शेयर बाजार में कम समय में अमीर बनने की चाहत कई लोगों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। गुजरात के सूरत में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर एक व्यक्ति से 27 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। बता दें कि इस साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए सूरत सिटी पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने अहमदाबाद के जमालपुर इलाके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले की जांच के दौरान तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली, जिसने देशभर में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क की ओर इशारा किया। जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया गया एक बैंक खाता राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 14 अलग-अलग शिकायतों से जुड़ा हुआ था। बता दें कि इन शिकायतों के जरिए कुल 8 करोड़ 93 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करने की बात सामने आई है।
व्हाट्सऐप पर शुरू हुई ठगी की पूरी कहानी
पुलिस की जांच में सामने आया कि शातिर ठगों ने पीड़ित से पहली मुलाकात व्हाट्सऐप पर की। सबसे पहले शिकायतकर्ता को एक फर्जी शेयर ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया। यह वेबसाइट बिल्कुल असली कंपनी जैसी दिखाई देती थी। ठगों ने पीड़ित के नाम से उस प्लेटफॉर्म पर डेमो अकाउंट भी बनवा दिया, जहां शुरुआती दिनों में फर्जी प्रॉफिट दिखाकर उसका भरोसा जीता गया।
जब पीड़ित का विश्वास हासिल हो गया, तो उससे कहा गया कि ज्यादा रिटर्न पाने के लिए बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी जाए। भोलेभाले निवेशक ने अपनी जेब से कुल 27 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जिस वक्त उसने अपनी कमाई निकालने की कोशिश की, तो अकाउंट फ्रीज होने और अतिरिक्त शुल्क मांगने के बहाने बनाने लगे। इसके बाद समझ आया कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।
8 हजार के कमीशन पर बिका बैंक खाता
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय समीरखान पठान और 31 वर्षीय मोहम्मद शेख के रूप में हुई है। दोनों जमालपुर के रहने वाले हैं और दिहाड़ी मजदूरी करके अपना गुजारा चलाते हैं। पठान 10वीं तक पढ़ा है, वहीं शेख बीकॉम ग्रेजुएट है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, पठान ने महज 8,000 रुपये कमीशन लेकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खोला गया अपना सेविंग अकाउंट शेख को सौंप दिया। आगे चलकर शेख ने यही खाता मामले में फरार चल रहे एक आरोपी को 15,000 रुपये के कमीशन पर उपलब्ध करवा दिया। इस तरह ‘मनी मुल’ यानी बैंक खातों की सप्लाई करने वालों की पूरी चेन साइबर गिरोह के लिए काम कर रही थी।
37 दिन में 30 लाख से अधिक का लेन-देन
यह बैंक खाता ठगी के लिए भारी पैमाने पर इस्तेमाल होता रहा। 3 मई 2025 से 7 जून 2025 के बीच सिर्फ 37 दिनों में इस अकाउंट से 30 लाख 9 हजार 57 रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ। जब पुलिस ने इस खाते की डिटेल को NCRP पोर्टल पर वेरिफाई किया, तो अलग-अलग राज्यों में दर्ज 14 शिकायतें सामने आईं। इन शिकायतों में कुल 8 करोड़ 93 लाख 80 हजार 922 रुपये की ऑनलाइन ठगी दर्ज है, यानी यह गिरोह पूरे देश में अपना जाल फैलाए हुए था।
BNS और IT एक्ट में दर्ज हुआ केस
इस साइबर फ्रॉड केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और इस गिरोह के अन्य संपर्कों की जांच कर रही है।
साइबर ठगी से बचने के लिए रखें ध्यान इन बातों का
बता दें कि सूरत पुलिस ने नागरिकों के लिए कुछ जरूरी सुझाव जारी किए हैं जिसमें अनजान नंबर से आए व्हाट्सऐप मैसेज पर शेयर टिप्स, IPO या निवेश की ऑफर आएं तो तुरंत ब्लॉक कर दें। कोई भी “गारंटीड रिटर्न” या “डबल पैसा” जैसा वादा करे, तो वह ठगी का संकेत है।
किसी भी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट में पैसा भेजने से पहले SEBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर कंपनी की रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें। कभी भी अपना बैंक खाता किसी और को कमीशन पर इस्तेमाल करने न दें, वरना आप भी आपराधिक केस में फंस सकते हैं।
ठगी हो जाए तो तुरंत करें यह काम
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऑनलाइन साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो घबराएं नहीं और बिना देर किए कार्रवाई करें। तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें, ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से धोखाधड़ी की गई रकम को फ्रीज करवाने और वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए सतर्क रहें और समय रहते सही कदम उठाएं।


























