पटना में परीक्षा रद्द होते ही सड़क पर उतरे अभ्यर्थी

पटना में दारोगा मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान लाठीचार्ज हुआ।

फिजिकल की तैयारी के बीच परीक्षा रद्द, अभ्यर्थी नाराज

HIGHLIGHTS

  • रिजल्ट के बाद परीक्षा रद्द, अभ्यर्थियों का गुस्सा
  • जेपी गोलंबर पर भिड़े दारोगा अभ्यर्थी और पुलिस
  • बैरिकेड तोड़ने बढ़े अभ्यर्थी, पुलिस ने बरसाईं लाठियां
  • दारोगा भर्ती रद्द करने पर पटना में प्रदर्शन

पटना में दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों का प्रदर्शन हुआ। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जेपी गोलंबर के पास जुटे। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। इस दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

यह भर्ती परीक्षा 1,799 पदों के लिए आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित हो चुका था। हालांकि, परीक्षा में कथित धांधली की शिकायतें मिलने के बाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों में नाराजगी है, जिन्होंने परीक्षा पास कर आगे की चयन प्रक्रिया के लिए तैयारी शुरू कर दी थी।

जेपी गोलंबर के पास जुटे अभ्यर्थी

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर पटना के जेपी गोलंबर के पास जमा हुए। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ता रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई थी।

अभ्यर्थियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं और आयोग को परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा रद्द करने के कारणों और आगे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि परिणाम जारी होने के बाद अचानक परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों की मेहनत और तैयारी पर असर पड़ा है।

मौर्य लोक की ओर बढ़ने की कोशिश

प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने मौर्य लोक की ओर आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने या तोड़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोकती रही।

स्थिति को काबू में करने के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया। घटनास्थल पर अभ्यर्थियों की बड़ी भीड़ मौजूद थी। प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई से इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभ्यर्थियों की मुख्य मांग परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने की थी।

पोस्टरों के जरिए जताई नाराजगी

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों के हाथों में पोस्टर भी दिखाई दिए। कुछ पोस्टरों पर आयोग के खिलाफ नारे लिखे थे, जिनमें “एक सुट्टा, दो चाय, BPSSC हाय-हाय” और “दो कचौड़ी, एक समोसा, BPSSC का क्या भरोसा” जैसे व्यंग्यात्मक संदेश शामिल थे। इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने आयोग के फैसले पर अपना असंतोष जाहिर किया।

अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने भर्ती परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी। मुख्य परीक्षा में सफल होने के बाद वे शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी में जुट गए थे। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उनका मनोबल प्रभावित हुआ है। उनका तर्क है कि यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आई है, तो आयोग को उसकी जानकारी और आगे की कार्रवाई स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।

परीक्षा रद्द होने के फैसले पर अभ्यर्थियों की मांग

दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला कथित धांधली की शिकायतों के बाद लिया गया। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद परीक्षा रद्द करने से उन उम्मीदवारों को नुकसान हुआ है, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की। वे चाहते हैं कि आयोग मामले की जांच और भर्ती प्रक्रिया के भविष्य को लेकर पारदर्शी जानकारी दे।

फिलहाल अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और भर्ती से जुड़ी आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, शिकायतों की जांच और अभ्यर्थियों को समय पर जानकारी देने की जरूरत को सामने ला दिया है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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