एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को दबाव रहा। निवेशक अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, प्रमुख मुद्राओं में कमजोरी और मध्य-पूर्व का सैन्य तनाव बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं। ब्रिटेन में 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 1998 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका में भी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड कारोबार के दौरान 2002 के बाद की ऊंचाई तक गई।
बढ़ती यील्ड निवेशकों के लिए अहम संकेत है। इससे कंपनियों और सरकारों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है और शेयरों की तुलना में बॉन्ड अधिक आकर्षक लग सकते हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा तय करने के लिए शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी पेरोल्स रिपोर्ट पर खास नजर रहेगी।
ब्रिटेन में 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड स्तर पर
ब्रिटेन की 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड गुरुवार को बढ़कर 6.029% तक पहुंच गई। यह जनवरी 1998 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, 10-वर्षीय गिल्ट यील्ड बढ़कर 5.510% हो गई—जुलाई 2007 के बाद इसका उच्चतम स्तर।
बाजार की चिंता का एक कारण ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें हैं। महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से निवेशक ब्याज दरों के भविष्य को लेकर सतर्क हैं। यदि महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकारी कर्ज पर ब्याज का बोझ भी बढ़ सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी तेज उछाल
अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड कारोबार के दौरान 5.34% तक पहुंच गई, जो 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और एशियाई कारोबार के दौरान यह करीब 5.25% के आसपास रही।
बॉन्ड यील्ड आम तौर पर बॉन्ड की कीमतों के उलट दिशा में चलती है। जब यील्ड बढ़ती है, तो कंपनियों के लिए उधारी महंगी हो सकती है और भविष्य की कमाई का मौजूदा मूल्य घट सकता है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची यील्ड रहने पर शेयर बाजार, खासकर ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों, पर दबाव पड़ सकता है। इससे डॉलर की मांग और वैश्विक निवेश प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट पर बाजार की नजर
शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी पेरोल्स रिपोर्ट निवेशकों के लिए दिन का सबसे अहम आर्थिक आंकड़ा है। सितंबर में अमेरिका में करीब 90,000 नई नौकरियां जुड़ने की उम्मीद है। बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रहने का अनुमान है।
रोजगार के आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के बारे में संकेत दे सकते हैं। यदि नौकरियों की संख्या उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो बाजार को लग सकता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसके उलट कमजोर आंकड़े दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ा सकते हैं। दोनों ही स्थितियों में बॉन्ड, डॉलर और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है।

एशियाई शेयर बाजारों का प्रदर्शन
MSCI का एशिया-प्रशांत इक्विटी इंडेक्स, जिसमें जापान शामिल नहीं है, शुक्रवार को करीब 0.5% नीचे रहा। इस सप्ताह के लिए सूचकांक लगभग 1.7% की गिरावट की ओर बढ़ रहा था।
जापान का निक्केई करीब 0.7% गिरा, हालांकि पूरे सप्ताह के आधार पर इसमें लगभग 3.1% की बढ़त रही। चीन के मुख्य शेयर बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण अगले सप्ताह बुधवार तक बंद हैं।
अमेरिकी शेयर वायदा में हल्की तेजी दिखी। नैस्डैक फ्यूचर करीब 0.3% और एसएंडपी 500 फ्यूचर लगभग 0.1% ऊपर रहे। हालांकि, रोजगार रिपोर्ट और बॉन्ड यील्ड में बदलाव के चलते कारोबारी रुख सावधानी भरा बना हुआ है।
फ्रांस की वित्तीय चिंता से यूरो पर दबाव
फ्रांस की राजकोषीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ने यूरोपीय बॉन्ड बाजार में हलचल बढ़ाई है। फ्रांस और जर्मनी की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर 140 बेसिस पॉइंट से ऊपर पहुंच गया, जो 2012 के बाद सबसे बड़ा अंतर है। यह अंतर निवेशकों की ओर से फ्रांस के सरकारी कर्ज को लेकर बढ़ी सतर्कता दिखाता है।
इस दबाव के बीच यूरो डॉलर के मुकाबले गिरकर करीब 1.1215 डॉलर पर आ गया। यह मई 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 102.09 पर रहा और लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त की राह पर था।
येन और कच्चे तेल पर भी नजर
डॉलर के मुकाबले जापानी येन करीब 158.13 पर रहा। टोक्यो में सितंबर की महंगाई दर बढ़कर 2.7% होने के बाद बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हुई है। निवेशक यह देखेंगे कि महंगाई का दबाव केंद्रीय बैंक की नीति को किस तरह प्रभावित करता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिकी WTI क्रूड करीब 92.84 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत में लगभग 3% की तेजी आई थी। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा।
तेल महंगा रहने से महंगाई के दबाव में कमी लाना मुश्किल हो सकता है। इसका असर केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति, सरकारी बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
आगे बाजार किन बातों पर निर्भर करेगा?
फिलहाल निवेशक अमेरिकी रोजगार आंकड़ों, बॉन्ड यील्ड की दिशा और तेल की कीमतों पर ध्यान दे रहे हैं। मजबूत रोजगार रिपोर्ट ब्याज दरों के ऊंचा बने रहने की आशंका को बढ़ा सकती है, जबकि कमजोर आंकड़े बाजार में राहत ला सकते हैं। इसके साथ ही फ्रांस की राजकोषीय स्थिति और मध्य-पूर्व का तनाव भी वैश्विक निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।























