दिल्ली: मोहन गार्डन में बिना रिश्वत नहीं पहुंचती एमसीडी की कूड़े गाड़ियों

Mohan Garden News: पश्चिम दिल्ली में बुद्ध बाजार, गुरुद्वारा रोड समेत मोहन गार्डन के कई मोहल्लों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एमसीडी के कर्मचारियों और ड्राइवरों का एक सुव्यवस्थित 'वसूली रैकेट' है।

दिल्ली: 'फ्री' कूड़ा ढोने वाली गाड़ियों का 'पैसे वसूली' का धंधा, मोहन गार्डन में खुलेआम फैल रहा कचरा

HIGHLIGHTS

  • मोहन गार्डन में 'फ्री' कूड़ा ढुलाई का खेल:
  • बिना पैसे वाले इलाकों में गाड़ी का 'अलार्म' बंद
  • मोहन गार्डन में कूड़ा नहीं उठाने पर एमसीडी ड्राइवर
  • लोग खुले में कचरा फेंकने को मजबूर
  • मोहन गार्डन में खुलेआम पैसे लेकर ही उठ रहा कचरा

Delhi News: दिल्ली सरकार और एमसीडी द्वारा ‘मुफ्त कचरा ढुलाई’ के बड़े-बड़े दावे मोहन गार्डन की सड़कों पर खोखले साबित हो रहे हैं। यहां के कई इलाकों में कूड़े की गाड़ियों के न आने से आम जनता को खुलेआम कचरा फेंकने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे सड़कों पर गंदगी का पहाड़ लग गया है और स्वच्छता की कोई कसर नहीं बची है।

पश्चिम दिल्ली में बुद्ध बाजार, गुरुद्वारा रोड समेत मोहन गार्डन के कई मोहल्लों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एमसीडी के कर्मचारियों और ड्राइवरों का एक सुव्यवस्थित ‘वसूली रैकेट’ है। आरोप है कि कूड़ा ढोने वाली गाड़ियां केवल उन्हीं इलाकों या घरों के सामने रुकती हैं, जहां से उन्हें मोटी रकम वसूली के रूप में मिलती है।

अलार्म बंद करके निकाल ली जाती है गाड़ी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों की ओर से पैसा नहीं मिलता, उन इलाकों में ड्राइवर जान-बूझकर गाड़ी का अलार्म और हॉर्न बंद कर देते हैं। इसका मतलब साफ है कि लोगों को पता ही नहीं चलता कि कूड़े की गाड़ी आई भी या नहीं। कुछ इलाकों में तो गाड़ियां महीनों भर नजर ही नहीं आतीं, जबकि कभी-कभी औपचारिकता निभाने के लिए महीने में एक-दो बार पूरा अलार्म बजाकर गाड़ी निकाली जाती है।

शिकायतों पर एमसीडी और सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगती

वहीं, दिल्ली सरकार जहां इन गाड़ियों को ‘बिल्कुल फ्री’ बताकर प्रचार कर रही है, वहीं जमीनी हालात इसके उलट हैं। इस मामले में लोगों ने दिल्ली सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन ऑनलाइन शिकायत का कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद लोगों ने दिल्ली एमसीडी अधिकारियों और स्वच्छता विभाग को भी इस मामले की जानकारी दी, लेकिन अधिकारियों की कोरी लापरवाही के चलते आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

अधिकारियों और ड्राइवरों के इस गठजोड़ के कारण आम जनता सबसे ज्यादा परेशान है। कूड़ा जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है और मौसमी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

सवाल उठ रहे हैं अधिकारियों पर

मोहन गार्डन के निवासियों का कहना है कि अगर कोई ऑनलाइन शिकायत करता है, तो उसकी सूचना सीधे उन्हीं अधिकारियों और ड्राइवरों तक पहुंचती है, जिसके बाद उस इलाके में गाड़ी आना और भी बंद हो जाता है। अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एमसीडी के अधिकारी इस खेल में कितने बड़े हिस्सेदार हैं? जब तक इस ‘वसूली रैकेट’ पर नकेल नहीं कसी जाती, तब तक मोहन गार्डन की गलियों को साफ देखना सपना ही बनकर रह जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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