मुंबई: कल्याण में 176 करोड़ की धोखाधड़ी, बिल्डरों पर FIR

कल्याण पश्चिम के टाइकून गोल्ड एवेन्यू MHADA रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में 176 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज। 184 से अधिक सदस्य और सैकड़ों खरीदार घर के इंतजार में हैं; पुलिस जांच जारी है।

बिल्डर से मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, फिर भी समाधान नहीं

HIGHLIGHTS

  • MHADA प्रोजेक्ट ठप, 184 परिवारों का घर अटका
  • फ्लैट के पैसे दिए, फिर भी नहीं मिला घर
  • टाइकून गोल्ड एवेन्यू पर FIR, खरीदारों में हड़कंप
  • सोसायटी की जमीन गिरवी, बिल्डरों पर गंभीर आरोप

ठाणे के कल्याण पश्चिम स्थित ‘टाइकून गोल्ड एवेन्यू’ रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में कथित तौर पर 176 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। खड़कपाड़ा पुलिस ने डेवलपर्स और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में आरोप है कि प्रोजेक्ट का काम 2022 से बंद है, खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं मिला और सोसायटी की जमीन बैंक के पास गिरवी रखी गई।

ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम के चिकनघर इलाके में स्थित MHADA की MIG योजना से जुड़ा यह मामला शांतिदूत सहकारी हाउसिंग सोसायटी के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का है। प्रोजेक्ट का काम टाइकून अवंती प्रोजेक्ट्स LLP को सौंपा गया था। शिकायत के मुताबिक, यह कंपनी टाइकून रियल्टीज LLP और सिकॉम रियल्टी लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है।

खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन में श्रीकांत दिगंबर शितोले, चेतन सराफ, महेश गोसावी और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 3(5), 316(2) और 318(4) के तहत केस दर्ज किया है। ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं; मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि अदालत में होनी बाकी है।

2022 से बंद पड़ा है प्रोजेक्ट

शिकायत के अनुसार, ‘टाइकून गोल्ड एवेन्यू’ का निर्माण कार्य 2022 से रुका हुआ है। इमारत का काम कथित तौर पर दसवीं मंजिल तक हुआ, लेकिन इसके बाद निर्माण अधूरा रह गया। नतीजतन, नए फ्लैट खरीदारों के साथ-साथ पुरानी सोसायटी के निवासियों को भी पुनर्विकास के बाद अपने घरों का कब्जा नहीं मिला।

शिकायतकर्ता का कहना है कि फ्लैट देने और पुनर्विकास पूरा करने के वादे किए गए थे, लेकिन वे पूरे नहीं हुए। प्रोजेक्ट से जुड़े खरीदारों को तय समयसीमा में घर मिलने की उम्मीद थी। शिकायत में जुलाई 2025 तक कब्जा दिए जाने की बात का भी उल्लेख है।

फ्लैट के लिए 39.36 लाख रुपये देने का दावा

मामले में शिकायतकर्ता नंदा प्रभाकर म्हात्रे ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 29 अगस्त 2021 को प्रोजेक्ट के ‘A’ विंग की 11वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 1101 के लिए 39 लाख 36 हजार 69 रुपये का भुगतान किया था। शिकायत के मुताबिक, भुगतान के बावजूद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला।

पुलिस अब खरीदारों से ली गई रकम, भुगतान के रिकॉर्ड और प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि खरीदारों से प्राप्त धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया और निर्माण कार्य रुकने के पीछे क्या कारण रहे।

सोसायटी की जमीन गिरवी रखने का आरोप

शिकायत में एक अन्य गंभीर आरोप यह है कि डेवलपर्स को दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर सोसायटी की जमीन बैंक के पास गिरवी रखी गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस लेन-देन की जानकारी और प्रभाव को लेकर सोसायटी के सदस्यों तथा फ्लैट खरीदारों को नुकसान हुआ।

शांतिदूत सहकारी हाउसिंग सोसायटी के 184 सदस्यों और सैकड़ों अन्य फ्लैट खरीदारों से 176 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लिए जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस इस दावे की जांच के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेज, सोसायटी के रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की पड़ताल करेगी।

खरीदारों और मूल निवासियों पर असर

रीडेवलपमेंट परियोजनाओं में मूल निवासियों को नए घर देने और खरीदारों को तय समय पर फ्लैट सौंपने की जिम्मेदारी अहम होती है। इस मामले में शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि न तो कब्जे से जुड़े वादे पूरे हुए और न ही निर्माण निर्धारित समय में पूरा हुआ। प्रोजेक्ट के लंबे समय से बंद रहने से घर की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में मामला आगे बढ़ने तक आरोपों को कथित आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पुलिस कर रही वित्तीय और दस्तावेजी जांच

ठाणे पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज केस की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक प्रेमनाथ शेटे ढोले की देखरेख में की जा रही है। जांच में प्रोजेक्ट के वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, सोसायटी की जमीन से जुड़े दस्तावेज और फ्लैट खरीदारों से प्राप्त रकम की जानकारी जुटाई जाएगी।

पूर्व सांसद कपिल पाटिल ने पहले बिल्डर श्रीकांत शितोले की ओर से मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। हालांकि, शिकायत के मुताबिक इस प्रयास से विवाद का समाधान नहीं निकला। अब FIR दर्ज होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि निर्माण क्यों रुका, जमीन गिरवी रखने की प्रक्रिया किस आधार पर हुई और खरीदारों से ली गई रकम का उपयोग कहां किया गया।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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