मतदाता सूची विवाद पर गरजे उद्धव ठाकरे

गर्जना मोर्चा में उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटने, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

HIGHLIGHTS

  • 13 करोड़ वोटरों के नाम गायब? ठाकरे
  • गर्जना मोर्चा में ठाकरे ने खोला मोर्चा
  • वोटर लिस्ट विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल
  • ‘वोट चोर’ के खिलाफ ठाकरे का ऐलान

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गर्जना मोर्चा की सभा में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने संबोधन में मतदाता सूची, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि देश की स्वतंत्र संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनता को आवाज उठानी चाहिए।

सभा में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल, व्यक्ति, जाति या धर्म तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह देश की आजादी और लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ नारे का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि उन्हें इस विचार से आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके नाम पर यदि तानाशाही को बढ़ावा दिया गया तो उसका विरोध किया जाएगा।

मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा

गर्जना मोर्चा में उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात के भाषणों का हवाला देते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र में करीब दो करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

ठाकरे ने देशव्यापी आंकड़े का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। उन्होंने इस संख्या की तुलना महाराष्ट्र की कुल आबादी से की। उनके अनुसार, तमिलनाडु में करीब 70 लाख और पश्चिम बंगाल में 30 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।

ये आंकड़े उद्धव ठाकरे के भाषण में किए गए दावे हैं। मतदाता सूची से नाम हटने के मामलों में संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और आधिकारिक आंकड़ों की जांच महत्वपूर्ण है। ठाकरे ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का बुनियादी हिस्सा है और सूची से नाम हटने की शिकायतों का समय रहते समाधान होना चाहिए।

पश्चिम बंगाल उपचुनाव और अदालत में सुनवाई

पश्चिम बंगाल के उपचुनाव का उदाहरण देते हुए ठाकरे ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद कुछ लोगों ने अपने अधिकार की बहाली के लिए आवेदन किया और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की तत्काल सुनवाई नहीं हुई और तारीख मिलने से मतदाताओं को समय पर राहत मिलने पर सवाल खड़ा हुआ।

ठाकरे ने पूछा कि यदि चुनाव खत्म होने के बाद सुनवाई होती है, तो प्रभावित मतदाताओं को उसका व्यावहारिक लाभ कैसे मिलेगा। उन्होंने इस स्थिति को संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि नियुक्तियां पारदर्शी और भरोसेमंद प्रक्रिया के जरिए हों, ताकि आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बना रहे।

ठाकरे ने पहले की चयन समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटाकर उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल किया। अमित शाह का नाम लेते हुए ठाकरे ने केंद्र पर चुनाव आयोग को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए अहम है। उनके मुताबिक, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए, ताकि मतदाताओं के बीच संदेह न रहे।

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर टिप्पणी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का जिक्र करते हुए ठाकरे ने नागरिकों के मतदान और नागरिकता संबंधी अधिकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या गृह मंत्रालय के पास किसी नागरिक का वोट देने का अधिकार या नागरिकता अधिकार खत्म करने की शक्ति है और ऐसी शक्तियों का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।

ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसलों और उसके नेतृत्व पर जनता का भरोसा कायम रहना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश में पहले ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का आंदोलन चर्चा में था, जबकि अब ‘इंडिया अगेंस्ट वोट चोर’ की लड़ाई की जरूरत महसूस हो रही है। यह टिप्पणी उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के संदर्भ में की।

भाजपा पर बदले की राजनीति का आरोप

भाजपा पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल सुशासन देने के बजाय राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बदले की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका होती है, लेकिन संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

गर्जना मोर्चा के मंच से ठाकरे का मुख्य संदेश यही रहा कि मतदाता सूची से जुड़े दावों की निष्पक्ष जांच हो, चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बने और नागरिकों को अपने मतदान अधिकारों के इस्तेमाल में किसी तरह की बाधा न आए। उनके आरोपों पर संबंधित संस्थाओं और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद के पूरे संदर्भ को समझने के लिए अहम होगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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