Delhi News: दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में सामने आए 650 करोड़ रुपये के कथित हेल्थ घोटाले का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। आज मंगलवार को आप पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता कर इस मामले में दिल्ली सरकार और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को घेरा। उन्होंने सीधे सवाल उठाया कि जब पूरे मामले का केंद्र एक ही शख्स है, तो अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सौरभ भारद्वाज का प्रेस कॉन्फ्रेंस
आप पार्टी सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसीबी की 14 पन्नों की एफआईआर को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि 2 जून 2026 को दर्ज हुई इस एफआईआर में सबसे प्रमुख नाम राजीव रंगीला का है और इस पर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पूरी जांच का केंद्र बिंदु यही व्यक्ति है। एफआईआर में उसका नाम बार-बार दर्ज है, फिर भी वह खुलेआम घूम रहा है। सरकार और एसीबी को बताना चाहिए कि राजीव रंगीला आखिर कहां है और उसे बचाया क्यों जा रहा है?
टेंडर में था बड़ा खेल
आप पार्टी नेता ने घोटाले के ‘मॉडस ऑपरेंडी’ (कार्यप्रणाली) को विस्तार से समझाया और उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव रंगीला ने अलग-अलग नामों से कई फर्जी कंपनियां बनाईं और स्वास्थ्य विभाग की पूरी खरीद प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया। दवाइयों, मेडिकल उपकरणों, बेडशीट और अन्य सामानों की खरीद के लिए जो तकनीकी और वित्तीय शर्तें तय की जाती थीं, उन्हें इस तरह से ‘कस्टमाइज’ किया जाता था कि बाजार में मौजूद सामान्य और ईमानदार कंपनियां टेंडर में भाग ही न ले सकें। इन्हीं फर्जी कंपनियों के जरिए L1, L2 और L3 (सबसे कम बोली वाली) कंपनियां बनाई जातीं और अंततः ठेका उसी समूह को मिल जाता था। इस तरह प्रतिस्पर्धा को खत्म कर सरकारी खजाने को बेहद महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए मजबूर किया गया।
मशीन खरीदने का खेल
सौरभ भारद्वाज ने मशीन घोटाले को समझाने के लिए एक्स-रे मशीन खरीद का उदाहरण दिया और बताया कि बाजार में जिस एक्स-रे मशीन की कीमत करीब 10 लाख रुपये थी, उसे दिल्ली सरकार ने लगभग 33 लाख रुपये में खरीदा। शुरुआत में सिर्फ 2 मशीनों के लिए टेंडर निकाला गया, लेकिन बाद में उसी बढ़े हुए दर पर 448 मशीनें खरीद ली गईं। इससे सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ, जिसका जिक्र ACB अपनी एफआईआर में भी कर चुका है।
सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया और कहा कि दिल्ली सरकार एक 20 हजार रुपये तनख्वाह वाले संविदा कर्मचारी को नौकरी से निकालने का भरपूर प्रचार कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि जिस व्यक्ति (राजीव रंगीला) ने पूरे 650 करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया, उसके खिलाफ एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? यह साफ है कि सरकार छोटे कर्मचारियों पर एक्शन दिखाकर असली कुत्ते को बचाने का प्रयास कर रही है।
सीएम केस दर्ज होने का दावा गलत
दिल्ली सरकार के उस दावे को खारिज करते हुए भारद्वाज ने कहा कि मामला सीएम रेखा गुप्ता की शिकायत पर दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने एफआईआर का हवाला देते हुए कहा, “एफआईआर में साफ लिखा है कि यह कार्रवाई ‘सोर्स बेस्ड इन्फॉर्मेशन’ (गुप्त सूचना) के आधार पर शुरू हुई। अगर मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत आती, तो एफआईआर में उसका स्पष्ट जिक्र होता। मुख्यमंत्री का नाम लेकर गलत प्रचार करना बंद किया जाना चाहिए।”
कांग्रेस से लेकर अब तक का सफर
एक सवाल के जवाब में भारद्वाज ने राजीव रंगीला के राजनीतिक संरक्षण पर कहा कि उनके पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, लेकिन पूरे मामले में ‘पैसे और दलाली का खेल’ साफ दिख रहा है। उन्होंने बताया कि राजीव रंजीला कांग्रेस सरकार के समय से स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय था, हालांकि AAP सरकार के दौरान उसे विभाग से बाहर कर दिया गया था।
प्रेस वार्ता में सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि आप पार्टी की सबसे बड़ी मांग है कि 650 करोड़ के हेल्थ घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता राजीव रंगीला को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए जाएंगे।























