Bihar News: देश में बढ़ती महंगाई के दौर में आम आदमी को एक बार फिर झटका लगा है। महंगाई की मार से पहले ही बेहाल जनता के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले 10 दिनों के दौरान यह चौथा मौका है जब तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं। सोमवार सुबह 6 बजे से लागू इस बढ़ोतरी ने पटना सहित पूरे बिहार में हड़कंप मचा दिया है। राजधानी पटना में पेट्रोल की कीमत 113.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.39 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि एनडीए के सहयोगी दल जेडीयू ने भी अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी के लिए परेशानी बढ़ाने वाले बयान दिए हैं।
सांसद पप्पू यादव ने तो इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए एक तीखा पोस्ट करते हुए पीएम मोदी पर तंज कसा है। पप्पू यादव ने लिखा, “लगभग तीन रुपये डीजल-पेट्रोल का दाम फिर बढ़ाया गया है। बंगाल चुनाव के बाद अबतक करीब आठ रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ा चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह अभी शुरुआत है।
पप्पू यादव का ‘मेलोनी’ वाला तंज
पप्पू यादव ने अपने बयान में एक शब्द ‘मेलोनी’ का इस्तेमाल किया है, जिसे लेकर काफी चर्चा हो रही है। उन्होंने लिखा, “यह तो अभी शुरुआत है, मेलोनी को मेलोडी बांटेंगे और देश के साथ ट्रेजेडी कर जनता की जेब काटेंगे!” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘मेलोनी’ के जरिए पप्पू यादव इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निशाना साध रहे हैं। वे यह इशारा करना चाहते हैं कि सरकार विदेशों में दोस्ती निभाने (मेलोडी बांटने) में लगी है, जबकि देश में जनता ट्रेजेडी (त्रासदी) झेल रही है।
पप्पू यादव ने अपने पोस्ट में कटाक्ष करते हुए आगे लिखा, “जनता जिमखाना क्लब बंद होने पर ताली पीटेगी! आ गए न अच्छे दिन।” उनका यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी के ‘अच्छे दिन’ के नारे पर कटाक्ष है। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि जब जनता की परेशानियां बढ़ेंगी और उनका जीना मुहाल होगा, तो वही जनता इस सरकार को सबक सिखाएगी।
जेडीयू ने मांगा सहयोग, बचाई सरकार की किरकिरी
वहीं, बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस मुद्दे पर एक अलग ही रुख अपनाया है। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर सियासत करने से इनकार करते हुए एक तर्कपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। नीरज कुमार ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर दाम बढ़ने के बाद राजनीतिक टिप्पणियां आ रही हैं, लेकिन हमें इससे गुरेज नहीं है। उन्होंने कहा, “लेकिन इस सच को क्यों नकारा जा रहा है कि हम पेट्रोलियम आयात करते हैं, स्वयं उत्पादन नहीं करते।”
जेडीयू प्रवक्ता ने वैश्विक परिदृश्य को आधार बनाते हुए कहा, “पश्चिमी एशिया में संकट है। वैश्विक स्तर पर संकट है। मानवता एक संकट से जूझ रही है।” उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि ऐसी स्थिति में आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय देश के सामने खड़ी इन चुनौतियों का सामना किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरा अनुरोध है कि देश पेट्रोलियम उत्पादों में जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसमें सहयोग का वातावरण बनाइए।” जेडीयू का यह रुख बीजेपी के लिए थोड़ी राहत भरा हो सकता है, क्योंकि जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं सहयोगी दल तर्कों के साथ सरकार का साथ देता नजर आ रहा है।
आरजेडी ने केंद्र को घेरा, कहा- ‘गरीबों की थाली खाली’
जहां जेडीयू ने तर्क का सहारा लिया, वहीं बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर जनता को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा, “आज फिर दाम में बढ़ोतरी कर दी गई। आखिर यह महंगाई कहां तक जाएगी, ये बीजेपी को बताना होगा।”
मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जनता का जीना दुर्लभ कर दिया है। उन्होंने कहा, “गरीबों की थाली खाली हो गई है।” आरजेडी नेता ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को आम जीवन के अन्य क्षेत्रों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, “दूध की कीमत बढ़ गई है। खाद्य पदार्थों की कीमत आसमान छू रही है।” यानी, सिर्फ सवारी महंगी नहीं हुई है, बल्कि रसोई घर का सामान भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
जनता पर दोहरी मार
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ रहा है। परिवहन खर्च बढ़ने से सब्जियों और फलों की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। ट्रांसपोर्टर्स भी अपना भाड़ा बढ़ा रहे हैं, जिसका खामियाजा उपभोक्ता को चुकाना पड़ रहा है। बिहार जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और मध्यमवर्गीय परिवारों की संख्या काफी है, यह महंगाई एक बड़ी चुनौती बन गई है।
अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस बढ़ती महंगाई पर क्या रुख अपनाती है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाने की कोशिश में जुट गया है, जबकि सत्ता पक्ष वैश्विक कारणों का हवाला देकर अपना पक्ष रख रहा है। लेकिन, जनता की जेब पर इस बढ़ती बोझ का असर आने वाले समय में राजनीति पर दिखाई देगा, यह तय है।























