दिल्ली के जंतर-मंतर पर होनेवाले बड़े प्रदर्शन ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ धरना देने निकल रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को अब कई बड़े विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों का समर्थन हासिल हो गया है। आप पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट पार्टियों के साथ योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे चेहरे भी इस आंदोलन के साथ खड़े होने की बात कह चुके हैं।
किन दलों ने दिया कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को समर्थन?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर प्रदर्शन को मिल रहा समर्थन इस आंदोलन को सिर्फ एक संगठन की पहल से बड़े राष्ट्रीय अभियान में बदल रहा है। आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बयान देकर कहा है कि वे अपने परिवार के साथ इस प्रदर्शन में शिरकत करेंगे।
इसके साथ ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और लेफ्ट पार्टियों ने भी आंदोलन में हिस्सा लेने का ऐलान कर दिया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश से समर्थन का संकेत साफ दे दिया।
अखिलेश यादव की पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर लिखा है कि किसी के रोके नहीं रुकेगा। अब दिल्ली में देश जुटेगा! हम देश की युवा ऊर्जा के साथ हैं। भाजपा सरकार अगर समझ रही है कि वो ताक़त के बल पर जनता को रोक लेगी तो ये उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। ‘जंतर-मंतर’ अब एक जगह का नाम नहीं, एक नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार ने आंदोलनकारियों को रोका तो देश में हर जगह जंतर-मंतर बन जाएगा। माना बादशाहों का बंदोबस्त है बख़्तरबंद, पर उन्होंने देखा न नौजवानों का दमख़म, यहां हौसलों की भी तैयारी है चाकचौबंद, हैं साथ सब, मानकर इसको अंतिम जंग।”
अखिलेश के शब्दों में साफ संदेश है कि विपक्ष इस मुद्दे को चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाने के बड़े मौके के रूप में देख रहा है।
योगेंद्र यादव ने तय की तीन मांगें
स्वराज इंडिया नेता और सिविल सोसाइटी के बड़े चेहरे योगेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन के समर्थन में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “10 अक्टूबर | दिल्ली चलो! मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। SIR रद्द करो। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून रद्द करो।”
यानी इस आंदोलन के केंद्र में तीन बड़ी मांगें हैं – पहली, सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा; दूसरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रद्द किया जाना; और तीसरी, 2023 में बने उस कानून को वापस लिया जाना जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़ा है।
प्रशांत भूषण की सलाह – रोके जाने पर वहीं से प्रोटेस्ट जारी रखें
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी प्रदर्शनकारियों से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है और सभी साथियों को इसमें शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए।
भूषण ने एक बड़ी रणनीतिक सलाह भी दी। उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस अगर जबरदस्ती रोकती है, तो जहां रोकती है आप वहीं बैठ जाइए और वहीं से अपना प्रोटेस्ट जारी रखिए। ये हमारे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। इसमें सबको जुड़ने की जरूरत है।”
किसान संगठनों का साथ, भाजपा के आरोप बेकार?
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत और गुरुनाम सिंह चढूनी ने भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने X पर पोस्ट कर दोनों किसान नेताओं का आभार जताया है। किसान आंदोलन का अनुभव रखने वाले संगठनों का जुड़ना इस प्रदर्शन की ताकत को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
वहीं भाजपा नेता लगातार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर हमला बोल रहे हैं। उनका आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दरअसल आम आदमी पार्टी की ‘बी-टीम’ है और आप पार्टी के इशारों पर काम कर रही है। हालांकि अब आप पार्टी के अलावा TMC, सपा और लेफ्ट जैसे दलों का समर्थन मिलने से बीजेपी के इस आरोप पर भी सवाल उठ सकते हैं।
दिल्ली में सख्ती: 23 हजार से ज्यादा जवान तैनात, 45 मेट्रो स्टेशन बंद
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं।
जंतर-मंतर और उसके आसपास धारा 163 लागू की गई है, जो असेंबली पर रोक लगाती है। राजधानी में 23 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। नियंत्रण के लिए 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं, जबकि नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन पर आने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी रद्द कर दी गई हैं। इससे साफ है कि सरकार और प्रशासन आंदोलनकारियों की तादाद घटाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
























