Nagpur Builder: नागपुर में बिल्डर की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक ही फ्लैट को दो अलग-अलग व्यक्तियों के साथ बेचे जाने का आरोप है। इस धोखाधड़ी के कारण पीड़ितों को लगभग 1.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह मामला बजाजनगर पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया और इसमें प्रमुख आरोपी बिल्डर संतोषकुमार गंदेवार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आइए इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी और उसके पीछे की कहानी को विस्तार से समझते हैं।
शिकायतकर्ता और पीड़ित की पृष्ठभूमि
बता दें कि मामले के मुख्य शिकायतकर्ता प्रवीण उपलंचीवार (70), जो कि सेवानिवृत्त सहायक कार्यकारी अभियंता हैं, नागपुर के अजनी इलाके के निवासी हैं। उनका परिवार मुख्य रूप से उनके बेटे और बेटी से बना है। उनके बेटे अमेरिका में रहते हैं, जबकि उनकी बेटी नागपुर में ही रहती हैं। वृद्धावस्था में अपने परिवार के साथ एक सुखद जीवन बिताने के उद्देश्य से, उपलंचीवार जी अपने लिए एक आरामदायक आवास की तलाश में थे। उनका मकसद था कि वे अपनी बेटी के पास रह सकें और आराम से अपना जीवन बिता सकें।
उपलंचीवार जी ने अपनी जरूरतों और बजट के अनुसार फ्लैट की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें लक्ष्मीनगर क्षेत्र में स्थित एक आवासीय परियोजना का पता चला, जिसे बिल्डर श्रीनगर एम्प्रेस मिल हाउसिंग सोसाइटी के नाम से जाना जाता था। इस परियोजना का निर्माण जीबी रियल्टर्स नामक संस्था द्वारा किया गया था। प्रवीण जी ने इस परियोजना का निरीक्षण किया और छठी मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 602 को पसंद किया। यह फ्लैट उनके आवास की आवश्यकताओं के अनुरूप था और उन्होंने इस फ्लैट को अपने नए घर के रूप में चुन लिया।
बिक्री प्रक्रिया और भुगतान
प्रवीण उपलंचीवार ने इस फ्लैट के लिए 1 करोड़ रुपये का सौदा तय किया। खरीदारी के अगले कदम के रूप में, उन्होंने 1.51 लाख रुपये का बयाना राशि जमा कर फ्लैट को आरक्षित कर लिया। इसके बाद, उन्होंने किश्तों में कुल 94.51 लाख रुपये का भुगतान किया। इस पूरे लेनदेन के दौरान, दोनों पक्षों के बीच एक बिक्री अनुबंध भी किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि तीन वर्षों के भीतर उन्हें इस फ्लैट का कब्जा सौंप दिया जाएगा।
बिक्री अनुबंध के अनुसार, बिल्डर को निर्देशित किया गया था कि तीन वर्षों के भीतर फ्लैट का कब्जा देना अनिवार्य था। इस अवधि के दौरान, प्रवीण जी को यह उम्मीद थी कि उनके सपनों का घर जल्दी ही तैयार हो जाएगा और वे अपनी वृद्धावस्था में आराम से रह सकेंगे। लेकिन समय बीतने के बावजूद, उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया, और न ही उनके द्वारा जमा की गई राशि वापस मिली।
धोखाधड़ी का खुलासा
जांच में पाया गया कि बिल्डर ने इस फ्लैट का एक अलग विक्रेता कविता वर्मा के साथ भी बिक्री अनुबंध किया था। कविता वर्मा ने भी इसी 602 नंबर के फ्लैट के लिए बिल्डर से 31 लाख रुपये की राशि जमा कराई थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब फ्लैट का विज्ञापन प्रकाशित हुआ, जिसमें बताया गया कि इस फ्लैट का बिक्री का कार्य पूरा हो चुका है। इससे प्रवीण उपलंचीवार को पता चला कि उन्हें धोखा दिया गया है और उनके साथ हुई धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया।
प्रवीण जी ने इस धोखाधड़ी की जानकारी जब पुलिस को दी, तो बजाजनगर पुलिस थाना ने इस मामले में बिल्डर संतोषकुमार गंदेवार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। उन्होंने शिकायत में कहा कि न तो उन्हें फ्लैट का कब्जा मिला है और न ही उनकी जमा की गई रकम वापस की गई है। इस संदर्भ में पुलिस जांच कर रही है और मामले की विस्तृत छानबीन की जा रही है।
वर्तमान स्थिति और आगे की कार्यवाही
इस मामला में अभी तक की जांच में यह पता चला है कि बिल्डर ने धोखाधड़ी के मकसद से ही एक ही फ्लैट को दो व्यक्तियों के साथ बेचा। दोनों ने ही अलग-अलग रकम का भुगतान किया, लेकिन न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उनकी वित्तीय नुकसान की भरपाई हुई। पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा धोखाधड़ी में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास में लगी है।
यह मामला नागपुर में बिल्डर की धोखाधड़ी का एक कड़ा उदाहरण है, जो रियल एस्टेट सेक्टर में अवैध गतिविधियों और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को दर्शाता है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले पूरी तरह से जाँच पड़ताल कर लें, संबंधित दस्तावेजों की सत्यता और बिल्डर की विश्वसनीयता का परीक्षण करें। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए, उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और आवश्यक कानूनी सलाह लेने की आवश्यकता है।
























