंह ने भी इसी अकादमी में दाखिला लिया था।
प्रतीक्षा वर्ष 2022 से वहां तैयारी कर रही थीं। वर्ष 2025 में उनका उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल पद पर चयन हुआ। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली तैनाती अमेठी जिले के मोहनगंज थाने में हुई थी। परिवार का आरोप है कि कोचिंग के दौरान विक्रम और प्रतीक्षा के बीच नजदीकियां बढ़ीं और विक्रम का उनके घर आना-जाना भी शुरू हो गया था।
पुलिस ने जांच के दौरान दोनों के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड की पड़ताल की। अधिकारियों के अनुसार, पिछले चार महीनों में उनके बीच कई हजार फोन कॉल दर्ज हुईं। घटना वाले दिन भी विक्रम ने प्रतीक्षा से कई बार बात की थी, ऐसा पुलिस जांच में सामने आया है।
छुट्टी लेकर गांव पहुंची थीं प्रतीक्षा
प्रतीक्षा अमेठी के मोहनगंज थाने से एक दिन की छुट्टी लेकर अपने गांव गिरसी पहुंची थीं। परिवार के मुताबिक, उन्होंने रास्ते से अपनी बहन को फोन कर बताया था कि वह काफी तनाव में हैं। घर पहुंचने पर उन्होंने अपनी मां से बातचीत की और फिर आराम करने की बात कहकर कमरे में चली गईं। बाद में कमरे में उनका शव मिला। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
प्रतीक्षा के पिता विजय सिंह ने विक्रम सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। परिवार ने आरोप लगाया कि विक्रम खुद को भाई जैसा बताकर घर आता था, लेकिन बाद में प्रतीक्षा पर अनुचित दबाव बनाने लगा था।
परिवार ने लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप
परिवार का कहना है कि प्रतीक्षा जब किसी साथी पुलिसकर्मी या पुरुष मित्र से बात करती थीं, तो विक्रम उनसे नाराज होता था। आरोप है कि वह उनकी बातचीत और निजी संबंधों को लेकर सवाल करता तथा उन्हें दूसरे लोगों से संपर्क रखने से रोकने की कोशिश करता था। परिवार ने यह भी कहा कि विक्रम शादीशुदा था और प्रतीक्षा के विवाह की चर्चा होने पर वह उन पर और दबाव डालता था।
परिजनों के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण प्रतीक्षा मानसिक तनाव में रहने लगी थीं। परिवार ने विक्रम पर ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है।
मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
सहायक पुलिस आयुक्त कृष्णकांत यादव ने बताया कि विजय सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच की गई। सीडीआर और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पुलिस को आरोपी की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली। इसके आधार पर विक्रम सिंह को गोरा मोड़ के पास पुलिया से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, रेऊना थाना प्रभारी अनुज कुमार की टीम ने गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाई। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर जेल भेज दिया गया है। मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
मामले में आगे क्या होगा?
कानपुर महिला कांस्टेबल आत्महत्या मामले में अब जांच का केंद्र परिवार की शिकायत, फोन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि होगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को समर्थन देने वाली सामग्री क्या है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
यह घटना कार्यस्थल और निजी संबंधों में दबाव, नियंत्रण और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों को गंभीरता से लेने की जरूरत की ओर भी ध्यान खींचती है। यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक संकट में हो, तो परिवार, भरोसेमंद मित्रों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मदद लेना महत्वपूर्ण है।

























