Bihar News: बिहार में अब स्टेट हाईवे पर लंबी दूरी तक की यात्रा करने वालों के लिए एक नई शुरुआत होने जा रही है। अगर आप राज्य में किसी ऐसे पुल से गुजरने वाले हैं जिसकी लंबाई 250 मीटर से ज्यादा है, तो आपको भविष्य में टोल टैक्स देना पड़ सकता है। यह कोई कोरी अफवाह नहीं, बल्कि बिहार सरकार का एक सुनियोजित कदम है। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जमीनी स्तर पर सर्वे का काम भी तेज कर दिया है।
बिहार सरकार का क्या है मकसद?
दरअसल, पिछले कुछ समय से सड़कों और पुलों के रखरखाव को लेकर सरकार के सामने फंड की कमी की समस्या थी। बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने और मौजूदा सड़क नेटवर्क को गड्ढामुक्त बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने एक नई नीति अपनाई है। एक जुलाई की मंत्रिमंडल बैठक में ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली’ को हरी झंडी दी गई।
इस नियमावली के तहत, राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) की तर्ज पर अब राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों और बड़े पुलों से भी टोल वसूला जाएगा। यह व्यवस्था देश के उन बड़े और प्रगतिशील राज्यों की तर्ज पर है, जहां पहले से ही राज्य स्तरीय टोल नीतियां लागू हैं, जिनमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश प्रमुख हैं।
94 पुलों का चल रहा है सर्वे
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, स्टेट हाईवे पर 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों की कुल संख्या 94 है। हालांकि, सरकार इन सभी पर एकसाथ टोल नहीं लगाएगी। इन 94 पुलों का एक विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जैसे कि किसी विशेष पुल से प्रतिदिन कितने वाहनों का आवागमन होता है? वह पुल शहरी क्षेत्र में स्थित है या ग्रामीण? सबसे अहम बात यह जानना है कि कोई भी राष्ट्रीय राजमार्ग का टोल प्लाजा उस स्टेट हाईवे वाले पुल से कितनी दूरी पर है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर ही यह फैसला लिया जाएगा कि किन पुलों पर टोल टैक्स लगाना व्यावहारिक और लाभदायक होगा। सर्वे के दौरान सिर्फ पुल की लंबाई ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े एप्रोच रोड (संपर्क मार्ग) की लंबाई को भी मापा जा रहा है, क्योंकि टोल की दर पूरी दूरी के हिसाब से तय होगी।

टोल की दरें और वसूली का तरीका
छोटे वाहनों (जैसे कार, जीप आदि) के लिए टोल टैक्स की दर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। जबकि बड़े वाहनों (ट्रक, बस) के लिए दरें उनके वजन और आकार के अनुसार अलग होंगी। सरकार का मानना है कि सड़कों पर जितना भारी वाहन चलेगा, उतनी ही ज्यादा सड़क घिसेगी, इसलिए बड़े वाहनों से ज्यादा शुल्क लिया जाएगा।
टोल की वसूली का जिम्मा सरकार खुद नहीं, बल्कि निजी एजेंसियों को देगी। इसके लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। स्टेट हाईवे और इन बड़े पुलों की नीलामी की जाएगी, जिसमें वह निजी एजेंसी जीतेगी जो सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने का आश्वासन देगी। यानी ज्यादा ट्रैफिक वाले पुलों को प्राथमिकता के आधार पर निजी हाथों में सौंपा जाएगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
टोल टैक्स लगने की खबर सुनकर जिन लोगों के घर के पास ये पुल हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने स्थानीय निवासियों के लिए एक विशेष छूट का प्रावधान किया है। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में जो लोग रहते हैं, उन्हें रियायती दरों पर पास दिए जाएंगे। इसके अलावा, जो लोग रोजाना या नियमित रूप से ऑफिस या अन्य काम से इन पुलों से गुजरते हैं, उनके लिए एकमुश्त राशि लेकर मासिक या वार्षिक पास बनाने की सुविधा होगी। इससे स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
इन 10 बड़े पुलों पर लग सकता है पहला टोल
बिहार में 250 मीटर से ज्यादा लंबे पुलों की अधिकतम संख्या पटना और गया जिले में है। पटना के आसपास ही दो बहुत बड़े पुल स्थित हैं। हालांकि अंतिम फैसला सर्वे के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन प्रारंभिक सूची में शामिल प्रमुख पुल इस प्रकार हैं:
- कच्चीदरगाह-बिदुपुर पुल (गंगा नदी)
- बख्तियारपुर-ताजपुर पुल (गंगा नदी)
- दरभंगा-करेह नदी पुल
- नवगछिया-कोसी नदी पुल
- फुलतौरा घाट-खगड़िया पुल
- गया-फल्गु नदी पुल
- नालंदा-सकरी नदी पुल
- आरा-छपरा गंगा नदी पुल
- सहरसा में बलुआहा घाट पुल
- गोपालगंज और बेतिया स्थित बड़े पुल























