अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को लेकर बांसडीह में संघर्ष जारी

UP News: उत्तर प्रदेश शासन, समाज कल्याण अनुभाग-3 लखनऊ के प्रमुख सचिव द्वारा तिथि 3 नवंबर 2021 को एक स्पष्ट शासनादेश जारी किया गया था। इस आदेश में स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया था कि जिन आवेदकों के पूर्वजों के भू-राजस्व अभिलेखों में 'गोंड' अंकित पाया जाए, उन्हें किसी भी प्रकार की हिल-हवाली किए बिना तत्काल अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाए।

शासनादेश के बावजूद न्याय नहीं, बांसडीह में गोंड समाज का आंदोलन तेज

HIGHLIGHTS

  • जाति प्रमाण पत्र में देरी पर बांसडीह में उबाल, गोंड समाज ने खोला मोर्चा
  • तहसीलदार पर दोहरे मापदंड का आरोप, गोंड समुदाय का प्रदर्शन तेज
  • भू-राजस्व अभिलेखों के बावजूद प्रमाण पत्र नहीं, गोंड समाज में आक्रोश
  • प्रमुख सचिव के आदेश पर सवाल, बांसडीह तहसील में धरना जारी
  • ‘गोंड’ दर्ज अभिलेख भी नहीं दिला पा रहे अधिकार, प्रशासन कटघरे में

UP News: आजादी के पूर्व के भू-राजस्व अभिलेखों के बावजूद अनुसूचित जनजाति (ST) का जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से नाराज गोंड समुदाय का बांसडीह तहसील पर धरना प्रदर्शन 23 अप्रैल को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार नितिन कुमार सिंह पर प्रमुख सचिव के शासनादेश की घोर अवमानना और दोहरा मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पुराने अभिलेखों में दर्ज?

बता दें कि गोंड समुदाय के लोगों का कहना है कि आजादी से पूर्व के भू-राजस्व अभिलेखों (1345, 1356 और 1359 फसली) में उनकी जाति स्पष्ट रूप से ‘गोंड’ के रूप में दर्ज है। ये सभी अभिलेख वर्तमान में भी तहसील और कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित हैं। इतना ही नहीं, पुराने जन्म-मृत्यु रजिस्टर (फौती) में भी ‘गोंड’ जाति स्पष्ट रूप से अंकित पाई जाती है।

प्रमुख सचिव का स्पष्ट शासनादेश

उत्तर प्रदेश शासन, समाज कल्याण अनुभाग-3 लखनऊ के प्रमुख सचिव द्वारा तिथि 3 नवंबर 2021 को एक स्पष्ट शासनादेश जारी किया गया था। इस आदेश में स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया था कि जिन आवेदकों के पूर्वजों के भू-राजस्व अभिलेखों में ‘गोंड’ अंकित पाया जाए, उन्हें किसी भी प्रकार की हिल-हवाली किए बिना तत्काल अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाए।

तहसीलदार पर ‘दोहरा मापदंड’ का आरोप

शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद तहसीलदार पर मनमाना रुख अपनाने का आरोप लगाया गया है। धरनारियों का कहना है कि जब वे ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो उन्हें बिना किसी वजह बार-बार अस्वीकृत कर दिया जाता है।

सबसे बड़ा सवाल तहसीलदार के ‘दोहरे मापदंड’ को लेकर उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पिछले दिनों तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने कुछ साक्ष्यों के आधार पर 4 लोगों को गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी किए हैं। जबकि धरना पर बैठे अन्य गोंड लोगों के पास ठीक वैसा ही साक्ष्य-सबूत मौजूद है। ऐसे में सिर्फ चुनिंदा लोगों को प्रमाण पत्र देना और बाकियों के आवेदन रद्द करना पक्षपात करार दिया गया।

आंदोलनकारियों का स्पष्ट एलान

गोंडपा के जिलाध्यक्ष सुरेश शाह और बांसडीह तहसील इकाई अध्यक्ष उमाशंकर गोंड ने स्पष्ट कहा कि प्रमुख सचिव के शासनादेश का सख्ती से अनुपालन कराया जाए। जब तक गोंड अनुसूचित जनजाति के सभी पात्र लोगों को सुगमता पूर्वक जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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