गुरुवार की तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर शुरुआत की, लेकिन शुरुआती कारोबार में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांक हरे निशान में आ गए। सेंसेक्स करीब 125 अंक चढ़कर 73,705 के स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 32 अंक की बढ़त के साथ 23,095 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरों पर बनी हुई है।
शुरुआती तेजी के बावजूद बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। गुरुवार को हुई भारी बिकवाली के बाद निवेशक सतर्क हैं और निफ्टी के 23,000 के अहम स्तर पर नजर रख रहे हैं। इस स्तर के ऊपर टिके रहने पर बाजार में खरीदारी को सहारा मिल सकता है। वहीं, इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका है।

सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत कमजोर
कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन बाजार खुलते समय दबाव में था। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 54 अंक गिरकर 73,525 पर खुला। एनएसई का निफ्टी भी 28 अंक नीचे 23,035 के आसपास खुला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से दोनों सूचकांक संभले और बढ़त में आ गए।
सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इटरनल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक शामिल रहे। दूसरी ओर, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, आईटीसी और एचसीएल टेक में कमजोरी देखी गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी व्यापक नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित है।
गुरुवार की गिरावट के बाद निवेशक सतर्क
गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली हुई थी। निफ्टी 50 करीब 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,169 के आसपास बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में लगभग 1.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,247 अंक टूटकर 73,580 पर बंद हुआ था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा।

इस बड़ी गिरावट के बाद शुक्रवार के कारोबार में निवेशक यह देख रहे हैं कि बाजार निचले स्तरों पर संभलता है या बिकवाली आगे भी जारी रहती है। वैश्विक संकेतों और घरेलू शेयरों में खरीदारी की मजबूती दिनभर बाजार की दिशा तय कर सकती है।
निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर क्यों अहम?
तकनीकी नजरिए से निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तो बाजार में सुधार की कोशिश जारी रह सकती है। ऐसी स्थिति में 23,200 और 23,300 अगले अहम स्तर होंगे, जहां निवेशकों को बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।
इसके उलट, निफ्टी अगर 23,000 से नीचे फिसलकर वहां टिकता है, तो कमजोरी बढ़ सकती है। नीचे की ओर 22,950 और 22,850 पर नजर रहेगी। बाजार में ज्यादा दबाव आने पर 22,700 का स्तर भी अहम हो सकता है। इसलिए निवेशक तेजी के संकेतों के साथ-साथ सपोर्ट स्तरों पर भी ध्यान दे रहे हैं।
सेंसेक्स के लिए 73,000 से 73,250 का दायरा अहम
सेंसेक्स के लिए 73,000 से 73,250 का क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दायरे के ऊपर बने रहने पर बाजार में संभलने और खरीदारी लौटने की संभावना बनी रह सकती है। ऊपर की ओर 73,850 से 74,000 का क्षेत्र अहम रेजिस्टेंस है। अगर सेंसेक्स 74,000 के ऊपर टिकता है, तो हालिया गिरावट के बाद दबाव कुछ कम हो सकता है।
हालांकि, केवल स्तरों के आधार पर तेजी की पुष्टि नहीं होगी। बाजार की मजबूती का आकलन करने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि कितने शेयर बढ़त में हैं और तेजी किन क्षेत्रों में दिखाई दे रही है।
महंगा कच्चा तेल बाजार के लिए चिंता
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर और डब्ल्यूटीआई लगभग 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी परिवहन, विमानन और अन्य लागत-संवेदनशील क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण निवेशक कच्चे तेल की हर बड़ी चाल पर नजर रख रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया पर नजर
अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 5.20 प्रतिशत तक पहुंचने की खबर भी बाजार के लिए अहम है। यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए बॉन्ड आकर्षक हो सकते हैं, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव बन सकता है। उभरते बाजारों में विदेशी निवेश की दिशा भी इससे प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तथा पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़ी खबरें बाजार की चाल बदल सकती हैं। तनाव कम होने के संकेत मिलने पर तेल की कीमतों में राहत संभव है, जिससे भारतीय बाजार को सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, तनाव बढ़ने पर तेल महंगा हो सकता है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
























