गुरुग्राम में पीजी चलाना हुआ मुश्किल, निगम का बड़ा कदम

गुरुग्राम में बिना लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के चल रहे 1,625 अवैध पीजी की पहचान हुई है। नगर निगम इन पर प्रॉपर्टी टैक्स पेनल्टी लगाएगा। जानिए कहां कितने पीजी मिले, किन एजेंसियों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया और अवैध या भीड़भाड़ वाले पीजी की शिकायत के लिए नया सिस्टम कैसे काम करेगा।

अवैध पीजी की शिकायत अब होगी आसान (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • गुरुग्राम के 1,625 पीजी पर कार्रवाई
  • अवैध पीजी पर निगम का बड़ा ऐक्शन
  • आपके इलाके में भी अवैध पीजी?
  • गुरुग्राम में पीजी चलाना पड़ेगा महंगा

Gurugram News: गुरुग्राम में अवैध पीजी: नगर निगम ने शहर में बिना जरूरी लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के चल रहे 1,625 पीजी की पहचान की है। अधिकारियों के मुताबिक, कई रिहायशी मकानों को जरूरी मंजूरी के बिना पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में बदल दिया गया है। कुछ जगहों पर इमारत की क्षमता से ज्यादा लोगों को ठहराए जाने की भी जानकारी मिली है।

नगर निगम ने इन संपत्तियों को ‘अर्बन लोकल बॉडीज नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ पोर्टल पर पीजी की विशेष श्रेणी में दर्ज किया है। संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। निगम का कहना है कि वह नियमों के तहत प्रॉपर्टी टैक्स पेनल्टी लगाएगा। साथ ही, स्थानीय निवासियों को अपने इलाके में अवैध या जरूरत से ज्यादा लोगों को रखने वाले पीजी की शिकायत करने के लिए एक नया सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा।

गुरुग्राम में कहां कितने अवैध पीजी?

अधिकारियों की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) क्षेत्र में 276 पीजी की पहचान हुई है। लाइसेंस्ड कॉलोनियों में 492 और नगर निगम क्षेत्र में 856 पीजी दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों का कुल योग 1,624 होता है, जबकि अधिकारियों ने कुल संख्या 1,625 बताई है। इस अंतर पर संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण लिया जाना बाकी है।

नगर निगम के अनुसार, पहचान की गई संपत्तियों को पोर्टल पर अलग श्रेणी में रखने का उद्देश्य उनके रिकॉर्ड और बकाया संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करना है। इससे संबंधित विभागों को अपने क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन की जांच और आगे की कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

रिहायशी मकानों में पीजी, क्षमता से ज्यादा लोग

अधिकारियों का कहना है कि जिन मकानों की पहचान हुई है, उनमें से कई मूल रूप से एक परिवार के रहने के लिए बनाए गए थे। बाद में उन्हें पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। कुछ मामलों में जरूरी लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन या सुरक्षा मंजूरी के बिना यह व्यवस्था चल रही थी।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ इमारतों में तय क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया गया। भीड़भाड़ से आपात स्थिति में बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है और आग लगने जैसी घटना में जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, हर संपत्ति की स्थिति और उस पर लागू नियमों की जांच संबंधित विभागों को अलग-अलग करनी होगी।

कार्रवाई के लिए एजेंसियों को भेजा पत्र

एक अधिकारी के मुताबिक, 1 अक्टूबर को जिला नगर एवं ग्राम योजनाकार (डीटीसीपी), एचएसवीपी और हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। इन एजेंसियों से अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पीजी की जांच कर नियमों के मुताबिक कदम उठाने को कहा गया है।

गुरुग्राम नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त यश जालुका ने कहा कि निगम कानून के अनुसार संबंधित संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स पेनल्टी लगाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लाइसेंसिंग से जुड़ी अथॉरिटीज अपने नियमों के तहत अन्य उचित कार्रवाई करेंगी। यानी टैक्स संबंधी कार्रवाई नगर निगम करेगा, जबकि लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरी की जांच संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।

अवैध पीजी की शिकायत के लिए बनेगा नया सिस्टम

नगर निगम एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की योजना बना रहा है, जिसके जरिए निवासी अपने आसपास चल रहे अवैध या भीड़भाड़ वाले पीजी के बारे में सूचना दे सकेंगे। इसका मकसद शिकायतों को दर्ज करना और उन्हें संबंधित विभाग तक पहुंचाना है। सिस्टम कब शुरू होगा और शिकायत किस माध्यम से की जा सकेगी—इसकी विस्तृत जानकारी निगम की ओर से अभी सामने नहीं आई है।

निवासियों को शिकायत करते समय पीजी का पता, उपलब्ध हो तो तस्वीरें और समस्या का संक्षिप्त विवरण देना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी भी शिकायत पर कार्रवाई संबंधित विभाग की जांच और लागू नियमों के आधार पर होगी।

पीजी में फायर सेफ्टी क्यों जरूरी?

नेशनल बिल्डिंग कोड और हरियाणा फायर सर्विस एक्ट के तहत, 15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए फायर एनओसी और निर्धारित अग्नि सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं। इनमें फायर एक्सटिंग्विशर, पानी की पाइपलाइन, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर जैसे उपकरण शामिल हो सकते हैं। इमारत की ऊंचाई, इस्तेमाल और लागू नियमों के अनुसार आवश्यकताओं में अंतर हो सकता है।

फायर सेफ्टी उपकरणों का होना ही पर्याप्त नहीं है; उनका सही स्थिति में होना और नियमित जांच भी महत्वपूर्ण है। पीजी संचालकों और मकान मालिकों को संबंधित विभाग से लागू मानकों की पुष्टि करानी चाहिए।

फायर विभाग के सर्वे में 666 पीजी मिले थे

बता दें कि सितंबर में एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निशमन विभाग के सर्वे में 666 ऐसे पीजी की पहचान हुई थी, जहां फायर सेफ्टी क्लीयरेंस या जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। सर्वे के दौरान कुछ जगहों पर एक्सपायर हो चुके फायर एक्सटिंग्विशर और बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता होने की बात भी सामने आई थी।

नगर निगम की ताजा पहचान और फायर विभाग का सर्वे अलग-अलग जांच प्रक्रियाओं के आंकड़े हैं। इसलिए दोनों सूचियों के बीच कितना मेल है, यह स्पष्ट नहीं है। आगे की कार्रवाई में संबंधित एजेंसियों की जांच अहम होगी।

Sandhya Samay News

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