Bihar News: बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप, थर्मल पावर प्लांट और दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा गरमा रहा है। किसान नेता राकेश टिकैत ने पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसान विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जमीन का अधिग्रहण पुराने या कम मूल्य पर स्वीकार नहीं करेंगे। टिकैत ने सरकार से भूमि अधिग्रहण कानून का पालन करने और किसानों को मौजूदा बाजार मूल्य के मुताबिक उचित मुआवजा देने की मांग की।
टिकैत ने चेतावनी दी कि जमीन की कीमत तय किए बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो बिहार में किसान आंदोलन तेज हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन का “एक इंच” भी नहीं देंगे, यदि उन्हें उचित कीमत और कानूनी अधिकार नहीं मिले।
पुराने रेट पर जमीन लेने का विरोध
राकेश टिकैत के मुताबिक, सरकार स्मार्ट सिटी और सैटेलाइट सिटी जैसी बड़ी परियोजनाओं की बात करती है, लेकिन जमीन का मूल्य तय करते समय किसानों के हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण में लगने वाला लोहा, स्टील, मशीनरी, मजदूरी और अन्य सामग्री मौजूदा बाजार भाव पर खरीदी जाती है, तो किसानों की जमीन पुराने रेट पर क्यों ली जाए?
उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी पुराने मूल्य को आधार बनाकर जमीन लेना चाहती है, तो उसी समय की दूसरी वस्तुओं की कीमतों से उसकी तुलना भी होनी चाहिए। टिकैत ने सर्किल रेट बढ़ाने और जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का निष्पक्ष आकलन करने की मांग की। उनके अनुसार, मुआवजे की रकम तय करने से पहले जमीन की मौजूदा कीमत और उस पर निर्भर किसानों की आजीविका को भी समझना चाहिए।
भूमि अधिग्रहण कानून के पालन की मांग
टिकैत ने कहा कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा कानून और जमीन के वास्तविक मूल्य के अनुरूप होना चाहिए। उनका तर्क है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के अधिकार और सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए जमीन लेने से पहले प्रभावित लोगों के साथ स्पष्ट बातचीत होनी चाहिए और मूल्यांकन पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने 70 प्रतिशत किसानों की सहमति और शेष जमीन के अधिग्रहण से जुड़े प्रावधान पर भी सवाल उठाए। टिकैत के अनुसार, सहमति की स्थिति जो भी हो, किसानों को पहले उचित कीमत मिलनी चाहिए। अधिग्रहण के नियमों को लागू करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसानों पर अनुचित दबाव न बने।
ग्रामसभा की जमीन का पैसा गांव के विकास में लगे
किसान नेता ने ग्रामसभा या गांव समाज की जमीन के अधिग्रहण से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल को लेकर भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि ऐसी जमीन के बदले मिलने वाली पूरी राशि ग्रामसभा के खाते में जमा होनी चाहिए और गांव के विकास पर ही खर्च की जानी चाहिए।
टिकैत ने इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रावधान बनाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, ग्रामसभा की जमीन के मुआवजे का उपयोग गांव के बाहर या किसी दूसरे उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए। इससे स्थानीय समुदाय को जमीन जाने के बदले विकास का सीधा लाभ मिल सकेगा।
गांवों पर असर और कंपनियों को लाभ पहुंचने की आशंका
बिहार में बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण की योजनाओं को लेकर टिकैत ने आशंका जताई कि कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीन लेने से स्थानीय लोगों की आजीविका और बसावट पर असर पड़ सकता है, जबकि इसका फायदा बड़ी कंपनियों को मिल सकता है।
उन्होंने सरकार पर कंपनियों और धनपतियों के हित में काम करने का आरोप भी लगाया। टिकैत ने कहा कि जमीन, रोजगार और किसानों के अधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, जाति, धर्म और भाषा के आधार पर लोगों को बांटने के बजाय सरकार को किसानों और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। ये आरोप टिकैत ने अपनी बातचीत में लगाए; सरकार की ओर से इन दावों पर प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया।
नवादा और खगड़िया में किसान पंचायत
टिकैत ने बताया कि जमीन के मुद्दे पर बिहार में किसान आंदोलन को मजबूत करने की तैयारी है। उन्होंने नवादा में महापंचायत और खगड़िया में किसान पंचायत आयोजित करने की बात कही। स्थानीय किसान कमेटियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पटना में आंदोलन या घेराव की संभावना पर उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर किसानों को यहां भी जुटाया जा सकता है। हालांकि, इस बारे में अंतिम फैसला स्थानीय आंदोलन समिति करेगी। टिकैत ने यह भी बताया कि 26 नवंबर को दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह तारीख किसान आंदोलन की शुरुआत से जुड़ी है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत के अनुसार बिहार में भी प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

























