अमेरिकी प्रशासन द्वारा TCS, Infosys, Wipro और HCLTech समेत आठ प्रमुख IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया से निलंबित किए जाने की खबर के बावजूद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में IT शेयरों में तेजी देखने को मिली। बाजार खुलते ही प्रमुख IT कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का रुझान नजर आया। शुरुआती कारोबार के दौरान TCS, Infosys, HCLTech और Wipro के शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
बाजार की शुरुआत भी मजबूती के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 180 अंक ऊपर चढ़ा, जबकि निफ्टी में लगभग 80 अंकों की बढ़त रही। मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत खुला। रुपया 4 पैसे की बढ़त के साथ 96.74 प्रति डॉलर पर पहुंचा। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को कारोबार बंद होने के समय डॉलर के मुकाबले रुपया 96.78 पर था।
TCS, Infosys और HCLTech के शेयरों में बढ़त
शुरुआती कारोबार के दौरान Infosys के शेयर करीब 2.62% चढ़े। TCS में 3.39% की तेजी दर्ज की गई, जबकि HCLTech के शेयर लगभग 2.53% और Wipro के शेयर 2.47% ऊपर कारोबार करते दिखे। इस तेजी से संकेत मिला कि अमेरिकी फैसले की खबर के बावजूद निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में IT कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली नहीं की।
हालांकि, शुरुआती भाव बाजार की पूरे दिन की दिशा तय नहीं करते। शेयरों में तेजी के पीछे व्यापक बाजार का मजबूत खुलना, निवेशकों की खरीदारी और खबर पर बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल शुरुआती कारोबार के आधार पर यह मानना ठीक नहीं होगा कि अमेरिकी कार्रवाई का कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है PERM कार्यक्रम?
PERM का पूरा नाम Permanent Labor Certification Program है। यह अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है। आम तौर पर इस प्रक्रिया में नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से स्थानीय कर्मचारियों की वेतन और कामकाजी परिस्थितियां प्रभावित नहीं होंगी।

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने आठ बड़ी IT कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किया है। इस समूह में भारतीय IT कंपनियां TCS, Infosys, Wipro और HCLTech भी शामिल बताई गई हैं। PERM प्रक्रिया में रुकावट आने से उन विदेशी कर्मचारियों के मामलों पर असर पड़ सकता है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे हैं।
कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या हो सकता है असर?
अगर निलंबन से जुड़ी कार्रवाई लंबे समय तक जारी रहती है, तो प्रभावित कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड आवेदन में देरी हो सकती है। इससे कंपनियों की कर्मचारी प्रबंधन और भर्ती योजनाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं। खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए स्थिति अनिश्चित हो सकती है जिनकी अमेरिका में नौकरी और स्थायी निवास की योजना PERM प्रक्रिया पर निर्भर है।
फिर भी, इस खबर से सीधे तौर पर कंपनियों के राजस्व, ग्राहक अनुबंध या मौजूदा परियोजनाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वास्तविक प्रभाव निलंबन की अवधि, अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम और संबंधित कंपनियों को उपलब्ध कानूनी या प्रशासनिक विकल्पों पर निर्भर करेगा। इस वजह से निवेशकों के लिए कंपनी के आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।
विदेशी बाजारों में मिला-जुला रुख
अमेरिकी कार्रवाई की खबर के बीच विदेशी बाजारों में IT कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। Nasdaq पर Microsoft के शेयरों में 1.35% तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि Cognizant के शेयर 5.15% चढ़े। Adobe के शेयरों में भी 3.56% की तेजी रही। वहीं, पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में Capgemini के शेयर मामूली रूप से, करीब 0.045%, ऊपर कारोबार करते दिखे।
यह मिला-जुला प्रदर्शन बताता है कि बाजार केवल PERM से जुड़ी खबर पर ही प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। अलग-अलग कंपनियों के कारोबार, निवेशकों की अपेक्षाओं और बाजार की व्यापक परिस्थितियों का असर भी शेयरों पर पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी?
शुक्रवार की शुरुआती तेजी से यह जरूर दिखा कि खबर के बाद भारतीय IT शेयरों में तत्काल बड़ी बिकवाली नहीं हुई। लेकिन इस तेजी को अमेरिकी कार्रवाई के संभावित असर का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में निवेशक कंपनियों के आधिकारिक बयान, PERM निलंबन से जुड़े नियमों की स्पष्टता और अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर ध्यान देंगे।
इसके अलावा, यह देखना भी अहम होगा कि प्रभावित कर्मचारियों के आवेदन और कंपनियों की अमेरिका-केंद्रित भर्ती योजनाओं पर व्यावहारिक रूप से कितना असर पड़ता है। फिलहाल बाजार की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही, लेकिन आगे IT शेयरों की दिशा नई जानकारी और कारोबारी असर के आकलन से तय हो सकती है।


























