कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
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‘कॉकरोच’ व्यंग्य से जन्मी राजनीतिक पहचान

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक इस पहल के पीछे एक गहरा दर्शन छिपा है। कॉकरोच पृथ्वी पर सबसे पुराना और सबसे मजबूत जीव है। वह कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। उसे खत्म करने के लिए जहरीली दवाइयां, प्रौद्योगिकी और विज्ञापनों का दौर चलता रहता है, लेकिन वह टिका रहता है।

न्यायपालिका टिप्पणी पर बहस

HIGHLIGHTS

  • कॉकरोच जनता पार्टी का उदय
  • युवाओं के असंतोष का नया प्रतीक
  • सोशल मीडिया से शुरू हुआ आंदोलन
  • बेरोजगारी पर युवाओं का आक्रोश
  • सिस्टम पर तीखा प्रहार

The Controversy Stemming from the Word “Cockroach”News: आज देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक अद्भुत और चौंकाने वाली घटना घटित हुई है, जिसे शुरू में मज़ाक या सस्ती व्यंग्य के रूप में खारिज किया जा सकता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह भारत के वर्तमान युवा आक्रोष का सबसे कड़वा और सच्चा प्रतीक है। हम बात कर रहे हैं ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की। इस पार्टी की स्थापना और इसे मिल रही लहरों तरंगे साबित करती हैं कि जब व्यवस्था युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश करती है, उन्हें अपमानित करती है, तो वे उसी अपमान को हथियार बनाकर व्यवस्था को चुनौती देने के लिए खड़े हो जाते हैं। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने की टिप्पणी ने जो आग लगाई है, वह अब एक व्यवस्थित आंदोलन का रूप ले चुकी है।

‘कॉकरोच’ कहकर संबोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं में हर चुनौती से लड़ने की ताकत होती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस ताकत को सिर्फ सीमाओं पर दुश्मन से लड़ने के लिए ही प्रोत्साहित किया जाएगा, जैसा कि ‘अग्निवीर’ योजना के तहत हो रहा है, या उनकी आंतरिक आवाज़ को भी सुना जाएगा? जब देश का सर्वोच्च न्यायिक पद संभालने वाला व्यक्ति, जिस पर न्याय की अंतिम आस टिकी होती है, उन युवाओं को जो देश की रीढ़ हैं, ‘कॉकरोच’ कहकर संबोधित करता है, तो यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरी सोच का प्रतिबिंब है जो युवाओं की समस्याओं को बेमतलब और उन्हें परेशानी का कारण मानती है। लेकिन, इतिहास गवाह है कि जब अपमान का जहर इतना गहरा घुल जाता है, तो व्यक्ति उस अपमान को ही अपनी पहचान बना लेता है। यही वजह है कि दो पैर, एक दिमाग और दिल रखने वाले इन ‘कॉकरोचों’ ने अपनी पार्टी बना ली है।

कॉकरोच पृथ्वी पर सबसे पुराना

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक इस पहल के पीछे एक गहरा दर्शन छिपा है। कॉकरोच पृथ्वी पर सबसे पुराना और सबसे मजबूत जीव है। वह कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। उसे खत्म करने के लिए जहरीली दवाइयां, प्रौद्योगिकी और विज्ञापनों का दौर चलता रहता है, लेकिन वह टिका रहता है। यही भारतीय युवाओं की आज की स्थिति का प्रतीक है। बेरोजगारी, पेपर लीक, साक्षात्कार में भ्रष्टाचार, और शिक्षा व्यवस्था की लाचारी—ये वे जहर हैं जो इस व्यवस्था ने युवाओं पर फेंके हैं। फिर भी युवा टिका है। वह नौकरी की कतारों में चप्पलें घिसता है, हारता है, फिर खड़ा होता है। यह आलसी नहीं है; अगर आलसी होता तो शायद आत्महत्या कर लेता या देश छोड़ देता। लेकिन वह लड़ रहा है। और अब वह लड़ाई एक नए स्वरूप में सामने आई है—व्यंग्य के माध्यम से।

‘गोएबल्स’ शैली में प्रोपेगैंडा

सोशल मीडिया के इस दौर में, जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह साइबर सैनिकों को विरोधियों पर हमला करने और ‘गोएबल्स’ शैली में प्रोपेगैंडा फैलाने की ट्रेनिंग देते हैं, वहीं दूसरी ओर यह नई पीढ़ी उसी सोशल मीडिया का उपयोग अपनी बात रखने के लिए कर रही है। 30 वर्षीय अभिजीत दीपके, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र हैं, ने जिस तरह से इस पार्टी की नींव रखी, उसने सत्ता के गले की नस खींच दी है। मात्र दो दिनों में लाखों युवाओं का एकजुट होना यह साबित करता है कि जमीनी हकीकत कितनी भयावह है। यह पार्टी वर्चुअल दुनिया में है, लेकिन इसका असर वास्तविक है। सरकार का इस पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट को तुरंत बैन कर देना, यह दर्शाता है कि ‘डर’ सत्ता के गले में बैठ चुका है।

‘कॉकरोच’ से डर गई?

यह डर अजीब है। दुनिया की महानता और शक्ति का दावा करने वाली सरकार जो नक्सलवादियों से लेकर आतंकवादियों तक से निपटने का दावा करती है, वह ‘कॉकरोच’ से डर गई? वह नॉर्वे की महिला पत्रकार हेले लेंग से डरती है, एपस्टीन के नाम से सहम जाती है और अब कुछ युवाओं द्वारा बनाई गई एक मज़ाकिया पार्टी से खौफ खा रही है। यह उस व्यवस्था की कमजोरी का प्रमाण है जो अपनी आलोचना सहन नहीं कर सकती। जो सरकार कॉकरोच से डरती है, वह शासन करने की योग्यता खो चुकी है। कॉकरोच इसलिए नहीं मरता क्योंकि वह जीवन के लिए संघर्ष करना जानता है। वह परजीवी नहीं है, जबकि यह सरकारी तंत्र अपनी गलतियों को छिपाने के लिए विपक्ष को दबाने और नागरिकों को अंधभक्त बनाने का परजीवी रवैया अपना रहा है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बेरोजगार युवाओं की आवाज’।

इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की सबसे बड़ी ताकत इसका नारा है—‘आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज’। यह नारा उन लाखों युवाओं की आवाज है जिनकी डिग्रियां अलमारियों में धूल खा रही हैं, जिनके सपनों को कागज लीक और भर्ती घोटालों ने तोड़ दिया है। विपक्षी दलों, चाहे वह कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, इन युवाओं को दिशा देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। कभी इन पार्टियों में भी क्रांतिकारी जोश हुआ करता था, लेकिन अब वे भी व्यवस्था के गिर्द कई दलों के समूह में बदल कर रह गई हैं या फिर सत्ता के डर के कारण असमर्थ हो चुकी हैं। ऐसे में, जब संविधान, लोकतंत्र और जनता की भावनाओं का मोल नहीं रह जाता, तो व्यंग्य ही एकमात्र ऐसा हथियार बचता है जो सत्ता के घमंड को ठेस पहुंचा सकता है।

इतिहास गवाह है कि व्यंग्य ने कई तानाशाहों को ढहाया है। बालासाहेब ठाकरे ने अपने व्यंग्यचित्रों से व्यवस्था को हिला दिया था। आज ‘सीजेपी’ डिजिटल युग का वही व्यंग्य है। यह सिर्फ एक पार्टी नहीं है, बल्कि एक आंदोलन है। यह उन सभी का मंच है जिन्हें वैचारिक रूप से पंगु बना दिया गया है, जिनके माथे पर तिलक लगाकर उन्हें धर्मांत बनाने की कोशिश की गई है, जिनके कंधों पर केशरिया गमछा डालकर उनके दिमाग पर कब्ज़ा करने की कोशिश हुई है। लेकिन अब ये ‘कॉकरोच’ जाग चुके हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी का भविष्य उज्ज्वल

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि कॉकरोच जनता पार्टी का भविष्य उज्ज्वल है, क्योंकि यह जमीनी हकीकत पर टिका है। इस पार्टी ने जो प्रतीक चिह्न चुना है—‘कॉकरोच’—और जो संदेश दिया है—‘हां, हम कॉकरोच हैं। तुम हमें मारोगे, हम फिर वापस आएंगे। हम अमर हैं’, यह सत्ता के लिए एक चेतावनी है। यह एक व्यंग्यात्मक विद्रोह है, लेकिन इसके पीछे का दर्द असली है। भारतीय युवाओं को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का आभार मानना चाहिए कि उन्होंने उन्हें एक ऐसी पहचान दी, जिसे मिटाया नहीं जा सकता। यह बगावत अब शुरू हो चुकी है और जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, जब तक युवाओं को उनका हक नहीं मिलता, तब तक ये कॉकरोच सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह व्यवस्था को याद दिलाते रहेंगे कि अहंकार का अंत उसी वक्त होता है, जब ‘सूर्य’ (सूर्यकांत) की किरणों में छिपे कीड़े-पतंगे बाहर निकल आते हैं और अपनी अस्मिता की लड़ाई लड़ने लगते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी की विजय हो, यह उन युवाओं की जीत होगी जो अब और अपमान सहन नहीं करना चाहते। यह एक नई क्रांति की शुरुआत है—एक ऐसी क्रांति की जिसमें हथियार नहीं, बल्कि हास्य और व्यंग्य है, और जो शक्तिशाली सत्ता को सबक सिखाने के लिए काफी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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