US-Iran War: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले राजस्थान के पचपदरा में एचपीसीएल (HPCL) रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने सिर्फ एक प्रोजेक्ट की राह में बाधा ही नहीं डाली, बल्कि एक बड़े वैश्विक रहस्य को भी सामने ला खड़ा किया है। पिछले डेढ़-दो महीनों में भारत समेत दुनिया के कम से कम 6 देशों की तेल रिफाइनरियों और ऑयल एसेट्स में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सिर्फ तकनीकी खामियां हैं या फिर वैश्विक तेल राजनीति का एक साजिशपूर्ण ‘पैटर्न’?
पचपदरा से लेकर अमेरिका तक, आग का सिलसिला
करीब 13 साल पहले स्वीकृत पचपदरा रिफाइनरी (बालोतरा, राजस्थान) में मंगलवार को उद्घाटन से पहले ही मेन प्रोसेसिंग यूनिट में आग लग गई। आधिकारिक जांच में इसे हीट एक्सचेंजर सर्किट से हाइड्रोकार्बन लीक होने का मामला बताया गया है, लेकिन यह अकेली घटना नहीं है।

अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर आग के हमलों का एक खौफनाक क्रम देखने को मिला है:
- अमेरिका: टेक्सास में 23 मार्च को वैलेरो एनर्जी के पोर्ट आर्थर प्लांट में विस्फोट और 10 अप्रैल को मैराथन पेट्रोलियम की एल पासो रिफाइनरी में आग।
- भारत: 12 अप्रैल को मुंबई हाई सी में ONGC के प्लेटफॉर्म पर आग और 20 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी में आग।
- ऑस्ट्रेलिया: 16 अप्रैल को विवा एनर्जी की कोरियो ऑयल रिफाइनरी (मेलबर्न) में आग, जिससे देश के 10% ईंधन उत्पादन पर असर पड़ा।
- म्यांमार: 20 अप्रैल को सागाइंग क्षेत्र के होमालिन बंदरगाह पर बड़ा विस्फोट, जिसमें 10 से ज्यादा ईंधन टैंकर धू-धू कर जले।
- अन्य देश: मेक्सिको और इक्वाडोर की रिफाइनरियों में भी आग की घटनाएं सामने आई हैं। (रूस को छोड़ दें जहां यूक्रेन के सीधे हमले हुए हैं)।
सोशल मीडिया पर चल रही ‘साजिश’ की बहस
इन सभी घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। एक वेरिफाइड X यूजर ‘अरविंद’ ने राजस्थान में आग लगने के चार दिन पहले ही चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा था, “विरोधी देश भू-राजनीतिक कारणों से तेल की कीमतें बढ़ाने और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए रिफाइनरी में आग लगा सकते हैं।” म्यांमार की घटना के बाद यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा, “यह अब हद से ज्यादा हो रहा है, अब तो ग्लोबल पैटर्न साफ नजर आ रहा है।”
अमेरिका-ईरान युद्ध और ‘तेल’ का हथियार
ये सारी घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध पश्चिम एशिया में तबाही मचा हुआ है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दुनिया की तेल आपूर्ति की नाक काट दी। इसका असर यह हुआ कि कच्चे तेल के दाम 66 डॉलर से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध में ‘तेल’ सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। अगर युद्ध क्षेत्र से दूर स्थित देशों की रिफाइनिंग क्षमता (Refining Capacity) कम होती है, तो वैश्विक बाजार में ‘रिफाइंड ऑयल’ (पेट्रोल-डीजल) की भारी कमी पैदा हो सकती है। इसका सीधा फायदा उन देशों को मिल सकता है जिनके पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, जैसे वेनेजुएला (सबसे बड़ा भंडार) और ईरान (तीसरा सबसे बड़ा भंडार)। इन घटनाओं को लेकर सबसे दिलचस्प बिंदु यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश ‘चीन’ अब तक इन रिफाइनरी आग की घटनाओं से पूरी तरह से अछूता है। क्या यह सिर्फ संयोग है?























