दिल्ली:मोहन गार्डन में कूड़ा गाड़ियां महीनों से गायब

आम जनता कचरा कही भी फेंकने को मजबूर (फाइल फोटो)

Delhi Mohan Garden News:  पश्चिम दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में कूड़ा न उठने की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं, खासकर तब जब कुछ क्षेत्रों में महीनों तक कूड़ा गाड़ियां नहीं आती हैं और लोग खुले स्थानों पर कूड़ा फेंकने को मजबूर हो जाते हैं। यह मुद्दा स्थानीय नागरिकों के लिए सिरदर्द बन गया है, जबकि दिल्ली की भाजपा सरकार अपने स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े दावे कर रही है।

एमसीडी की लापरवाही पर सवाल उठते हैं

बता दें कि एक तरफ़ जहां भाजपा सरकार राजधानी दिल्ली को स्वच्छ बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मोहन गार्डन के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। इलाके में सफाई कर्मचारियों की ओर से नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था न होना, यहां की गंभीर समस्या का मुख्य कारण बन गया है।

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बता दें कि स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कूड़ा गाड़ियों का आना पूरी तरह से ‘रिश्वत’ पर निर्भर है। जिन गलियों में सफाई कर्मचारियों को पैसे मिलते हैं, वहां तो गाड़ी आती है, लेकिन कई ऐसी गलियां हैं जहां महीनों तक कूड़ा नहीं उठता। इस कारण लोग खुले प्लॉटों में कूड़ा फेंकने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे इलाके में गंदगी फैलने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं।

आम जनता ने किया भाजपा सरकार पर हमला

बता दें कि स्वच्छता के मुद्दे पर भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठते हुए स्थानीय नागरिकों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि एमसीडी की सफाई व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, और यह सिर्फ एक दिखावा है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर कई बार शिकायतें विधायक से लेकर ऑनलाइन तक की गईं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।

स्वच्छता का नारा, जमीनी हकीकत कुछ और

बता दें कि भाजपा सरकार ने सफाई और सिवर की समस्या के समाधान के लिए कई बार बड़े-बड़े बयान दिए हैं, लेकिन इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता कि दिल्ली के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था अभी भी बेहद खस्ताहाल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोहन गार्डन जैसे इलाकों में सफाई कर्मचारियों का कामकाजी माहौल पूरी तरह से भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुका है, जिससे जनता की समस्याएं और बढ़ रही हैं।

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भले ही दिल्ली में स्वच्छता के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह गंदगी भविष्य में स्वास्थ्य संकट और समाजिक अशांति का कारण बन सकती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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