UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से साइबर ठगों का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने एक 85 वर्षीय बुजुर्ग को पुलिस और एटीएस अधिकारी बनकर डरा-धमकाकर 27 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Virtual Custody) में रखा और उनकी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी 84.50 लाख रुपये उड़ा ली। पीड़ित बुजुर्ग लगातार मानसिक प्रताड़ना के चलते कई दिनों तक चुप रहा, लेकिन बाद में उसने साइबर थाने का दरवाजा खटखटाया।
यह था पूरा मामला
मामला लखनऊ के जानकीपुरम सेक्टर-जी निवासी 85 वर्षीय बदरुद्दीन अंसारी का है। शिकायत के अनुसार, 7 मार्च को ठगों ने बुजुर्ग को फोन किया और खुद को लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर का सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा बताया। ठगों ने बदरुद्दीन को झटका देते हुए कहा कि पुणे में एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम सामने आया है। आरोप लगाया गया कि बदरुद्दीन के नाम पर एचडीएफसी बैंक में एक फर्जी खाता खोलकर अवैध लेनदेन किया गया है।
फर्जी दस्तावेजों से बनाया दबाव
जब बुजुर्ग ने संदेह जताया, तो ठगों ने व्हाट्सऐप और सिग्नल ऐप पर एनआईए (NIA), सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई (RBI) के ‘फर्जी और नकली’ दस्तावेज भेजकर उन पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद कुछ अन्य आरोपियों ने खुद को एटीएस (ATS) का अधिकारी बताकर सीधी गिरफ्तारी का डर दिखाया।
27 दिन तक चला डिजिटल अरेस्ट का ड्रामा
अधिकारियों से जुड़े होने के झांसे में आकर डरा हुआ बुजुर्ग ठगों के इशारों पर चलने लगा। ठगों ने उसे 27 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान बुजुर्ग से लगातार वीडियो कॉल पर पूछताछ की गई और उसे अकेले एक कमरे में बैठकर जांच में सहयोग करने के लिए मजबूर किया गया।
इस डर के माहौल का फायदा उठाकर ठगों ने 11 मार्च से लेकर 4 अप्रैल के बीच बदरुद्दीन से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 84 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। यह राशि बुजुर्ग की पूरी जीवन भर की जमा पूंजी थी।
21 दिन बाद टूटी चुप्पी, पुलिस ने फ्रीज किए 27 लाख
भारी आर्थिक नुकसान और दिमागी शोषण के बाद करीब 21 दिन बाद बदरुद्दीन ने साइबर थाने पहुंचकर इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना प्रभारी बृजेश यादव के मुताबिक, शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और ठगों के बैंक खातों में जमा 27 लाख रुपये को तुरंत फ्रीज करा दिया गया है। वहीं, शेष राशि की बरामदगी के लिए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और बैंक अकाउंट्स को ट्रेस कर रही है, जिनके जरिए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया।
























