राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर कटाक्ष किया है, जिसमें मोदी ने कहा था कि वह आज भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं और अपनी सीखने की क्षमता कम न होने की प्रार्थना करते हैं। सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर ‘आइए सीखिए’ शीर्षक से पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री मोदी को युवाओं, किसानों और आदिवासियों की बात सुनने, नफरत से दूर रहने और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का सम्मान करने की सलाह दी।
सिब्बल की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिए गए संबोधन के एक दिन बाद आई। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए अपने सीखते रहने के संकल्प का जिक्र किया था। इसके जवाब में सिब्बल ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा।

मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि वह अब भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं और हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, “आज भी मैं खुद को एक विद्यार्थी मानता हूं। मैं हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूं। इसलिए आज मैंने ईश्वर से प्रार्थना की कि मेरी सीखने की क्षमता कम न हो।”
मोदी की यह बात उनके सार्वजनिक जीवन में सीखते रहने और अनुभव से आगे बढ़ने के संदेश के रूप में सामने आई। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इस टिप्पणी को सरकार के कामकाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाने का अवसर बनाया। कपिल सिब्बल की पोस्ट भी इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा रही।
सिब्बल की ‘आइए सीखिए’ पोस्ट में क्या था?
कपिल सिब्बल ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी के बयान का संदर्भ देते हुए लिखा कि सीखने के साथ कुछ जरूरी बातें भी अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं, किसानों और आदिवासियों की बात सुनने, नफरत से दूर रहने, दूसरों के सपनों को अपनाने और विविधता को महत्व देने की बात कही।
October 7, 2026
PM :
“I prayed…that my power to learn does not wane”यह भी पढ़ेंमतदाता सूची विवाद पर गरजे उद्धव ठाकरेLet us learn to :
Listen to
our youth
farmers
adivasisshun hate
embrace other’s dreams
value diversitystop vote manipulations
respect the fundamentals of democracy
STOP unprincipled defections
— Kapil Sibal (@KapilSibal) October 8, 2026
सिब्बल ने आगे वोट में हेरफेर रोकने, लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का सम्मान करने और बिना सिद्धांत के दल-बदल पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई। उनकी पोस्ट में शामिल ये मुद्दे भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। हालांकि, पोस्ट में लगाए गए राजनीतिक संकेतों को सिब्बल की टिप्पणी के रूप में ही देखा जाना चाहिए; यह अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि नहीं है।
वोट और लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठाया सवाल
सिब्बल की टिप्पणी का एक अहम हिस्सा चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा था। उन्होंने वोट में हेरफेर रोकने और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का सम्मान करने की बात कहकर चुनावी निष्पक्षता तथा राजनीतिक जवाबदेही पर ध्यान खींचा। विपक्षी दल समय-समय पर चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि सरकार इन आलोचनाओं को राजनीतिक आरोप बताती रही है।
सिब्बल ने दल-बदल का मुद्दा भी उठाया। भारतीय राजनीति में निर्वाचित प्रतिनिधियों के दल बदलने और इसके लोकतांत्रिक जनादेश पर पड़ने वाले असर को लेकर अक्सर बहस होती है। अपनी पोस्ट में उन्होंने इसे “बिना सिद्धांत के दल-बदल” बताते हुए रोकने की बात कही।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कहा कि देश इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है और “हम यह करके दिखाएंगे” का नारा दिया। मोदी ने सरकार की विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जो बातें असंभव लगती थीं, वे अब संभव हो रही हैं।
प्रधानमंत्री ने चुनावों के दौरान जातिगत विभाजन को भी एक बड़ी चुनौती बताया। उनके भाषण में विकास के लक्ष्य के साथ सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का उल्लेख भी शामिल था। सिब्बल की प्रतिक्रिया ने इसी व्यापक राजनीतिक चर्चा में युवाओं, किसानों, आदिवासियों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े सवालों को सामने रखा।
बयान पर राजनीतिक बहस जारी
कपिल सिब्बल का प्रधानमंत्री मोदी पर तंज ऐसे समय आया है, जब 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, चुनावी प्रक्रिया और सामाजिक एकता जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री ने सीखते रहने की बात कही, जबकि सिब्बल ने अपनी पोस्ट के जरिए यह सवाल उठाया कि सार्वजनिक जीवन में किन मूल्यों और जिम्मेदारियों को सीखना तथा अपनाना जरूरी है।
इस तरह दोनों नेताओं के बयानों ने एक बार फिर विकास, लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता और सामाजिक विविधता पर बहस को हवा दी है। सिब्बल की पोस्ट प्रधानमंत्री के भाषण पर विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि मोदी का संबोधन जनसेवा के 25 वर्ष और विकसित भारत के लक्ष्य पर केंद्रित था।


























