दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप की घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। इस घटना के बाद सार्वजनिक जगहों और सड़कों पर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठे हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत केवल पार्कों तक सीमित नहीं है—रोजमर्रा के सफर को भरोसेमंद बनाना भी इसका अहम हिस्सा है।
इसी संदर्भ में दिल्ली में पिंक ई-ऑटो को बढ़ावा देने और महिला ड्राइवरों की संख्या बढ़ाने की पहल पर जोर दिया जा रहा है। नारी शक्ति संगठन करीब 3,000 महिलाओं को ऑटो चलाने का प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सरकार की DURGA योजना के पहले चरण में 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो का प्रावधान किया गया है। इस पहल का मकसद महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार से जोड़ना और लास्ट-माइल परिवहन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प तैयार करना है।
क्या है दिल्ली की पिंक ई-ऑटो पहल?
पिंक ई-ऑटो योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक ऑटो की मालिक और चालक बनने का अवसर देने की बात कही गई है। योजना के पहले चरण में कुल 1,300 ऑटो प्रस्तावित हैं। इनमें 1,170 ऑटो महिलाओं और 130 ट्रांसजेंडर लाभार्थियों के लिए रखे गए हैं।
इस पहल के दो संभावित फायदे हैं। पहला, लाभार्थियों को स्वरोजगार का अवसर मिल सकता है। दूसरा, महिला यात्रियों को जरूरत पड़ने पर महिला ड्राइवर के साथ सफर करने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, योजना का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑटो कितनी जल्दी सड़कों पर आते हैं, प्रशिक्षण और परमिट की प्रक्रिया कितनी सहज होती है और यात्रियों को यह सेवा कितनी आसानी से उपलब्ध होती है।
महिला यात्रियों के लिए सफर का एक और विकल्प
सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय हर महिला की जरूरत और अनुभव अलग होता है। कुछ यात्रियों को देर शाम या अकेले यात्रा करते हुए अतिरिक्त भरोसे की जरूरत महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला ड्राइवर वाला ऑटो उनके लिए एक विकल्प बन सकता है—खास तौर पर उन छोटी दूरी की यात्राओं में, जहां घर, मेट्रो स्टेशन, बाजार या कार्यस्थल के बीच लास्ट-माइल कनेक्टिविटी जरूरी होती है।
महिला ड्राइवर की मौजूदगी अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है। सुरक्षित परिवहन के लिए वाहन की नियमित जांच, ड्राइवर का सत्यापन, शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था, आपातकालीन सहायता और नियमों का पालन भी जरूरी है। फिर भी, यात्रियों को विकल्प देना और परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सुरक्षा तथा भरोसे की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
पुष्पा रानी की कहानी: नौकरी के बाद ऑटो से आत्मनिर्भरता
दक्षिण दिल्ली में ऑटो चलाने वाली पुष्पा रानी इस बदलाव की एक मिसाल हैं। कोविड के दौरान उनकी नौकरी चली गई। उम्र अधिक होने के कारण उन्हें दोबारा नौकरी पाने में मुश्किल हुई, जिसके बाद उन्होंने ऑटो चलाना शुरू किया। आज वह कालकाजी, नेहरू प्लेस, कुतुब मीनार और दक्षिण दिल्ली के अन्य इलाकों में यात्रियों को सेवा देती हैं।
पुष्पा रानी ग्रेजुएट हैं। उनके अनुभव के मुताबिक, उनके ऑटो में बैठने वाली कई महिला यात्री महिला ड्राइवर के साथ सफर करके सहज महसूस करती हैं। कुछ यात्री इस बात पर खुशी भी जताती हैं कि उन्हें महिला चालक के साथ यात्रा करने का मौका मिला। इस तरह उनका रोजगार केवल उनकी आर्थिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है; उनकी मौजूदगी यात्रियों के सामने एक अलग विकल्प भी रखती है।
पुष्पा रानी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि सही अवसर मिलने पर महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में काम कर सकती हैं जिन्हें आम तौर पर पुरुष-प्रधान माना जाता है। पिंक ई-ऑटो जैसी योजनाएं अगर प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया के साथ प्रभावी ढंग से लागू हों, तो अधिक महिलाएं इस क्षेत्र में आ सकती हैं।
3,000 महिला ड्राइवरों को प्रशिक्षण देने की कोशिश
नारी शक्ति संगठन करीब 3,000 महिला ऑटो ड्राइवरों को तैयार करने की पहल कर रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को ड्राइविंग और इस काम से जुड़ी जरूरी जानकारी देना है, ताकि वे पेशेवर तौर पर ऑटो संचालन कर सकें। बड़े स्तर पर यह पहल आगे बढ़ती है तो दिल्ली की सड़कों पर महिला ड्राइवरों की संख्या बढ़ सकती है।
प्रशिक्षण के साथ कुछ व्यावहारिक जरूरतों पर भी ध्यान देना होगा—जैसे ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट, वाहन तक पहुंच, चार्जिंग सुविधाएं, बीमा, मरम्मत और यात्रियों तक सेवा की जानकारी। महिला ड्राइवरों के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था भी जरूरी है। इन पहलुओं को साथ लेकर चलने से योजना का लाभ केवल कागजों तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर पहुंच सकता है।
रोजगार और सुरक्षित लास्ट-माइल परिवहन
इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देने का एक उद्देश्य प्रदूषण कम करने वाले परिवहन विकल्पों को प्रोत्साहित करना भी है। इसके साथ महिला लाभार्थियों को वाहन चलाने और कमाई का अवसर मिलता है। यदि योजना के तहत महिलाएं ऑटो की मालिक और चालक बनती हैं, तो उन्हें रोजगार के साथ अपने काम पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।
यात्रियों के लिए भी पिंक ई-ऑटो लास्ट-माइल यात्रा का एक विकल्प बन सकते हैं। मेट्रो स्टेशन से घर या कार्यालय तक पहुंचने के लिए ऑटो की जरूरत पड़ती है। ऐसे सफर में उपलब्धता, किराया, सेवा का समय और भरोसेमंद बुकिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण होंगे। महिला ड्राइवरों की पहचान और उपलब्धता की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म या स्थानीय स्तर पर स्पष्ट सूचना व्यवस्था मददगार हो सकती है।
सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था जरूरी
आस्था कुंज पार्क की घटना ने महिला सुरक्षा पर चर्चा को तेज किया है, लेकिन किसी एक योजना से यह समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन के लिए पुलिस और प्रशासन की सक्रियता, रोशनी वाली सड़कें, निगरानी, समय पर मदद और प्रभावी शिकायत व्यवस्था भी जरूरी हैं। ड्राइवरों और यात्रियों—दोनों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम और जवाबदेही होनी चाहिए।
पिंक ई-ऑटो को महिला सुरक्षा की पूरी गारंटी के रूप में पेश करने के बजाय एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर देखना अधिक उचित है। इसका महत्व इस बात में है कि यह महिलाओं को रोजगार से जोड़ सकता है और महिला यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार ड्राइवर चुनने का अवसर दे सकता है।
























