Delhi News: दिल्ली फायर सर्विस ने राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा सप्ताह (Fire Safety Week) के दौरान अति संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे पुरानी दिल्ली की संकरी गलियां और झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टर—के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक और आधुनिक रणनीति का खाका खींचा है। विभाग ने इन चुनौतीपूर्ण इलाकों से निपटने के लिए अपने बेड़े में ‘रोबो फायर फाइटर’ और जर्मन तकनीक से बनी ‘स्नेक लेडर’ जैसी अत्याधुनिक मशीनों को शामिल किया है।
संकरी गलियों और JJ क्लस्टर के लिए विशेष रणनीति
दिल्ली का भौगोलिक ढांचा, खासकर पुरानी दिल्ली की भीड़भाड़ वाली और संकरी गलियां, आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकलकर्मियों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए चीफ फायर ऑफिसर (CFO) के निर्देशानुसार एक विशेष रणनीति बनाई गई है। इस रणनीति के तहत इन क्षेत्रों में ज्वलनशील सामग्री के भंडारण पर सख्त नियंत्रण लगाया जा रहा है। साथ ही, बड़ी फायर टेंडर जिन गलियों में प्रवेश नहीं कर पाती हैं, वहां उनकी जगह छोटे और कुशल फायर वाहनों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र (Fire NOC) की पूरी प्रक्रिया को अब 100 प्रतिशत ऑनलाइन कर दिया गया है।
स्कूलों और अस्पतालों की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता
इस वर्ष की थीम के अनुरूप, दिल्ली फायर सर्विस का मुख्य फोकस स्कूलों और अस्पतालों पर है। चीफ फायर ऑफिसर ए.के. मालिक का मानना है कि यदि बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी अग्नि सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से जागरूक हो जाते हैं, तो अनहोनी के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।
सीएफओ मालिक ने कहा, “जागरूकता ही सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है। हमारा लक्ष्य केवल आग बुझाना नहीं है, बल्कि ऐसी परिस्थितियां पैदा करना है कि आग लगने की घटना ही न हो। फायर सेफ्टी वीक के दौरान हम इन संस्थानों को फायर के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।”
रोबो और स्नेक लेडर से ताकतवर हुआ विभाग
तकनीक के क्षेत्र में बड़ा अपग्रेड करते हुए दिल्ली फायर सर्विस ने अपने बेड़े में अब ‘रोबो फायर मशीन’ को शामिल किया है। इसके साथ ही जर्मनी (German-made) निर्मित अत्याधुनिक ‘स्नेक लेडर’ भी खरीदी गई है। इस नई तकनीक की खासियत बताते हुए अधिकारियों ने बताया कि ये रोबो फाइटर और स्नेक लेडर उन इलाकों में काम करेंगे जहां सामान्य रूप से फायर फाइटर्स जाने में असमर्थ होते हैं।
ये मशीनें बेहद संकरी गलियों और खतरनाक जगहों पर बिना मानवीय जान के जोखिम के आग पर काबू पाने में सक्षम हैं। फायर सेफ्टी वीक के दौरान शुरू किए गए इस दोहरी रणनीति (जागरूकता + आधुनिक तकनीक) से उम्मीद है कि दिल्ली जैसे घने शहरी क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं में आने वाले समय में भारी कमी आएगी और आपातकालीन स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज और प्रभावी हो सकेंगे।


















