गोरखपुर में साइबर ठगी से जुड़े एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर देश के 14 राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर ठगी की रकम बैंक खातों में मगाता था। पुलिस के मुताबिक, रकम निकालने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलकर विदेश भेजा जाता था। साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शुक्रवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरोह के पांच अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 13.76 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में गिरोह से जुड़े 34 म्यूल बैंक खातों के जरिए 4.09 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजी जाती थी, जिससे उसके स्रोत और लेनदेन की कड़ी छिपाई जा सके।
20 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे बैंक खाते
जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य लोगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 20 प्रतिशत तक कमीशन देने का लालच देते थे। इस लालच में आए लोगों से खाते खुलवाने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक ले ली जाती थी। पुलिस का दावा है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और फर्जी निवेश या ट्रेडिंग योजनाओं से जुटाई गई रकम जमा कराने के लिए किया जाता था।
खाते में पैसा आने के बाद गिरोह के सदस्य एटीएम कार्ड और चेक के जरिये नकदी निकालते थे। कमीशन काटकर बाकी रकम आगे पहुंचाई जाती थी। इसके बाद विदेशी संपर्कों के माध्यम से रकम को USDT में बदलकर तय क्रिप्टो वॉलेट पते पर भेजने की व्यवस्था की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि रकम किन वॉलेटों तक पहुंची और विदेश में इस नेटवर्क से कौन-कौन जुड़ा था।
स्थानीय नेटवर्क से बैंक खातों की जानकारी जुटाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी नवनीत पांडेय उर्फ आदेश पांडेय की भूमिका स्थानीय स्तर पर लोगों के बैंक खातों का विवरण जुटाने में थी। उस पर सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि खातों में ठगी की रकम मंगाने, उसे नकद निकलवाने और फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजने की प्रक्रिया में भी उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पूछताछ में नवनीत ने कथित तौर पर पिछले एक साल से इस काम में शामिल होने की बात बताई है। वह लखनऊ से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। पुलिस के अनुसार, वह म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाले स्थानीय नेटवर्क को संचालित करता था।
खाते उपलब्ध कराने और नकदी निकालने की जिम्मेदारी
राजघाट क्षेत्र के रवि वर्मा पर लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों के एटीएम कार्ड और चेकबुक हासिल करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, नवनीत के जरिए खातों में रकम आने के बाद रवि एटीएम और चेक से नकदी निकालता था। अपना हिस्सा रखने के बाद वह बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था।
पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में आदर्श सिंह, प्रज्ञा रतन और आदर्श द्विवेदी के नाम भी सामने आए हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या थी और उनके बीच रकम का बंटवारा किस तरह होता था।

गिरफ्तार आरोपियों में बीटेक छात्र और ट्रेडिंग कारोबारी
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में नौतनवा, महराजगंज के वार्ड नंबर 14 गौतम बुद्ध नगर निवासी नवनीत पांडेय उर्फ आदेश पांडेय शामिल है। अन्य आरोपियों में चंदौली के खुर्जा निवासी आदर्श सिंह उर्फ थायनोस, गोरखपुर के राजघाट क्षेत्र स्थित बसंतपुर रैन बसेरा के पीछे रहने वाला रवि वर्मा, एम्स थाना क्षेत्र के कूड़ाघाट स्थित आवास विकास कॉलोनी की प्रज्ञा रतन और चिलुआताल के करीमनगर निवासी मकसूद आलम खान शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में दो बीटेक छात्र हैं, जबकि मकसूद आलम खान ट्रेडिंग के काम से जुड़ा है। पुलिस ने गिरोह के पांच फरार सदस्यों को पकड़ने के लिए तलाश तेज कर दी है। उनके संभावित ठिकानों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
म्यूल खाते देने वालों के लिए पुलिस की चेतावनी
इस मामले में पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या खाते से जुड़ी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को न दें। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
गोरखपुर साइबर ठगी मामले की जांच में अब बैंक खातों, नकदी निकासी और क्रिप्टो वॉलेट के लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और विदेश भेजी गई रकम के रास्ते का पता लगने के बाद नेटवर्क के पूरे दायरे की जानकारी मिल सकेगी।


























