Bharat Tiwari Encounter Mahapanchayat: बिहार के भोजपुर जिले से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में स्थानीय लोगों का आक्रोश सीएम सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद तीखा दिखा। भोजपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का आक्रोश सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
महापंचायत में उबला जनादेश
बिलौटी गांव का माहौल अजा बुधवार को किसी युद्ध स्थल से कम नहीं था। भरत तिवारी की मौत को लेकर आक्रोशित भीड़ ने एक स्वर में “भरत तिवारी अमर रहे” के नारे लगाए। लेकिन, इन नारों के बीच-बीच में सीएम सम्राट चौधरी और भोजपुर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। आक्रोशित लोगों ने सरकार पर न्याय के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए सीएम सम्राट चौधरी से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
महापंचायत का यह आयोजन सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। बिहार के विभिन्न जिलों से लेकर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के भी लोग भारी संख्या में इस महापंचायत में शामिल होने पहुंचे। समय बीतने के साथ भीड़ का आकार बढ़ता ही गया, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी चौकन्ना दिखा।
प्रशांत किशोर की मौजूदगी
इस महापंचायत को राजनीतिक और सामाजिक तौर पर भारी वजन तब मिला, जब जन सुराज पार्टी के संस्थापक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) मौके पर पहुंचे। प्रशांत किशोर ने सीधे महापंचायत में शामिल होने से पहले भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की और उन्हें संवेदना व्यक्त की।
प्रशांत किशोर का इस मामले में उतरना कई मायनों में खास माना जा रहा है। उनकी मौजूदगी ने इस एनकाउंटर को एक स्थानीय मुद्दे से उठाकर राज्य स्तरीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि जन सुराज पार्टी इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ जमीनी स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है।

मां की शिकायत पर पुलिस पर केस
भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला तब तूल पकड़ा, जब मुठभेड़ से पहले का एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो ने पुलिस के ‘फेक एनकाउंटर’ के दावों को धाराशायी कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद भरत तिवारी की मां ने स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
मां की शिकायत के आधार पर एनकाउंटर में शामिल पूरी पुलिस टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, एनकाउंटर के समय मौजूद कई पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जबकि कुछ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर इन पुलिसवालों की गिरफ्तारी भी हो सकती है, जिसकी तलवार इस समय उनके सिर पर लटक रही है।
सरकार चौतरफा घिरी
भरत तिवारी का मामला अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्यायिक और मानवाधिकार संस्थाओं में भी पहुंच गया है। मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन से पूरे घटनाक्रम का विस्तृत जवाब मांगा है। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में भी इस एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है।
सड़क पर विपक्ष के हमलों और अदालतों में याचिकाओं के बीच सम्राट चौधरी सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। बचाव के लिए सीएम ने हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से इस मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की थी। लेकिन, भरत तिवारी के परिवार ने सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया है। परिवार का साफ कहना है कि वे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी भी अधिकारी पर भरोसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं है।
एमडीए गठबंधन में भीद, अपने ही मंत्री नाराज
इस पूरे घटनाक्रम से सबसे ज्यादा नुकसान सियासी तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को उठाना पड़ रहा है। विपक्ष (RJD, कांग्रेस, लेफ्ट) तो सरकार को घेरने में लगा ही है, लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि एनकाउंटर को लेकर उनके अपने एमडीए के नेता भी भड़के हुए हैं।
भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कई मंत्री और विधायक इस एनकाउंटर के तरीके को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं। गठबंधन के भीतर से नाराजगी भड़कने का मतलब है कि सीएम सम्राट चौधरी के लिए यह मामला ‘मैनेजमेंट’ करना अब और भी मुश्किल हो गया है।






















