Political Jackpot: आप पार्टी (AAP) के लिए राज्यसभा में आई भूचाल अब राजनीतिक दलों के समीकरणों को उलझा दिया है। पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने बगावत करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। राज्यसभा के स्पीकर (सभापति) द्वारा इन बागी नेताओं को भाजपा के शिंर्षज्ञ के तौर पर मान्यता देने के बाद तस्वीर साफ हो गई है। हालांकि, इस बगावत से जहां अरविंद केजरीवाल को सियासी तौर पर बड़ा झटका लगा है, वहीं इसका सीधा फायदा भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को होता दिख रहा है।
राघव चड्ढा, स्वाति मालिवाल और संदीप पाठक जैसे केजरीवाल की ‘सियासी प्रयोगशाला’ से निकले चेहरों के निकल जाने से एक ऐसी रिक्तता पैदा हुई है, जिसका फायदा कांग्रेस पंजाब, गुजरात, दिल्ली, गोवा और हरियाणा जैसे 5 राज्यों में भुनाने की तैयारी में है। आखिरकार, कैसे इस बगावत ने कांग्रेस के लिए ‘पॉलिटिकल जैकपॉट’ का रूप ले लिया है, आइए समझते हैं:

केजरीवाल के ‘करीबियों’ का जाना भरी चोट
बता दें कि राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, शाजिया इल्मी या कपिल मिश्रा के जाने का दर्द भले ही कम हो, लेकिन चड्ढा, पाठक और मालिवाल वो नाम थे, जिन्हें केजरीवाल ने खुद पाला था। पंजाब में आप पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने वाले मास्टरमाइंड राघव चड्ढा और संगठन मंत्री संदीप पाठक के जाने से पार्टी की रीढ़ ही कमजोर हो गई है।
भाजपा को क्या मिला और क्या खोया?
फिलहाल, सतही तौर पर भाजपा को इससे बड़ा फायदा हुआ है। उच्च सदन में भाजपा बहुमत के और करीब पहुंच गई है। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और है। चड्ढा से लेकर साहनी तक कोई भी नेता ऐसा नहीं है, जिसके पीछे कोई विशाल जनाधार खड़ा हो। ये नेता ‘सिर्फ सूट-बूट’ वाली राजनीति के चेहरे हैं, जनता उनके नाम पर वोट नहीं देती। पंजाब में भाजपा अभी भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाई है, ऐसे में इन नेताओं से वहां आप पार्टी के वोटबैंक में सेंधमारी करना मुश्किल है।
कांग्रेस के लिए ‘जैकपॉट’ कैसे?
बता दें कि असली खेल यहां से शुरू होता है। आप पार्टी का उदय ही कांग्रेस के विरोध में अन्ना आंदोलन से हुआ था। कांग्रेस की जमीन पर ही आप पार्टी ने अपनी इमारत खड़ी की थी। 2013 में दिल्ली और बाद में पंजाब में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने वाली आप पार्टी अब कमजोर नजर आ रही है। कांग्रेस ने पहले से ही आप पार्टी को भाजपा की ‘बी-टीम’ बताया है। राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का सीधे भाजपा में जाना इस नैरेटिव को आग से तौलने का काम करेगा। इससे कांग्रेस को अपने पुराने वोटबैंक (विशेषकर दलित और मुस्लिम) को वापस जोड़ने का एक मजबूत हथियार मिल गया है।
जाने इन 5 राज्यों में कैसे दिखेगा असर?
- पंजाब: यहां की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। पंजाब में 57% सिख आबादी और किसान आंदोलन के बाद भाजपा की राजनीतिक नब्ज नहीं बैठती। वरिष्ठ पत्रकार सुखविंदर सिंह के अनुसार, पंजाब में भाजपा का मुकाबला आप पार्टी से नहीं, बल्कि कांग्रेस से है। INDIA ब्लॉक के तहत कांग्रेस को अब स्थानीय स्तर पर आप पार्टी सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने का मौका मिलेगा।
- दिल्ली: 2013 से दिल्ली में कांग्रेस का खाता बंद है। आप पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के टूटने और ‘बी-टीम’ वाले कलंक के कारण कांग्रेस दिल्ली में अपने लिए रास्ता बनाने की कोशिश में जुट जाएगी।
- गुजरात:आप पार्टी ने पिछले चुनावों में गुजरात में ‘तीसरा कोण’ बनाकर कांग्रेस के पारंपरिक वोटों का बटवारा किया था। पार्टी के अंदरूनी कलह और नेताओं के पलायन से गुजरात में आप पार्टी का मनोबल गिरेगा और कांग्रेस को विरोधी वोटों का फायदा मिल सकता है।
- गोवा: गोवा में भी आप पार्टी ने कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की थी। लेकिन अब केजरीवाल के राष्ट्रीय विस्तार के मंसूबे धराशायी होते दिख रहे हैं, जिससे गोवा में कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में आसानी होगी।
- हरियाणा (और राष्ट्रीय राजनीति): हाल के चुनावों में आप पार्टी ने हरियाणा में भी मजबूती से पैर जमाने की कोशिश की थी। केजरीवाल के बाहर चले रहे नेताओं और पार्टी की कमजोर छवि के चलते कांग्रेस को हरियाणा समेत अन्य राज्यों में ‘असहिष्णु’ और ‘विकल्प’ वाली राजनीति करने वाले वोटर्स को वापस खींचने में मदद मिलेगी।























