संध्या समय न्यूज
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्यूल) ने मीठी नदी के बड़े गाद निकासी घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को एस्प्लेनेड कोर्ट (किला कोर्ट) में 7,000 पन्नों की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दो आरोपियों—महेश पुरोहित और सुनील उपाध्याय—को आरोपी बनाया गया है, जबकि 39 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
किसानों के नाम पर बनाए गए थे फर्जी दस्तावेज
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों पर डंपिंग ग्राउंड के लिए किसानों के नाम पर फर्जी समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार करने और भुगतान हासिल करने के लिए उन्हें असली दस्तावेजों के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप है। दोनों आरोपियों को पिछले साल दिसंबर में ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था।

2013 से 2023 तक चली साजिश
दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बीएमसी के तूफानी जल निकासी विभाग के अधिकारियों ने 2013 से 2023 के दस वर्षों के दौरान ठेकेदारों और बिचौलियों के साथ मिलकर बड़ी साजिश रची। इस दौरान कथित तौर पर किसानों के नाम पर डंपिंग साइट्स के लिए जाली समझौता ज्ञापन प्रस्तुत किए गए। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए गाद निकासी के बिलों को मंजूरी दिलाई गई और करोड़ों का गबन किया गया।
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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले, नवंबर 2025 में ईओडब्ल्यू ने मेसर्स मेनदीप एंटरप्राइजेज के मालिक राठौर के खिलाफ लगभग 1,300 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। राठौर पर फर्जी वजन मापने की रसीदें और फर्जी लॉग शीट बनाने का आरोप है। उन्हें अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
काम सिर्फ कागजों पर, नदी में नहीं हुआ कोई काम
जांच में सामने आया है कि मीठी नदी से गाद निकालने के नाम पर बनाए गए इस बड़े प्रोजेक्ट में जमकर अनियमितताएं हुई हैं। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से काम सिर्फ कागजों पर दिखाया गया, जबकि जमीनी हकीकत में नदी में कोई खास काम नहीं किया गया। गाद निकासी के नाम पर फर्जी बिल बनाकर कथित तौर पर 65.5 करोड़ रुपये की लूट की गई।



















