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पश्चिम बंगाल सियासत : बंगाल में तेज हुई राजनीतिक लड़ाई

एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि उनके बूढ़े माता-पिता और विकलांग बेटे के लिए आज तक किसी नेता ने सुध नहीं ली। लोगों ने आरोप लगाया कि जहां जनता रोजी-रोटी और साफ पानी के लिए तरस रही है, वहीं अभिषेक बनर्जी ने खुद के लिए 17 आलीशान मकान बना लिए हैं। इसी वजह से जब वे सांसद होने के नाते विकास का सवाल पूछने पहुंचे, तो लोगों का 15 साल का आक्रोश फूट पड़ा।

सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला, पथराव और हंगामे से गरमाई बंगाल की राजनीति

HIGHLIGHTS

  • अभिषेक बनर्जी पर जूते, अंडे और पत्थरों से हमला
  • 15 साल के गुस्से का विस्फोट या राजनीतिक साजिश?
  • भीड़ ने घेरा, फाड़ी कमीज, पुलिस रही नदारद!
  • अभिषेक बनर्जी पर हमले से ममता का गुस्सा फूटा
  • सोनारपुर कांड: अभिषेक बनर्जी पर हमला

West Bengal Politics Heats Up News: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। चुनाव परिणामों के बाद से राज्य में बढ़े राजनीतिक तनाव के बीच, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने सबके होश उड़ा दिए हैं। शनिवार को सोनारपुर के कमराबाद इलाके में उन पर हुए पथराव, उनकी कमीज फाड़ने और नारे लगाने की घटना ने पूरे राज्य में सियासी हलचल मचा दी है। जहां टीएमसी इसे भाजपा की साजिश बता रही है, वहीं इस घटना को स्थानीय लोगों का 15 साल के विकास को लेकर गुस्सा भी कहा जा रहा है।

आइए जानते हैं कि हमले से लेकर अबतक आखिर हुआ क्या था और यह मामला कितना बिगड़ा:

घटना का आरंभ सोनारपुर में

बता दें कि शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे अभिषेक बनर्जी सोनारपुर के कमराबाद इलाके पहुंचे और उनका उद्देश्य उन परिवारों से मिलना था, जिनके लोग चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए थे और प्रभावित हुए थे। लेकिन जैसे ही वहां की गलियों में पहुंचे, माहौल तनावपूर्ण हो गया। भारी संख्या में मौजूद महिलाओं और स्थानीय लोगों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया।

अभिषेक को विरोध को देखते हुए अपनी कार छोड़कर बाइक पर सवार होना पड़ा। लेकिन पीड़ित परिवार के घर से कुछ सौ मीटर पहले ही भीड़ ने उन्हें घेर लिया और भीड़ में शामिल लोगों ने अभिषेक पर जूते, अंडे और पत्थर फेंकना शुरू कर दिए, हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ ने उनकी कमीज फाड़ दी और उन पर लात-घूंसे बरसाने की कोशिश करने लगे। इस दौरान भीड़ ‘चोर-चोर’ के नारे लगा रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने मौके पर पुलिस की मौजूदगी नाममात्र की बताते हुए अभिषेक को पुलिस का हेलमेट पहनाकर भीड़ से बाहर निकाला।

15 साल का दर्द, स्थानीय लोगों का गुस्सा

इस हमले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा कि आखिर लोग इतने भड़के क्यों? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गुस्सा एक-दो दिन का नहीं, बल्कि पिछले 15 सालों की उपेक्षा का नतीजा है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों की खराब हालत, पानी के अभाव और बुनियादी सुविधाओं के न होने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि उनके बूढ़े माता-पिता और विकलांग बेटे के लिए आज तक किसी नेता ने सुध नहीं ली। लोगों ने आरोप लगाया कि जहां जनता रोजी-रोटी और साफ पानी के लिए तरस रही है, वहीं अभिषेक बनर्जी ने खुद के लिए 17 आलीशान मकान बना लिए हैं। इसी वजह से जब वे सांसद होने के नाते विकास का सवाल पूछने पहुंचे, तो लोगों का 15 साल का आक्रोश फूट पड़ा।

अभिषेक और ममता ने लगाया भाजपा की साजिश का आरोप

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी साजिश थी और पूरी तरह से भाजपा द्वारा प्रायोजित थी। आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग मुझे मारना चाहते थे। मौके पर पुलिस नदारद थी। मेरे कपड़े फाड़े गए, चश्मा टूट गया, लेकिन मैं यहां से नहीं जाऊंगा।’ उन्होंने इस मामले को हाईकोर्ट और राज्यपाल के समक्ष उठाने की बात कही।

वहीं, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी अस्पताल पहुंचकर भाजपा पर जमकर हमला बोला और कहा कि ‘शासक अब हत्यारे बन चुके हैं।’ ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाया है। ममता ने दावा किया कि अभिषेक के शरीर में खून के थक्के (क्लॉट्स) हैं, लेकिन दबाव के चलते अस्पताल ने उन्हें डिस्चार्ज करने की कोशिश भी की गई। इस बीच, ममता बनर्जी का अस्पताल स्टाफ को लेकर एक ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वह कथित तौर पर डॉक्टर को धमकी देते हुए कह रही हैं, ‘भगवान आपको माफ नहीं करेगा, आपने गलत किया है।’

अस्पताल का ड्रामा और राजनीतिक बयानबाजी

अभिषेक बनर्जी को शुरू में अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी। लेकिन ममता बनर्जी इस पर संतुष्ट नहीं हुईं और उन्हें बेलव्यू अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘जनता का अपमान’ और ‘बदले की राजनीति’ बताया। वहीं, अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर सवाल उठाए।

अब तक की कानूनी कार्रवाई

इस पूरे मामले में सोनारपुर पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये सभी स्थानीय रूप से शामिल लोग हैं, जिन्होंने विरोध के दौरान हिंसा को अंजाम दिया। वहीं, टीएमसी कार्यकर्ता भी इस हमले के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की सियासत के लिए एक नई मुश्किल खड़ा कर चुका है, जहां एक तरफ जनता का विकास को लेकर गुस्सा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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