बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। फिल्म इंडस्ट्री, राजनीति से लेकर आम दर्शकों तक—हर तरफ शोक की लहर है।
गुरुवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर पुणे एयरपोर्ट पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिग्गज कलाकार को अंतिम विदाई दी और उनका कॉफिन खुद अपने हाथों से उठाया। इस भावुक पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
CM फडणवीस ने खुद कंधा देकर दी अंतिम विदाई
पुणे एयरपोर्ट पर बने वीडियो में साफ दिखता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उनके कॉफिन को अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने कंधों पर उठा लिया और उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाने में मदद की। इस दौरान पूरा माहौल शोक में डूबा हुआ था और मौके पर मौजूद लोग भावुक नजर आए।
इस मुश्किल घड़ी में CM की संवेदनशीलता और सादगी की हर तरफ चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर यूजर्स फडणवीस के इस मानवीय व्यवहार की खूब सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे एक महान कलाकार को दी गई सच्ची और सम्मानजनक श्रद्धांजलि बताया है। एक यूजर ने लिखा—”यही होता है असली सम्मान।”
गोवा के घर पर बेहोश मिले, अस्पताल में लौटी मौत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर अचानक बेहोश हो गए थे। खबर पाते ही परिवार के सदस्यों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश के बाद भी उन्हें नहीं बचा पाए और करीब 45 मिनट के इलाज के बाद गुरुवार सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। यानी 8 अक्तूबर 2026 की सुबह नाना पाटेकर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
उनके निधन की खबर फैलते ही हिंदी-मराठी सिनेमा के दर्शकों के अलावा बड़ी राजनीतिक हस्तियों ने भी शोक जताया। उनके पार्थिव शरीर को पुणे लाया गया, जहां परिवार की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
1 जनवरी 1951 को जन्म, 1978 में ‘गमन’ से की एंट्री
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले वे थिएटर से जुड़े रहे और पुणे के प्रतिष्ठित फिल्म इंस्टीट्यूट (FTII) से एक्टिंग की तालीम हासिल की। साल 1978 में फिल्म गमन से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा।
1990 का दशक उनके करियर का सबसे धारदार दौर माना जाता है। परिंदा, तिरंगा, अंगार, क्रांतिवीर, अग्नि साक्षी और गुलाम-ए-मुस्तफा जैसी फिल्मों में उनकी जबरदस्त भूमिकाओं ने दर्शकों के दिल पर गहरी छाप छोड़ी। साल 1991 में उन्होंने फिल्म प्रहार से डायरेक्टर की कुर्सी भी संभाली, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई।
नाना पाटेकर ने अपहरण, अब तक छप्पान, राजनीति और वेलकम जैसी फिल्मों में भी अपनी मजबूत प्रस्तुति दी। मराठी सिनेमा की सुपरहिट फिल्म नटसम्राट में उनका अभिनय आज भी दर्शकों को याद आता है।
किसानों की मदद के लिए बनाया था ‘नाम फाउंडेशन’
फिल्मों से बाहर नाना पाटेकर को किसानों का पक्का हिमायती माना जाता था। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर महाराष्ट्र में किसानों की मदद के लिए नाम फाउंडेशन की शुरुआत की थी। सूखे और कर्ज के बोझ से टूटे किसान परिवारों के लिए वे लगातार काम करते रहे। यही वजह है कि उनके निधन पर गांव-देहात के लोग भी गहरा शोक जता रहे हैं।
सिनेमा जगत में शोक की लहर
नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद फैंस और कलाकार सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि पोस्ट कर रहे हैं। लोग उनकी फिल्मों के यादगार डायलॉग और सीन शेयर कर रहे हैं। हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसा एक्टर खो दिया है, जो हर किरदार में अपनी अलग पहचान बनाना जानता था।



























