राजस्थान के जालौर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र स्थित धानोल गांव में एक गाय के लिए आलीशान बंगला बनाया जा रहा है। कांकरेज नस्ल की इस गाय का नाम राधा है। मुंबई में कारोबार करने वाले गौसेवक नरेंद्र पुरोहित अपनी प्रिय गाय के लिए करीब ₹1 करोड़ की लागत से दो मंजिला ‘राधा महल’ बनवा रहे हैं। परिवार राधा को केवल पालतू पशु नहीं, बल्कि घर की सम्मानित सदस्य और माता के समान मानता है।
राधा महल में संगमरमर का फर्श, आकर्षक डिजाइन और आराम के लिए जरूरी सुविधाएं होंगी। बंगले का पहला तल राधा के रहने के लिए बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे तल पर पूजा-पाठ और साधु-संतों के ठहरने की व्यवस्था होगी। बताया जाता है कि यह इमारत नरेंद्र पुरोहित के अपने घर से करीब सवा फीट ऊंची होगी। राधा के लिए घर के सामने लगभग 200 गज जमीन पर यह निर्माण कराया जा रहा है।
2015 में बैंड-बाजे के साथ घर आई थी राधा
नरेंद्र पुरोहित साल 2015 में राधा को पथमेड़ा गौशाला से बैंड-बाजे के साथ अपने घर लेकर आए थे। उस समय राधा करीब दो साल की थी। परिवार के मुताबिक, राधा के घर आने के बाद नरेंद्र के कारोबार में तरक्की हुई। पहले वे करीब ₹1,500 की नौकरी करते थे, बाद में उनका काम बढ़ा और वे कारोबार से जुड़ गए। हालांकि यह परिवार की अपनी आस्था और अनुभव है, जिसे वे राधा के आगमन से जोड़ते हैं।
नरेंद्र मुंबई में रेलवे ठेकेदारी और इलेक्ट्रिक स्कूटर से जुड़े कारोबार सहित कई व्यावसायिक गतिविधियां संभालते हैं। वे निर्माण कंपनी भी चलाते हैं। काम के सिलसिले में मुंबई में रहने के बावजूद राधा से उनका लगाव बना रहता है। वे बताते हैं कि वहां से सीसीटीवी के जरिए दिन में कई बार राधा को देखते हैं और गांव आने पर उसकी सेवा करते हैं।
सुबह-शाम होती है आरती
राधा की दिनचर्या परिवार के लिए खास है। रोज सुबह और शाम उसकी आरती उतारी जाती है। परिवार के सदस्य राधा के दर्शन के बाद ही भोजन करते हैं। नरेंद्र का कहना है कि वे मुंबई में रहते हुए भी राधा के दर्शन किए बिना खाना नहीं खाते। महीने में कई बार वे गांव आकर उसकी देखभाल करते हैं। परिवार के पास करीब 25 गायें हैं, लेकिन राधा को विशेष स्थान दिया गया है।
राधा को देसी घी से बनी लपसी और लड्डू खिलाए जाते हैं। हर महीने की अष्टमी, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों पर उसे सजाया जाता है। ऐसे अवसरों पर राधा को चांदी के आभूषण और चुनरी पहनाई जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके गहनों का कुल वजन करीब 10 किलो बताया जाता है। गले में कंठी और सिर पर चांदी के आभूषणों से सजी राधा का रूप परिवार के लिए उत्सव का हिस्सा बन जाता है।
राधा को परिवार मानते हैं नरेंद्र
नरेंद्र पुरोहित राधा के प्रति अपने भाव को भक्ति और पारिवारिक प्रेम से जोड़ते हैं। उनके अनुसार, राधा उनके लिए मां जैसी है। इसी वजह से उसके रहने के लिए साधारण गौशाला के बजाय आरामदायक और अलग भवन तैयार कराया जा रहा है। राधा महल में उसके लिए जगह के साथ पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों की व्यवस्था भी होगी।
साल 2021 में परिवार ने राधा का नंदी के साथ प्रतीकात्मक विवाह भी करवाया था। इस आयोजन में गांव के लोग बराती बने और समारोह को उत्सव की तरह मनाया गया। परिवार की गायों के प्रति सेवा केवल अपने घर तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, वे गौशालाओं को भी हर साल आर्थिक सहयोग देते हैं।
आस्था और पशु-सेवा का अनोखा उदाहरण
हिंदू परंपरा में गाय को पूजनीय माना जाता है और कई परिवार रोजाना पहली रोटी गाय को खिलाते हैं। नरेंद्र पुरोहित का परिवार भी इसी श्रद्धा से राधा की देखभाल करता है। उनके लिए राधा महल बनवाना केवल भव्य निर्माण नहीं, बल्कि गाय के प्रति सम्मान और सेवा का प्रतीक है।
राधा के नाम पर बन रहा ₹1 करोड़ का बंगला, उसकी नियमित आरती और त्योहारों पर पहनाए जाने वाले गहने इस परिवार की अनोखी आस्था को सामने लाते हैं। धानोल गांव में बन रहा यह दो मंजिला भवन अब लोगों के बीच चर्चा का विषय है। परिवार को उम्मीद है कि राधा महल उसकी प्रिय गाय के लिए आरामदायक ठिकाना होगा और पूजा-पाठ के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

























