संध्या समय न्यूज
दिल्ली एक्साइज पॉलिसी (आबकारी नीति) कांड में एक बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में आप पार्टी के दो बड़े नेताओं—पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब दिल्ली की राजनीति लंबे समय से इस मुद्दे के कारण गर्माई हुई थी और दोनों नेताओं को जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ा था।
कोर्ट का फैसला और राहत की खबर
बता दें कि अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया। यह फैसला आम आदमी पार्टी के लिए काफी बड़ी राहत साबित हुआ है। जब यह मामला सामने आया था, तब केजरीवाल ने साफ शब्दों में कहा था कि ऐसा कोई शराब घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और साजिश का हिस्सा बताया था। अब कोर्ट के इस फैसले ने उनके इन दावों को बल दिया है।
जाने क्या था पूरा मामला?
बता दें कि पूरा मामला नवंबर 2021 का है, जब दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति (Excise Policy) लागू की थी। इस नीति को लेकर सरकार का दावा था कि इससे राजस्व में वृद्धि होगी। हालांकि, इसके विपरीत यह नीति विवादों में घिर गई। साल भर भी नहीं बीता था कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आने लगे।
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आरोप और जांच का दौर
विपक्षी दल भाजपा ने इस नीति पर तीखा हमला किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि शराब ठेकों (Liquor Licenses) को लेकर बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और चुनिंदा डीलर्स को फायदा पहुंचाया गया। जुलाई 2022 तक आते-आते मामला इतना गंभीर हो गया कि दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांग ली। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) ने मामले की जांच शुरू कर दी, जिसमें कई बड़ी गिरफ्तारियां हुईं और दिल्ली की राजनीति में हलचल मच गई।
सत्ता से जेल तक का सफर
इस मामले के चलते दिल्ली के तत्कालीन डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और सीएम अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था। सत्ता में रहते हुए दोनों नेताओं को जेल जाना पड़ा, जिससे राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था। दोनों नेताओं ने लगातार इसे राजनीतिक साजिश बताया था।
वर्तमान स्थिति
अब राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले के साथ ही इस मामले में एक नया मोड़ आया है। अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी कर दिया जाना, दिल्ली की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले के बाद राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ता है।




















