चीन के हुनान प्रांत में एक किसान को बतख के पेट से सोने के कण मिलने से हड़कंप मच गया। इस दुर्लभ घटना को लोग शुभ संकेत मान रहे हैं। अक्सर कहा जाता है कि भाग्य कब किसे कब किस रूप में मिले, कुछ नहीं कहा जा सकता। चीन के एक छोटे से गांव में यह बात सच साबित हुई, जब एक किसान को रोजमर्रा के काम के दौरान ऐसा ‘खजाना’ मिला, जिससे पूरा गांव हैरान रह गया। यहां एक शख्स को बतख के पेट से सोने के कण मिले, जिनकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
जब बतख के पेट में चमका सोना
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना फरवरी महीने की है। हुनान प्रांत के लोंगहुई काउंटी में रहने वाले एक व्यक्ति (उपनाम लियू) जब एक बतख को पकाने की तैयारी कर रहा था, तभी उसे कुछ अनोखा दिखाई दिया। बतख की सफाई करते समय उसके पेट में छोटे-छोटे चमकदार कण मिले। शुरुआत में तो वह समझ नहीं पाया कि यह क्या है, लेकिन जब उसने इन कणों को निकालकर देखा, तो वह सोने जैसे दिखने लगे।
जांच में निकला असली सोना, जानिए कितनी है कीमत?
स्थानीय मीडिया ने बताया कि इन कणों को जलाकर और जांचा गया, तो यह असली सोना साबित हुआ। इन कणों का कुल वजन करीब 10 ग्राम निकला। बाजार भाव के हिसाब से इस सोने की कीमत लगभग 12,000 युआन (चीनी मुद्रा) यानी भारतीय रुपये में करीब 1.65 लाख रुपये आंकी गई। इस अनोखी खोज के बाद इलाके में चर्चा शुरू हो गई है। लियू के पिता ने तो इस घटना को आने वाले साल के लिए ‘शुभ संकेत’ तक बता दिया है।
कैसे पहुंचा सोना बतख के पेट में?
इस सवाल का जवाब इलाके की भूगोलिक स्थिति में छिपा है। लियू के मुताबिक, गांव में बतखों को खुले में पाला जाता है। ये बतखें अक्सर पास बहने वाली ‘चेनशुई नदी’ के किनारे घूमती रहती हैं। यह नदी कभी सोने के भंडार के लिए मशहूर थी। माना जा रहा है कि बतख ने नदी किनारे की मिट्टी या रेत खाते समय उसमें मौजूद सोने के छोटे-छोटे कण निगल लिए होंगे, जो उसके पेट में जमा हो गए।
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इतिहास से जुड़ता है यह सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। लियू ने बताया कि गांव के कुछ लोगों को पहले भी बतखों के पेट में सोने के छोटे कण मिले हैं, लेकिन 10 ग्राम जैसी बड़ी मात्रा में सोना मिलना बेहद दुर्लभ है। दरअसल, 1970 से 1990 के दशक के बीच इस नदी में सोने की खदानें थीं और बड़ी संख्या में लोग सोने की तलाश में आते थे, जिस पर बाद में सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया।
इतिहासकारों के मुताबिक, यह घटना प्राचीन परंपरा से भी जुड़ी है। तांग वंश (618-907 ईस्वी) के समय भी किसान बतख और हंस के मल से सोने के कण इकट्ठा करते थे। उस समय माना जाता था कि ये पक्षी सोने वाली मिट्टी निगल लेते हैं। स्थानीय अधिकारियों ने भी इस घटना की पुष्टि की है और कहा है कि पिछले साल भी ग्रामीणों को इसी नदी में रेत धोते समय सोना मिला था।
























