बिहार में बाढ़ का कहर, कई तटबंध टूटे

बिहार बाढ़ से सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पश्चिम चंपारण में हालात गंभीर हैं। गंडक के बढ़ते जलस्तर से तटबंध टूटे, गांवों में पानी घुसा और प्रशासन ने राहत-बचाव अभियान तेज किया।

गंडक उफनाई, गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

HIGHLIGHTS

  • वैशाली में रिंग बांध पर मंडराया बड़ा खतरा
  • गंडक का रिकॉर्ड जलस्तर, कई गांव जलमग्न
  • बाढ़ से घिरे हजारों लोग, राहत अभियान तेज
  • नेपाल की बारिश से बिहार में बाढ़ का संकट

बिहार में गंडक और गंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। नेपाल में हुई बारिश और वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के बाद सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंध टूटने की खबर है। वैशाली में रिंग बांध के रिसाव और कटाव ने चिंता बढ़ा दी, जबकि पश्चिम चंपारण में गंडक का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है।

बाढ़ का असर पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली, मुजफ्फरपुर, सारण और पटना समेत कई जिलों में दिखाई दे रहा है। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है। कई जगह सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

सारण में तटबंध टूटने से 48 गांव प्रभावित

सारण जिले के मकेर प्रखंड में तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। इससे मकेर की सभी पंचायतें और अमनौर प्रखंड की कुछ पंचायतें प्रभावित हुई हैं। पानी का बहाव परसा प्रखंड की ओर भी बढ़ रहा है। कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी एनएच-722 तक पहुंच गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ।

जिला प्रशासन के मुताबिक, बुधवार शाम तक जिले की 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। करीब 24,725 लोग और 4,220 परिवार इसकी चपेट में आए हैं। प्रभावित इलाकों में नावें लगाई गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।

सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि राहत कार्य में एनडीआरएफ की दो और एसडीआरएफ की एक टीम तैनात है। एसडीआरएफ की करीब 40 सदस्यों वाली एक अतिरिक्त टीम भी लगाई गई है। प्रभावित क्षेत्रों में 33 नावें और एक बोट एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पांच चिकित्सा शिविर चल रहे हैं और पशुओं के इलाज की व्यवस्था भी की गई है। एक राहत केंद्र में करीब 50 लोगों के ठहरने का इंतजाम है।

वैशाली में रिंग बांध के रिसाव पर रातभर मरम्मत

वाल्मीकिनगर बराज से करीब पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा और गंडक का जलस्तर तेजी से बढ़ा। वैशाली के निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया और कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए।

लालगंज प्रखंड के यूसुफपुर पंचायत स्थित पीरापुर के वार्ड संख्या-5 में रिंग बांध से रिसाव और कटाव की सूचना मिली। जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक टीमों ने मिट्टी से भरे बोरों की मदद से रिसाव रोकने और बांध को मजबूत करने का काम किया। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

मुजफ्फरपुर के जयमल डुमरी में गंडक का तटबंध टूटा

मुजफ्फरपुर के पारू प्रखंड स्थित जयमल डुमरी इलाके में नारायणी गंडक नदी का तटबंध टूट गया। इसके बाद पानी आसपास के गांवों और निचले इलाकों में फैलने लगा। कई घरों और संपर्क मार्गों तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत है। लोग बच्चों, बुजुर्गों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने दूसरे कमजोर तटबंधों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि नदी का दबाव बना रहा तो आसपास के और गांवों में पानी फैल सकता है। तटबंध टूटने के बाद कुछ ग्रामीणों ने समय रहते मरम्मत और निगरानी न होने पर नाराजगी भी जाहिर की।

तिरहुत आयुक्त गिरवर दयाल सिंह के अनुसार, सूचना मिलते ही जिलाधिकारी, एसडीएम, अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा है।

पश्चिम चंपारण में गंडक ने पार किया पुराना रिकॉर्ड

पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के अचानक बढ़े जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। बगहा गेज पर नदी का स्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और 2024 में दर्ज पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है। इससे तटबंधों पर दबाव बढ़ा और कई निचले इलाके जलमग्न हो गए। राहत और पुनर्वास एजेंसियों के सामने भी चुनौतियां बढ़ गई हैं।

पटना में गंगा खतरे के निशान से ऊपर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना के गंगा घाटों का निरीक्षण किया। पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार गंगा और गंडक दोनों नदियों ने जलस्तर का रिकॉर्ड बनाया है और सोन नदी में भी पानी उच्चतम स्तर तक पहुंचा था। उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर वायु सेना से मदद लेने की बात भी कही।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है, फिर भी नदियों का जलस्तर चिंताजनक है। प्रशासन और राहत एजेंसियां हालात पर नजर रख रही हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, भोजन और चिकित्सा सहायता देना तथा कमजोर तटबंधों की निगरानी करना फिलहाल प्राथमिकता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now