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दिल्ली में 650 करोड़ का अस्पताल घोटाला, विपक्ष का आरोप

Delhi News: सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस घोटाले में कई विभाग पीछे छूट गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि डॉक्टर वत्सला अग्रवाल पर आरोप हैं कि उन्होंने यह घोटाला किया, लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने अकेले ही यह काम किया? उनका तर्क है कि यह योजना का हिस्सा था और इसमें सरकार की मिलीभगत थी।

सरकार की योजना से जनता का स्वास्थ्य खतरे में

HIGHLIGHTS

  • वत्सला अग्रवाल का मामला फिर गरमाया
  • कैसे बढ़ रहा है सरकारी भ्रष्टाचार?
  • अस्पताल खरीदारी में बड़ा घोटाला?
  • अस्पतालों में महंगे सामान की खरीदारी
  • सरकार की मिलीभगत का पर्दाफाश

Delhi News: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और उपकरणों की खरीद में कथित तौर पर हुए 650 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। आप पार्टी (AAP) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रेखा सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि दिल्ली में 27 साल बाद बनी 16 महीने की सरकार ने इस घोटाले को अंजाम दिया है और यह पूरी योजना के साथ किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें सरकार की सोची समझी योजना शामिल है, और विभागीय अधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

घोटाले का पर्दाफाश: क्या है पूरा मामला?

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस घोटाले में कई विभाग पीछे छूट गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि डॉक्टर वत्सला अग्रवाल पर आरोप हैं कि उन्होंने यह घोटाला किया, लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने अकेले ही यह काम किया? उनका तर्क है कि यह योजना का हिस्सा था और इसमें सरकार की मिलीभगत थी।

मार्च 2025 में ही यह योजना बनाई गई थी, और फरवरी 2025 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद यह और तेज हो गई। इस योजना के तहत, सरकार ने 10 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया कि अब कोई भी अस्पताल खुद दवाइयां और उपकरण नहीं खरीदेगा, बल्कि इसके लिए कॉरपोरेट प्रोसेस ऑर्डर (CPA) के माध्यम से खरीदारी की जाएगी।

सरकार का आदेश और खरीदारी का तंत्र

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि 10 जुलाई 2025 को सरकार ने यह आदेश दिया कि अस्पताल खुद दवाइयां और उपकरण न खरीदे। इसके बाद, सरकार ने विभिन्न अस्पतालों में खरीद पर रोक लगा दी और यह काम CPA को सौंप दिया। इस आदेश को लागू करने में, तत्कालीन निदेशक (डीजीएचएस) डॉ. रति मक्कड पर दबाव बनाने का आरोप है कि उन्होंने जुलाई 2025 में इस्तीफा दे दिया। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राजनीतिक और भ्रष्टाचार की मिलीभगत थी।

सीएम रेखा गुप्ता पर भी विपक्ष ने हमला बोला है। उनका आरोप है कि अगस्त 2025 में, मुख्यमंत्री ने डॉक्टर वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस बना दिया, जो उनसे अधिक वरिष्ठ भी थीं। इस निर्णय को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह कदम सरकार की मिलीभगत का संकेत है। इसके अलावा, उनके खिलाफ विजिलेंस में शिकायत भी दर्ज है, और जांच अभी भी चल रही है।

महंगे उपकरण और सामग्री

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इस घोटाले के तहत अस्पतालों में महंगे उपकरण और सामग्री खरीदी गई। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक एक्स-रे मशीन, जिसकी कीमत बाजार में 10 लाख रुपये है, दिल्ली सरकार ने 25 लाख रुपये में खरीदी। इसी तरह, महंगा ऑरएस (ORS) खरीदा गया, जहां एक पैकेट की कीमत सामान्यतः 15 रुपये है, वहीं दिल्ली सरकार ने उसे 205 रुपये में खरीदा। इस तरह के कई उदाहरण हैं, जिनसे पता चलता है कि इस खरीदारी में भारी भ्रष्टाचार हुआ है।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार ने अस्पतालों के लिए 75 करोड़ रुपये की चादरें खरीदीं, जबकि जैन पोर्टल पर उस समय एक चादर की कीमत 150 रुपये थी। इसके विपरीत, दिल्ली सरकार ने इन्हें तीन गुना अधिक यानी 450 रुपये प्रति चादर पर खरीदा। इस खरीदी में लाखों की राशि का घोटाला हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 16 लाख 66 हजार 666 चादरें खरीदी, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता केवल 15,659 बेड है। यह स्पष्ट है कि अस्पतालों की क्षमता से कहीं अधिक चादरें खरीदी गईं। इसके अलावा, एक बेड के लिए 106 चादरें और एक ओआरएस पर 190 रुपये का कमीशन खाया गया।

सरकार का भ्रामक दावा और भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री रोज बयान देते हैं कि अस्पतालों में ऑरएस बांटे जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में सरकार ने 50 लाख ऑरएस खरीदे और उनमें से कुछ को महंगे दामों पर खरीदा गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इन पैकेट्स की कीमत 15 रुपये हो सकती है, लेकिन दिल्ली सरकार ने उन्हें 205 रुपये में खरीदा। यह भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस पूरे घोटाले में सरकार की मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि वत्सला अग्रवाल को शिकायत के आधार पर विजिलेंस जांच का सामना करना पड़ा, और उसके बावजूद उन्हें DGHS की जिम्मेदारी दी गई। उनका तर्क है कि यह सब मिलकर बड़े भ्रष्टाचार का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस घोटाले में वत्सला अग्रवाल खुद संलिप्त नहीं हो सकतीं, बल्कि यह पूरी योजना का हिस्सा है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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