ब्रिटेन में गधों को क्यों पहनाए जा रहे हैं पायजामे और लेगिंग्स? जानें वजह

गर्मियों का मौसम इंसानों के लिए तो परेशानी भरा होता है, लेकिन जानवरों के लिए कई बार यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ब्रिटेन में जैसे-जैसे तापमान का पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे वहां काटने वाले कीड़ों की बाढ़ सी आ जाती है।

ब्रिटेन में गधों को पहनाए जा रहे पायजामे, वजह बेहद खास

HIGHLIGHTS

  • गधों को क्यों पहनाए गए रंगीन पायजामे, वजह जानकर चौंकेंगे
  • इन गधों के पायजामे फैशन नहीं, जिंदगी बचाने का कवच
  • गधों के लिए बनाए खास पायजामे, जानिए कैसे बचाते हैं
  • पुराने इंसानी कपड़ों से बचाई जा रही गधों की जिंदगी

Know the secret of donkey’s pajamas: आपने अक्सर इंटरनेट पर जानवरों की तस्वीरें वायरल होते देखी होंगी, जहां उन्हें मजाकिया या फैशनेबल कपड़े पहनाकर फोटो खींची जाती है। लेकिन ब्रिटेन के एक अभयारण्य में गधों को रंग-बिरंगे पायजामे और लेगिंग्स पहनाने का मकसद किसी मजाक या फैशन से नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या के समाधान से जुड़ा है। जब आप इसके पीछे की असली वजह जानेंगे, तो आप भी इस अनोखी पहल के तारीफ़ करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।

गर्मी लाई अनोखी परेशानी

गर्मियों का मौसम इंसानों के लिए तो परेशानी भरा होता है, लेकिन जानवरों के लिए कई बार यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ब्रिटेन में जैसे-जैसे तापमान का पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे वहां काटने वाले कीड़ों की बाढ़ सी आ जाती है। सिडमाउथ स्थित ‘द डॉन्की सैंक्चुअरी’ में शरणार्थी और बचाए गए गधों के लिए यह मौसम काफी मुश्किलें खड़ी कर देता है।

इन कीड़ों के काटने से गधों की त्वचा पर भयंकर जलन, खुजली और दर्दनाक घाव बन जाते हैं। खासकर जो गधे बूढ़े हो चुके हैं या जिन्हें पहले किसी दुर्व्यवहार से बचाया गया है, उनकी त्वचा काफी कमजोर होती है और उनके घाव जल्दी ठीक नहीं हो पाते। ऐसे में संस्था के कर्मचारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए एक बेहद अनोखा और प्रभावी तरीका अपनाया।

मोजों से लेकर पायजामों तक का सफर

यह आइडिया एकदम से नहीं आया। शुरुआत में, कर्मचारियों ने सोचा कि क्यों न गधों के पैरों को कीड़ों से बचाने के लिए मोजे पहनाए जाएं। लेकिन यह तरीका फ्लॉप हो गया। गधे पूरे दिन खेतों में चरते हैं, दौड़ते हैं और इधर-उधर घूमते हैं, जिससे मोजे बार-बार नीचे गिर जाते थे।

इस असफलता के बाद टीम ने सोचा कि ऐसा कपड़ा क्यों नहीं इस्तेमाल किया जाए जो कमर से कसकर बंधा रहे। फिर उन्होंने इंसानों के ढीले-ढाले पायजामे, लेगिंग्स और मैटरनिटी ट्राउजर का इस्तेमाल शुरू किया। ये कपड़े पहले जैसे नहीं गिरते थे और गधों की हर तरह की शारीरिक गतिविधि में बाधा भी नहीं बनते थे। आज इस संस्था में करीब 40 गधे इन कपड़ों में नजर आते हैं।

क्या है ‘डॉन-गेरी’ (Don-gerie)?

गधों के लिए बनाए गए इन खास कपड़ों को एक प्यारा नाम दिया गया है – ‘डॉन-गेरी’। यह नाम अंग्रेजी के दो शब्दों ‘डॉन्की’ (Donkey – गधा) और ‘डंगरी’ (Dungaree – कपड़ा) को मिलाकर बनाया गया है।

हर गधे के शरीर के आकार के अनुसार इन कपड़ों को कस्टमाइज किया जाता है, ताकि उन्हें पहनने में कोई असुविधा न हो। इनका फैब्रिक काफी हल्का और एयरी होता है, जो एक तरह से गधों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है। संस्था के मुताबिक, कीड़े भगाने वाले केमिकल स्प्रे का असर कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है, लेकिन ये कपड़े 24 घंटे शारीरिक बाधा बनकर गधों को पूरी सुरक्षा प्रदान करते हैं।

पुराने कपड़ों को मिल रहा नया जीवन

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ जानवरों को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचा रही है। संस्था ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बेकार पड़े हुए, ढीले पायजामे, लेगिंग्स और ट्राउजर उन्हें दान कर दें। जो कपड़े एक वक्त पर कचरे के ढेर में जाने वाले थे, वे आज बेजुबान जानवरों की जान बचाने का काम कर रहे हैं।

यूनिवर्सिटी ने भी निभाई अनोखी भूमिका

इस मुहिम को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है। स्कॉटलैंड की प्रतिष्ठित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज’ (University of St Andrews) के छात्रों ने भी इसमें हाथ बंटाया है। यूनिवर्सिटी के ‘री-यूज शॉप’ के जरिए छात्रों ने ऐसे पुराने कपड़े इकट्ठा किए, जिन्हें दुकान पर बेचना संभव नहीं था। ये कपड़े लगभग 500 मील दूर स्थित डेवोन (Devon) के इस अभयारण्य तक पहुंचाए गए, जहां उन्हें ‘डॉन-गेरी’ में बदल दिया गया।

समझदारी और संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण

साल 1969 में स्थापित ‘द डॉन्की सैंक्चुअरी’ दुनिया भर में गधों के उद्धार और उनकी देखभाल के लिए काम करता है। गधों को पायजामे पहनाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जरूर हंसी-मजाक का कारण बन सकती हैं, लेकिन इसके पीछे की सोच बेहद गंभीर और सराहनीय है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि कई बार महंगी तकनीकों या रासायनिक उपचारों से बेहतर समाधान हमारे आसपास ही मौजूद होते हैं। बस जरूरत है थोड़ी सी संवेदनशीलता, जानवरों के प्रति प्यार और समस्या को समझने की इच्छा की। आज ये गधे बिना किसी दर्द के खुले मैदानों में आज़ादी से घूम रहे हैं, और इसका पूरा श्रेय जाता है इन ‘खास पायजामों’ को बनाने वाले उन समझदार इंसानों को, जिन्होंने मजाकिया आइडिया को जानबूझकर जीवन बचाने वाला कवच बना दिया।

Sandhya Samay News

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