Bihar News: बिहार एमएलसी चुनाव की सियासत में अब बड़ा ट्विस्ट आ गया है। राज्य में विधान परिषद की आठ सीटों — चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों — पर होने जा रहे चुनाव से पहले उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के तीन विधायक अपने ही नेता से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के साथ खड़े हो गए हैं। इस बागी सुर पर अब आरजेडी की तरफ से बयान आ चुका है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा पर सीधा तंज कसा गया है।
कौन हैं बागी विधायक, किसे दे रहे समर्थन?
बिहार में आठ सीटों पर MLC का चुनाव होना है, जिनमें चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इसी बीच उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM के तीन विधायक — माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह — बागी हो गए हैं। ये तीनों सारण निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए की ओर से बने प्रत्याशी की जगह निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा को समर्थन दे रहे हैं।
बीते सोमवार को रामपुकार सिन्हा ने अपना नामांकन भी दाखिल किया, जिस मौके पर ये तीनों विधायक उनके साथ मौजूद रहे। गौरतलब है कि सारण सीट पर जेडीयू के पुष्कर आनंद मैदान में हैं। ऐसे में बागी विधायकों के इस रुख को एनडीए के भीतर बन रही असहजता के तौर पर देखा जा रहा है।
‘RLM में कोई ऐसा नहीं जो उपेंद्र कुशवाहा को नेता मानता है’
आज मंगलवार (6 अक्टूबर, 2026) को आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने MLC चुनाव में RLM विधायकों के बागी सुर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “…अरे उनका अपना मामला है… RLM में कोई ऐसा नहीं है जो उपेंद्र कुशवाहा को नेता मानता है।”
आरजेडी विधायक के इस बयान को उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। खासकर तब, जब उनके ही पार्टी विधायक चुनाव के मौके पर एनडीए की रणनीति से अलग रास्ता चुनने में कोई झिझक नहीं दिखा रहे हैं।
‘अपने बेटे और पत्नी के लिए करते हैं राजनीति’
भाई वीरेंद्र ने आगे निशाना साधते हुए कहा कि “…उपेंद्र कुशवाहा को लोग जान गए हैं कि वो अपने बेटे और पत्नी के लिए राजनीति करते हैं, अपने लिए राजनीति करते हैं, इसलिए सब लोगों ने अपना मोर्चा संभाल लिया… उनका अपना अंदरूनी मामला है।”
आरजेडी विधायक का यह बयान बताता है कि वे RLM में चल रहे अंतर-कलह को उपेंद्र कुशवाहा की पारिवारिक राजनीति से जोड़कर परख रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी के लोग अब अपनी-अपनी स्थिति समझ चुके हैं और इसी वजह से अलग-अलग राह चुन रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी दिया विवादित बयान
इसी बातचीत के दौरान भाई वीरेंद्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर आक्रामक अंदाज में कहा कि “चुनाव आयुक्त तो हटाना ही चाहिए। मैंने आप लोगों के माध्यम से कहा था कि ज्ञानेश कुमार जैसे लोकतंत्र के हत्यारे, अगर रहेंगे… तो वैसे लोगों को पद से पदमुक्त करना चाहिए और उनको फांसी के तख्ते पर लटकाना चाहिए, जितना उन्होंने गलत काम किया है।”
अपनी तरह का यह बेहद तीखा बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन सकता है और आने वाले दौर में आरजेडी पर बढ़ता विरोध भी देखा जा सकता है।
8 अक्टूबर को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लोकभवन मार्च
आरजेडी अब 8 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राज्यपाल के समक्ष लोकभवन मार्च करने की तैयारी में है। इस कार्यक्रम पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि “…जो कार्यक्रम बना है, देश में बड़ी ही भयावह स्थिति है… जो संवैधानिक पद पर बैठे लोग हैं, वे सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। अब संवैधानिक पद की गरिमा को लोगों ने खो दिया है, इसलिए हम लोग राज्यपाल के यहां तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विधानमंडल के सभी सदस्य और सांसद मार्च करेंगे और मेमोरेंडम देने का काम करेंगे।”
उनके मुताबिक यह मार्च संवैधानिक पदों की बदलती गरिमा के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन होगा, जिसमें विधानमंडल और संसद के सदस्यों को शामिल करने की तैयारी है।
बागी सुर क्या संदेश देते हैं? — राजनीतिक असर
चुनाव के मौके पर पार्टी के अपने ही विधायकों का अलग रास्ता चुनना किसी भी नेता के लिए बड़ी चुनौती है। उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह बगावत साफ संकेत देती है कि RLM के भीतर असंतोष मौजूद है। दूसरी ओर, एनडीए के भीतर की इस दरार को आरजेडी के लिए बना मौका माना जा रहा है, जो भाई वीरेंद्र के आक्रामक बयान में भी झलक रहा है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या RLM इन विधायकों पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई की राह पर चलती है। अब सारण समेत आठ सीटों के नतीजे तय करेंगे कि बगावत का यह तालमेल निर्दलीय प्रत्याशी को कितना फायदा देता है और पुष्कर आनंद की जीत की राह में अड़चन बनता है या नहीं।

























